अमृत 2.0 के तहत ग्वालियर को 30 करोड़ की मंजूरी:सीवर लाइनों की सफाई और रखरखाव के लिए अत्याधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी
ग्वालियर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 30 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। इस राशि में केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा 15-15 करोड़ रुपए का योगदान किया जाएगा। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने बताया कि इस बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शहर की सीवर व्यवस्था सुधारने पर खर्च किया जाएगा। करीब 20 करोड़ रुपए से सीवर लाइनों की सफाई और रखरखाव के लिए अत्याधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी। वहीं 5 करोड़ रुपए की लागत से जीआईएस आधारित डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे शहर की सीवर लाइनों का पूरा डिजिटल डेटा उपलब्ध रहेगा और समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होगा। वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य किए जाएंगे जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 5.75 करोड़ रुपए वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शहर में कुओं और बावड़ियों के संरक्षण व पुनर्भरण का काम किया जा रहा है। अब जीआईएस मैपिंग के जरिए चिन्हित जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है। संपत्तियों का सर्वे किया जाएगा 4.25 करोड़ रुपए संपत्तिकर बढ़ाने की दिशा में खर्च होंगे। जीआईएस मैपिंग के माध्यम से शहर के सभी घरों और संपत्तियों का सर्वे किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक संपत्तियों को नगर निगम के रिकॉर्ड में शामिल कर राजस्व बढ़ाया जा सके
ग्वालियर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 30 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। इस राशि में केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा 15-15 करोड़ रुपए का योगदान किया जाएगा। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने बताया कि इस बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शहर की सीवर व्यवस्था सुधारने पर खर्च किया जाएगा। करीब 20 करोड़ रुपए से सीवर लाइनों की सफाई और रखरखाव के लिए अत्याधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी। वहीं 5 करोड़ रुपए की लागत से जीआईएस आधारित डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे शहर की सीवर लाइनों का पूरा डिजिटल डेटा उपलब्ध रहेगा और समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होगा। वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य किए जाएंगे जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 5.75 करोड़ रुपए वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शहर में कुओं और बावड़ियों के संरक्षण व पुनर्भरण का काम किया जा रहा है। अब जीआईएस मैपिंग के जरिए चिन्हित जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है। संपत्तियों का सर्वे किया जाएगा 4.25 करोड़ रुपए संपत्तिकर बढ़ाने की दिशा में खर्च होंगे। जीआईएस मैपिंग के माध्यम से शहर के सभी घरों और संपत्तियों का सर्वे किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक संपत्तियों को नगर निगम के रिकॉर्ड में शामिल कर राजस्व बढ़ाया जा सके