सख्ती नहीं, इसलिए लोग बेखौफ:10 साल से 8 करोड़ का डायवर्सन शुल्क बकाया, नोटिस पर टिकी वसूली; बड़े बकाएदारों पर कार्रवाई भी शून्य
सख्ती नहीं, इसलिए लोग बेखौफ:10 साल से 8 करोड़ का डायवर्सन शुल्क बकाया, नोटिस पर टिकी वसूली; बड़े बकाएदारों पर कार्रवाई भी शून्य
राजधानी में पिछले एक दशक में करीब 8 करोड़ का डायवर्सन शुल्क वसूला नहीं जा सका है। हर साल की तरह इस साल भी तहसील वाले लोगों को केवल नोटिस देकर ही काम चला रहे हैं। अफसरों की सख्ती नहीं होने से लोग भी सालाना डायवर्सन शुल्क देने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इससे सरकार को हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। राजस्व विभाग के आला अफसरों के दबाव में इस साल भी तहसील वालों ने 2000 से ज्यादा लोगों को डायवर्सन शुल्क देने का नोटिस जारी किया है। इसके बावजूद लोग डायवर्सन शुल्क देने नहीं आ रहे हैं। पिछले डेढ़ दशक में डायवर्सन शुल्क नहीं देने वाले किसी भी व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस वजह से लोग नोटिस को गंभीरता से नहीं लेते हैं। यही वजह है कि डायवर्सन शुल्क की वसूली में रायपुर हर साल पिछड़ते ही जा रहा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह भी पता चला है कि जो डायवर्सन शुल्क नहीं दे रहे हैं उसमें बड़े बकायादारों में अस्पताल संचालक, राइस मिलर, निजी स्कूल, पेट्रोल पंप और नए उद्योग लगाने वाले उद्योगपति शामिल हैं। इन्होंने कृषि जमीन को आवासीय और आवासीय को कमर्शियल में बदलवाया है।
एक बार डायवर्सन होने के बाद लोग सालाना शुल्क नहीं दे रहे, अफसर भी नहीं वसूलते सिस्टम फेल... डायवर्सन शुल्क बकाया होने पर भी हो रही रजिस्ट्री किस जमीन पर कितना डायवर्सन शुल्क बकाया है। इसकी जानकारी आज तक ऑनलाइन नहीं हो पाई है। यही वजह है कि लाखों रुपए का शुल्क बकाया होने के बावजूद जमीन की खरीदी-बिक्री हो जाती है। रजिस्ट्री दफ्तर में लोग आसानी से रजिस्ट्री भी करवा लेते हैं। पंजीयन दफ्तर वालों के पास भी ऐसा कोई सॉफ्टवेयर नहीं है, जिसमें यह दिखाई दे कि किस जमीन पर कितना डायवर्सन शुल्क बकाया है। यही वजह है कि कई बार ऐसा भी होता है कि जिस व्यक्ति को डायवर्सन शुल्क बकाया का नोटिस दिया जाता है तो वो नोटिस लेने से इनकार करते हुए कहता है कि उसने तो जमीन बेच दी है। अब जो बकाया शुल्क है वो जमीन खरीदने वाले से वसूला जाए। अब नया सिस्टम... दावा- फीस बाकी होने पर डायवर्सन नहीं होगा राजस्व विभाग के अफसरों का कहना है कि जमीन के डायवर्सन के लिए नया एप और सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया गया है। कृषि जमीन को आवासीय या कमर्शियल लैंड में तब्दील करने के लिए जैसे ही सॉफ्टवेयर में आवेदन किया जाएगा पता चल जाएगा कि जमीन पर कितना शुल्क बकाया है। जमीन बेचने वाला जब तक इस शुल्क का भुगतान नहीं कर देगा उसकी जमीन का डायवर्सन नहीं होगा। इस सॉफ्टवेयर को जनवरी से ही काम करना था। लेकिन अभी इसे ट्रायल के तौर पर ही इस्तेमाल किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि मार्च के पहले डायवर्सन का पूरा सिस्टम ऑनलाइन हो जाएगा। अब इस तरह से कर सकते हैं कार्रवाई तहसील अफसरों के अनुसार डायवर्सन शुल्क जमा नहीं करने पर जमीन का लैंडयूज वापस वैसा कर सकते हैं जैसा पहले था। यानी किसी कृषि जमीन को आवासीय बनाया गया है तो उसे वापस कृषि बनाया जा सकता है। इतना ही नहीं डायवर्सन शुल्क नहीं देने वालों की जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक भी लगा सकते हैं। जब तक बकाया है, नए निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी, लेकिन रायपुर के किसी भी तहसील से ऐसी कार्रवाई नहीं की गई है।
