अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में ट्रांजिशनल करिकुलम:15 दिनों तक 200 जड़ी-बूटियों की देंगे जानकारी, पंचकर्म-योगा से रूबरू होंगे विद्यार्थी

इंदौर के लोकमान्य नगर स्थित शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में ट्रांजिशनल करिकुलम कार्यक्रम की शुरुआत हुई। नव प्रवेशित विद्यार्थियों को अगले 15 दिनों तक गिलोय, आमलकी, हल्दी, ग्वारपाठा कांचनार, वासा, तुलसी, पीपल की 200 प्रकार की जड़ी बूटियों की जानकारी दी जाएगी। वहीं, प्राचीन पद्धति नाड़ी परीक्षा, प्रकृति परीक्षा, मूत्र परीक्षा, पंचकर्म, योगा, शल्य कर्म, अग्निकर्म, कार्य चिकित्सा से भी स्टूडेंट्स को रूबरू कराया जाएगा। पहले दिन सोमवार को कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अजीत पाल सिंह चौहान ने ट्रांजिशनल कार्यक्रम की जानकारी दी। कहा- केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने पूरे देश के आयुर्वेद कॉलेजों में नवीन प्रवेशित सत्र 2024-25 के विद्यार्थियों का ट्रांजिशनल करिकुलम प्रोग्राम शुरू करने का कार्यक्रम बनाया है। इसके तहत हमारी कॉलेज में व्याख्यान देने विशेषज्ञों को बुलाया गया है। विद्यार्थियों को फार्मेसी, हर्बल गार्डन, हॉस्पिटल का विजिट भी कराया जाएगा। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में डीसीपी ​​​​​​डॉ. ऋषिकेश मीणा और विशेष अतिथि प्रोफेसर आईआईटी मुंबई चेतन सिंह सोलंकी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों ने चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करने की शपथ ली। चिकित्सा कर्म सिर्फ आजीविका के लिए नहीं है आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एस के नायक ने कहा कि छात्रों को प्रवेश के समय चिकित्सा से संबंधित सभी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। चिकित्सा कर्म सिर्फ आजीविका कमाने के लिए नहीं है यह पुण्य कार्य है। यह कार्यक्रम 15 दिन तक चलेगा। कार्यक्रम में छात्रों को चिकित्सा से संबंधित सिद्धांत जानकारी एवं प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी। आयुर्वेद के विद्वान अतिथियों द्वारा भी लेक्चर कराए जाएंगे। शल्य तंत्र विभाग अध्यक्ष अखिलेश भार्गव ने बताया- हॉस्पिटल के विजिट के दौरान छात्रों को मरीजों की सेवा और इलाज की जानकारी दी जाएगी। चिकित्सा में काम आने वाले सभी प्रकार के इंस्ट्रूमेंट बताए जाएंगे। बच्चों को हर्बल गार्डन में सभी प्रकार की चिकित्सा में काम आने वाली जड़ी बूटियों जैसे गिलोय, आमलकी, हल्दी, ग्वारपाठा कांचनार, वासा, तुलसी, पीपल की 200 प्रकार की जड़ी बूटियों की जानकारी दी जाएगी। अखिलेश भार्गव ने बताया- विद्यार्थियों को आयुर्वेद फार्मेसी में किस प्रकार जड़ी बूटियों से दवाइयां बनाई जाती है और उनकी पैकिंग की जाती है यह भी बताया जाएगा। छात्रों को आयुर्वेद की प्राचीन पद्धति नाड़ी परीक्षा, प्रकृति परीक्षा, मूत्र परीक्षा, पंचकर्म, योगा, शल्य कर्म, अग्निकर्म, कार्य चिकित्सा की भी जानकारी दी जाएगी।

अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में ट्रांजिशनल करिकुलम:15 दिनों तक 200 जड़ी-बूटियों की देंगे जानकारी, पंचकर्म-योगा से रूबरू होंगे विद्यार्थी
इंदौर के लोकमान्य नगर स्थित शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में ट्रांजिशनल करिकुलम कार्यक्रम की शुरुआत हुई। नव प्रवेशित विद्यार्थियों को अगले 15 दिनों तक गिलोय, आमलकी, हल्दी, ग्वारपाठा कांचनार, वासा, तुलसी, पीपल की 200 प्रकार की जड़ी बूटियों की जानकारी दी जाएगी। वहीं, प्राचीन पद्धति नाड़ी परीक्षा, प्रकृति परीक्षा, मूत्र परीक्षा, पंचकर्म, योगा, शल्य कर्म, अग्निकर्म, कार्य चिकित्सा से भी स्टूडेंट्स को रूबरू कराया जाएगा। पहले दिन सोमवार को कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अजीत पाल सिंह चौहान ने ट्रांजिशनल कार्यक्रम की जानकारी दी। कहा- केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने पूरे देश के आयुर्वेद कॉलेजों में नवीन प्रवेशित सत्र 2024-25 के विद्यार्थियों का ट्रांजिशनल करिकुलम प्रोग्राम शुरू करने का कार्यक्रम बनाया है। इसके तहत हमारी कॉलेज में व्याख्यान देने विशेषज्ञों को बुलाया गया है। विद्यार्थियों को फार्मेसी, हर्बल गार्डन, हॉस्पिटल का विजिट भी कराया जाएगा। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में डीसीपी ​​​​​​डॉ. ऋषिकेश मीणा और विशेष अतिथि प्रोफेसर आईआईटी मुंबई चेतन सिंह सोलंकी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों ने चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करने की शपथ ली। चिकित्सा कर्म सिर्फ आजीविका के लिए नहीं है आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एस के नायक ने कहा कि छात्रों को प्रवेश के समय चिकित्सा से संबंधित सभी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। चिकित्सा कर्म सिर्फ आजीविका कमाने के लिए नहीं है यह पुण्य कार्य है। यह कार्यक्रम 15 दिन तक चलेगा। कार्यक्रम में छात्रों को चिकित्सा से संबंधित सिद्धांत जानकारी एवं प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी। आयुर्वेद के विद्वान अतिथियों द्वारा भी लेक्चर कराए जाएंगे। शल्य तंत्र विभाग अध्यक्ष अखिलेश भार्गव ने बताया- हॉस्पिटल के विजिट के दौरान छात्रों को मरीजों की सेवा और इलाज की जानकारी दी जाएगी। चिकित्सा में काम आने वाले सभी प्रकार के इंस्ट्रूमेंट बताए जाएंगे। बच्चों को हर्बल गार्डन में सभी प्रकार की चिकित्सा में काम आने वाली जड़ी बूटियों जैसे गिलोय, आमलकी, हल्दी, ग्वारपाठा कांचनार, वासा, तुलसी, पीपल की 200 प्रकार की जड़ी बूटियों की जानकारी दी जाएगी। अखिलेश भार्गव ने बताया- विद्यार्थियों को आयुर्वेद फार्मेसी में किस प्रकार जड़ी बूटियों से दवाइयां बनाई जाती है और उनकी पैकिंग की जाती है यह भी बताया जाएगा। छात्रों को आयुर्वेद की प्राचीन पद्धति नाड़ी परीक्षा, प्रकृति परीक्षा, मूत्र परीक्षा, पंचकर्म, योगा, शल्य कर्म, अग्निकर्म, कार्य चिकित्सा की भी जानकारी दी जाएगी।