श्रीहरिकोटा से लौटे छात्रों, इसरो भ्रमण के अनुभव बताए:सतना के छात्रों ने तय किया—अब विज्ञान में ही बनाना है करियर
सतना से विज्ञान मंथन यात्रा के तहत इसरो का भ्रमण पर गए विद्यार्थियों के मन पर वैज्ञानिक छाप गहरी दिखी। श्रीहरिकोटा से वापस आकर व्यंकट क्रमांक-1 एक्सीलेंस स्कूल के छात्रों ने बताया कि सात दिन की यात्रा के दौरान उन्होंने इसरो बेंगलुरु, श्रीहरिकोटा और चेन्नई का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नए कामों को करीब से समझने का मौका मिला। इस यात्रा में एक्सीलेंस स्कूल व्यंकट क्रमांक-1 के 16, सांदीपनी विद्यालय बगहा के 2 और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चोरहटा से 6 छात्र-छात्राएं शामिल थे। इन विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों के साथ रहकर अंतरिक्ष अनुसंधान को समझने का मौका मिला। छात्रों ने बताया कि यह यात्रा उनके जीवन की दिशा बदलने वाली साबित हुई है। वैज्ञानिक बनने की सोच पैदा हुई
छात्र-छात्राओं को विज्ञान मंथन यात्रा में ले गए उच्च माध्यमिक शिक्षक (रसायन विज्ञान) डॉ. रामानुज पाठक और शिक्षिका नविता जायसवाल ने भी अपने अनुभव साझा किए। डॉ. पाठक ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ घूमने की नहीं, बल्कि जिज्ञासा को ज्ञान और विज्ञान को लक्ष्य में बदलने की प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि जब विद्यार्थी श्रीहरिकोटा जैसे बड़े अंतरिक्ष केंद्र को खुद देखते हैं, तो उनके अंदर वैज्ञानिक बनने की सोच अपने आप पैदा होती है। लॉन्च पैड देख बढ़ा उत्साह छात्रा मोहिना गुप्ता ने बताया कि इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च पैड और रॉकेट लॉन्च की प्रक्रिया को समझना उनके लिए बहुत रोमांचक रहा। उन्होंने कहा कि किताबों में पढ़ी चीजों को जब असल में देखा, तो विज्ञान के प्रति उनकी रुचि कई गुना बढ़ गई। मोहिना ने कहा, "आज हम इसरो देखकर आए हैं, अब कल मैं वहीं खड़ी मिलूंगी।" रितिक तिवारी ने बताया कि इस यात्रा ने उन्हें अनुशासन, टीमवर्क और वैज्ञानिक सोच का महत्व सिखाया है। उन्होंने खास तौर पर श्रीहरिकोटा के काम करने के तरीके को देखकर प्रेरणा ली। रितिक ने आगे चलकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य बनाया है। छात्रों ने साझा किए अनुभव पल्लवी सिंह ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ जानकारी देने वाली नहीं, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने वाली भी रही।
राजवीर सिंह तोमर ने इसरो के अलग-अलग विभागों जैसे सैटेलाइट बनाना, ट्रैकिंग सिस्टम और डेटा विश्लेषण को समझना बहुत उपयोगी बताया। आधुनिक विज्ञान और परंपरा का मेल एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य कमलेश सिंह बघेल ने कहा कि यह यात्रा साबित करती है कि अगर विद्यार्थियों को सही मौका और मार्गदर्शन मिले, तो वे बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा भी कर सकते हैं। यह यात्रा पुराने ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने का एक अच्छा उदाहरण है।
सतना से विज्ञान मंथन यात्रा के तहत इसरो का भ्रमण पर गए विद्यार्थियों के मन पर वैज्ञानिक छाप गहरी दिखी। श्रीहरिकोटा से वापस आकर व्यंकट क्रमांक-1 एक्सीलेंस स्कूल के छात्रों ने बताया कि सात दिन की यात्रा के दौरान उन्होंने इसरो बेंगलुरु, श्रीहरिकोटा और चेन्नई का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नए कामों को करीब से समझने का मौका मिला। इस यात्रा में एक्सीलेंस स्कूल व्यंकट क्रमांक-1 के 16, सांदीपनी विद्यालय बगहा के 2 और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चोरहटा से 6 छात्र-छात्राएं शामिल थे। इन विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों के साथ रहकर अंतरिक्ष अनुसंधान को समझने का मौका मिला। छात्रों ने बताया कि यह यात्रा उनके जीवन की दिशा बदलने वाली साबित हुई है। वैज्ञानिक बनने की सोच पैदा हुई
छात्र-छात्राओं को विज्ञान मंथन यात्रा में ले गए उच्च माध्यमिक शिक्षक (रसायन विज्ञान) डॉ. रामानुज पाठक और शिक्षिका नविता जायसवाल ने भी अपने अनुभव साझा किए। डॉ. पाठक ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ घूमने की नहीं, बल्कि जिज्ञासा को ज्ञान और विज्ञान को लक्ष्य में बदलने की प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि जब विद्यार्थी श्रीहरिकोटा जैसे बड़े अंतरिक्ष केंद्र को खुद देखते हैं, तो उनके अंदर वैज्ञानिक बनने की सोच अपने आप पैदा होती है। लॉन्च पैड देख बढ़ा उत्साह छात्रा मोहिना गुप्ता ने बताया कि इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च पैड और रॉकेट लॉन्च की प्रक्रिया को समझना उनके लिए बहुत रोमांचक रहा। उन्होंने कहा कि किताबों में पढ़ी चीजों को जब असल में देखा, तो विज्ञान के प्रति उनकी रुचि कई गुना बढ़ गई। मोहिना ने कहा, "आज हम इसरो देखकर आए हैं, अब कल मैं वहीं खड़ी मिलूंगी।" रितिक तिवारी ने बताया कि इस यात्रा ने उन्हें अनुशासन, टीमवर्क और वैज्ञानिक सोच का महत्व सिखाया है। उन्होंने खास तौर पर श्रीहरिकोटा के काम करने के तरीके को देखकर प्रेरणा ली। रितिक ने आगे चलकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य बनाया है। छात्रों ने साझा किए अनुभव पल्लवी सिंह ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ जानकारी देने वाली नहीं, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने वाली भी रही।
राजवीर सिंह तोमर ने इसरो के अलग-अलग विभागों जैसे सैटेलाइट बनाना, ट्रैकिंग सिस्टम और डेटा विश्लेषण को समझना बहुत उपयोगी बताया। आधुनिक विज्ञान और परंपरा का मेल एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य कमलेश सिंह बघेल ने कहा कि यह यात्रा साबित करती है कि अगर विद्यार्थियों को सही मौका और मार्गदर्शन मिले, तो वे बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा भी कर सकते हैं। यह यात्रा पुराने ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने का एक अच्छा उदाहरण है।