केन-बेतवा परियोजना के प्रदर्शनकारियों का धोड़न डैम पर चिता आंदोलन:अमित भटनागर की रिहाई की कर रहे मांग, मंगलवार को जीतू पटवारी होंगे शामिल
छतरपुर और पन्ना की सीमा पर स्थित धोड़न डैम पर केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा ‘चिता आंदोलन’ तेज हो गया है। सैकड़ों ग्रामीण सांकेतिक चिताओं पर लेटकर अपने नेता अमित भटनागर की रिहाई और विस्थापितों के अधिकारों की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन पर किया जा रहा है। आंदोलन शनिवार से चल रहा है। आंदोलन के तीसरे दिन चिताओं पर लेटीं महिलाएं और बच्चे आंदोलन के तीसरे दिन यानी सोमवार को आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों के साथ सांकेतिक चिताओं पर लेटी नजर आईं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। ग्रामीणों का यह मौन सत्याग्रह प्रशासन को चेतावनी दे रहा है कि बांध निर्माण से पहले उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। अमित भटनागर की रिहाई की मांग प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में उनके नेता अमित भटनागर की तत्काल रिहाई शामिल है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें हिरासत में लिया गया है। साथ ही परियोजना से विस्थापित होने वाले लोगों के लिए उचित मुआवजा और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग भी की जा रही है। आंदोलन का नेतृत्व दिव्या अहिरवार कर रही हैं। प्रदर्शनकारी “अमित भटनागर को रिहा करो या हमें अग्नि के हवाले करो” जैसे नारे लगा रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति और चुप्पी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। दूर-दराज के गांवों से हजारों आदिवासी पैदल चलकर आंदोलन स्थल पहुंच रहे हैं। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारियों का आंदोलन जारी है। जीतू पटवारी पहुंचेंगे छतरपुर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार 12 मई को छतरपुर पहुंचेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वह 11 मई की रात खजुराहो पहुंचेंगे। इसके बाद 12 मई की सुबह खजुराहो से बमीठा और रनगुवा होते हुए धोड़न बांध स्थल पहुंचेंगे। यहां वे विस्थापित परिवारों से संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन के सामने उठाने की बात कही गई है। जल, जंगल और जमीन की लड़ाई पर फोकस
कांग्रेस का कहना है कि वह आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाएगी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संघर्ष अब सिर्फ एक बांध का विरोध नहीं, बल्कि अपनी जमीन, पहचान और अस्तित्व बचाने की लड़ाई बन चुका है। प्रदर्शन के दौरान की देखें तस्वीरें इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… केन-बेतवा 'विस्थापितों संग SP ऑफिस के बाहर कांग्रेस विधायक सोए पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसान और आदिवासी शुक्रवार शाम से एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन पूरी रात जारी रहा। लोग वहीं रुके। अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। पूरी खबर पढ़ें…
छतरपुर और पन्ना की सीमा पर स्थित धोड़न डैम पर केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा ‘चिता आंदोलन’ तेज हो गया है। सैकड़ों ग्रामीण सांकेतिक चिताओं पर लेटकर अपने नेता अमित भटनागर की रिहाई और विस्थापितों के अधिकारों की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन पर किया जा रहा है। आंदोलन शनिवार से चल रहा है। आंदोलन के तीसरे दिन चिताओं पर लेटीं महिलाएं और बच्चे आंदोलन के तीसरे दिन यानी सोमवार को आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों के साथ सांकेतिक चिताओं पर लेटी नजर आईं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। ग्रामीणों का यह मौन सत्याग्रह प्रशासन को चेतावनी दे रहा है कि बांध निर्माण से पहले उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। अमित भटनागर की रिहाई की मांग प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में उनके नेता अमित भटनागर की तत्काल रिहाई शामिल है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें हिरासत में लिया गया है। साथ ही परियोजना से विस्थापित होने वाले लोगों के लिए उचित मुआवजा और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग भी की जा रही है। आंदोलन का नेतृत्व दिव्या अहिरवार कर रही हैं। प्रदर्शनकारी “अमित भटनागर को रिहा करो या हमें अग्नि के हवाले करो” जैसे नारे लगा रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति और चुप्पी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। दूर-दराज के गांवों से हजारों आदिवासी पैदल चलकर आंदोलन स्थल पहुंच रहे हैं। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारियों का आंदोलन जारी है। जीतू पटवारी पहुंचेंगे छतरपुर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार 12 मई को छतरपुर पहुंचेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वह 11 मई की रात खजुराहो पहुंचेंगे। इसके बाद 12 मई की सुबह खजुराहो से बमीठा और रनगुवा होते हुए धोड़न बांध स्थल पहुंचेंगे। यहां वे विस्थापित परिवारों से संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन के सामने उठाने की बात कही गई है। जल, जंगल और जमीन की लड़ाई पर फोकस
कांग्रेस का कहना है कि वह आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाएगी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संघर्ष अब सिर्फ एक बांध का विरोध नहीं, बल्कि अपनी जमीन, पहचान और अस्तित्व बचाने की लड़ाई बन चुका है। प्रदर्शन के दौरान की देखें तस्वीरें इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… केन-बेतवा 'विस्थापितों संग SP ऑफिस के बाहर कांग्रेस विधायक सोए पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसान और आदिवासी शुक्रवार शाम से एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन पूरी रात जारी रहा। लोग वहीं रुके। अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। पूरी खबर पढ़ें…