रायसेन में भीषण गर्मी में जंगलों के सौंसर बने सहारा,:बाघ, तेंदुआ, हिरण सहित वन्य प्राणी बुझा रहे प्यास, 44 डिग्री तक पहुंच चुका पारा
रायसेन में भीषण गर्मी के कारण जंगलों के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं। ऐसे में वन विभाग द्वारा तैयार किए गए कृत्रिम जल स्रोतों (सौंसरों) से वन्य प्राणी अपनी प्यास बुझा रहे हैं। कई बार पानी की तलाश में वन्यजीव रिहायशी इलाकों की ओर पहुंच जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए वन विभाग ने जंगलों में बड़े स्तर पर पानी की व्यवस्था की है। जंगलों में बनाए गए 140 नए सौंसर वन विभाग ने जंगल क्षेत्र में कुल 140 नए सौंसर तैयार किए हैं। इसके अलावा 100 पुरानी झिरियों की सफाई कर उन्हें फिर से उपयोग योग्य बनाया गया है। इन सौंसरों का निर्माण सीमेंट-कंक्रीट से किया गया है, ताकि पानी लंबे समय तक सुरक्षित रहे और जमीन में न रिसे। हर दो दिन में भरे जा रहे पानी के टैंकर गर्मी के पूरे मौसम में वन्यजीवों को पानी की कमी न हो, इसके लिए इन जल कुंडों में हर दो दिन में टैंकरों से पानी भरा जा रहा है। भीषण गर्मी के बावजूद वन्य प्राणी इन सौंसरों में पानी पीते और अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं। गांवों की ओर कम होगा वन्यजीवों का रुख वन विभाग का मानना है कि इन व्यवस्थाओं से वन्य प्राणी जंगल के भीतर ही पानी पी सकेंगे, जिससे उनका गांवों की ओर आना कम होगा। रायसेन के जंगल बाघ, तेंदुआ, भालू, नीलगाय, हिरण और सांभर जैसे वन्यजीवों का प्रमुख निवास क्षेत्र हैं। वन विभाग की यह पहल न केवल वन्यजीवों की प्यास बुझाने में मदद कर रही है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रायसेन में भीषण गर्मी के कारण जंगलों के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं। ऐसे में वन विभाग द्वारा तैयार किए गए कृत्रिम जल स्रोतों (सौंसरों) से वन्य प्राणी अपनी प्यास बुझा रहे हैं। कई बार पानी की तलाश में वन्यजीव रिहायशी इलाकों की ओर पहुंच जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए वन विभाग ने जंगलों में बड़े स्तर पर पानी की व्यवस्था की है। जंगलों में बनाए गए 140 नए सौंसर वन विभाग ने जंगल क्षेत्र में कुल 140 नए सौंसर तैयार किए हैं। इसके अलावा 100 पुरानी झिरियों की सफाई कर उन्हें फिर से उपयोग योग्य बनाया गया है। इन सौंसरों का निर्माण सीमेंट-कंक्रीट से किया गया है, ताकि पानी लंबे समय तक सुरक्षित रहे और जमीन में न रिसे। हर दो दिन में भरे जा रहे पानी के टैंकर गर्मी के पूरे मौसम में वन्यजीवों को पानी की कमी न हो, इसके लिए इन जल कुंडों में हर दो दिन में टैंकरों से पानी भरा जा रहा है। भीषण गर्मी के बावजूद वन्य प्राणी इन सौंसरों में पानी पीते और अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं। गांवों की ओर कम होगा वन्यजीवों का रुख वन विभाग का मानना है कि इन व्यवस्थाओं से वन्य प्राणी जंगल के भीतर ही पानी पी सकेंगे, जिससे उनका गांवों की ओर आना कम होगा। रायसेन के जंगल बाघ, तेंदुआ, भालू, नीलगाय, हिरण और सांभर जैसे वन्यजीवों का प्रमुख निवास क्षेत्र हैं। वन विभाग की यह पहल न केवल वन्यजीवों की प्यास बुझाने में मदद कर रही है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।