शिवपुरी के छिपौल गांव में प्रशासन ने बोरवेल कराया:अब ग्रामीणों को मिलेगा साफ पानी, नदी का गंदा पानी पीने को थे मजबूर
शिवपुरी जिले के कोलारस जनपद की कोटा पंचायत के छिपौल गांव में वर्षों पुराना पेयजल संकट समाप्त हो गया है। ग्रामीणों को नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा था। समस्या सामने आने के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर गांव में नया बोरवेल स्थापित किया गया है, जिससे अब ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। छिपौल गांव के लगभग 1500 ग्रामीण लंबे समय से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे थे। गांव में मौजूद एकमात्र हैंडपंप कई वर्षों से खराब था, जबकि दूसरा हैंडपंप भी पुराना होकर बंद हो चुका था। ग्रामीणों की कई शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। पेयजल की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीणों को पास की नदी पर निर्भर रहना पड़ता था। यह नदी उनके लिए पीने, नहाने और अन्य घरेलू उपयोग का एकमात्र स्रोत थी। नदी का पानी स्वच्छ न होने के कारण गांव में बीमारियों का खतरा बना हुआ था, जिससे विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा था। नदी के बीच गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ता था। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी। नदी का जलस्तर कम होने पर ग्रामीणों को नदी के बीच गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ता था। यह प्रक्रिया न केवल कठिन थी, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यधिक जोखिम भरी थी। समस्या को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की टीम गांव पहुंची और नए बोरवेल की खुदाई का कार्य शुरू किया गया। पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) शुभम अग्रवाल ने बताया कि बोरवेल में लगभग 650 फीट की गहराई पर 2 इंच पानी मिला था, जिसे बाद में 800 फीट तक गहरा किया गया। उन्होंने कहा कि गर्मियों में इस गहराई पर पानी मिलना एक अच्छी स्थिति है और यह जलस्रोत लंबे समय तक गांव की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करेगा। बोरवेल तैयार होने के बाद अब गांव में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। इससे ग्रामीणों को नदी के गंदे पानी से निजात मिली है। ये खबर भी पढ़े- 1500 ग्रामीण नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर: गड्ढा खोदकर पानी निकालते हैं, हैंडपंप खराब, बोले- चुनाव के समय ही नजर आते हैं नेता
शिवपुरी जिले के कोलारस जनपद की कोटा पंचायत के छिपौल गांव में वर्षों पुराना पेयजल संकट समाप्त हो गया है। ग्रामीणों को नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा था। समस्या सामने आने के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर गांव में नया बोरवेल स्थापित किया गया है, जिससे अब ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। छिपौल गांव के लगभग 1500 ग्रामीण लंबे समय से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे थे। गांव में मौजूद एकमात्र हैंडपंप कई वर्षों से खराब था, जबकि दूसरा हैंडपंप भी पुराना होकर बंद हो चुका था। ग्रामीणों की कई शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। पेयजल की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीणों को पास की नदी पर निर्भर रहना पड़ता था। यह नदी उनके लिए पीने, नहाने और अन्य घरेलू उपयोग का एकमात्र स्रोत थी। नदी का पानी स्वच्छ न होने के कारण गांव में बीमारियों का खतरा बना हुआ था, जिससे विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा था। नदी के बीच गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ता था। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी। नदी का जलस्तर कम होने पर ग्रामीणों को नदी के बीच गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ता था। यह प्रक्रिया न केवल कठिन थी, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यधिक जोखिम भरी थी। समस्या को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की टीम गांव पहुंची और नए बोरवेल की खुदाई का कार्य शुरू किया गया। पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) शुभम अग्रवाल ने बताया कि बोरवेल में लगभग 650 फीट की गहराई पर 2 इंच पानी मिला था, जिसे बाद में 800 फीट तक गहरा किया गया। उन्होंने कहा कि गर्मियों में इस गहराई पर पानी मिलना एक अच्छी स्थिति है और यह जलस्रोत लंबे समय तक गांव की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करेगा। बोरवेल तैयार होने के बाद अब गांव में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। इससे ग्रामीणों को नदी के गंदे पानी से निजात मिली है। ये खबर भी पढ़े- 1500 ग्रामीण नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर: गड्ढा खोदकर पानी निकालते हैं, हैंडपंप खराब, बोले- चुनाव के समय ही नजर आते हैं नेता