ऐसे समझिए...पूरा नियम
कृषि जमीन का लैंडयूज चेंज कराने के लिए जमीन का डायवर्सन कराना अनिवार्य है। लोग पहली बारी भी डायवर्सन शुल्क इसलिए देते हैं क्योंकि बिना शुल्क दिए जमीन का लैंडयूज चेंज नहीं हो सकता। इसके बाद हर साल यह शुल्क देना अनिवार्य है। नियमानुसार जब तक जमीन पर कोई निर्माण नहीं हो जाता या जमीन निगम के रिकार्ड में नहीं चढ़ जाती डायवर्सन शुल्क देना ही होगा। इसमें किसी भी तरह की कोई छूट नहीं है। लगातार कर कर रहे हैं सख्ती
सभी तहसीलदारों से कहा गया है कि वे हर आरआई-पटवारी से जानकारी लेकर डायवर्सन शुल्क की वसूली को तेज करें। बार-बार नोटिस के बाद भी जो शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं उन पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। बकाया शुल्क की वसूली हर हाल में होगी।
नंद कुमार चौबे, एसडीएम रायपुर
राजधानी में पिछले एक दशक में करीब 8 करोड़ का डायवर्सन शुल्क वसूला नहीं जा सका है। हर साल की तरह इस साल भी तहसील वाले लोगों को केवल नोटिस देकर ही काम चला रहे हैं। अफसरों की सख्ती नहीं होने से लोग भी सालाना डायवर्सन शुल्क देने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इससे सरकार को हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। राजस्व विभाग के आला अफसरों के दबाव में इस साल भी तहसील वालों ने 2000 से ज्यादा लोगों को डायवर्सन शुल्क देने का नोटिस जारी किया है। इसके बावजूद लोग डायवर्सन शुल्क देने नहीं आ रहे हैं। पिछले डेढ़ दशक में डायवर्सन शुल्क नहीं देने वाले किसी भी व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस वजह से लोग नोटिस को गंभीरता से नहीं लेते हैं। यही वजह है कि डायवर्सन शुल्क की वसूली में रायपुर हर साल पिछड़ते ही जा रहा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह भी पता चला है कि जो डायवर्सन शुल्क नहीं दे रहे हैं उसमें बड़े बकायादारों में अस्पताल संचालक, राइस मिलर, निजी स्कूल, पेट्रोल पंप और नए उद्योग लगाने वाले उद्योगपति शामिल हैं। इन्होंने कृषि जमीन को आवासीय और आवासीय को कमर्शियल में बदलवाया है।
एक बार डायवर्सन होने के बाद लोग सालाना शुल्क नहीं दे रहे, अफसर भी नहीं वसूलते सिस्टम फेल... डायवर्सन शुल्क बकाया होने पर भी हो रही रजिस्ट्री किस जमीन पर कितना डायवर्सन शुल्क बकाया है। इसकी जानकारी आज तक ऑनलाइन नहीं हो पाई है। यही वजह है कि लाखों रुपए का शुल्क बकाया होने के बावजूद जमीन की खरीदी-बिक्री हो जाती है। रजिस्ट्री दफ्तर में लोग आसानी से रजिस्ट्री भी करवा लेते हैं। पंजीयन दफ्तर वालों के पास भी ऐसा कोई सॉफ्टवेयर नहीं है, जिसमें यह दिखाई दे कि किस जमीन पर कितना डायवर्सन शुल्क बकाया है। यही वजह है कि कई बार ऐसा भी होता है कि जिस व्यक्ति को डायवर्सन शुल्क बकाया का नोटिस दिया जाता है तो वो नोटिस लेने से इनकार करते हुए कहता है कि उसने तो जमीन बेच दी है। अब जो बकाया शुल्क है वो जमीन खरीदने वाले से वसूला जाए। अब नया सिस्टम... दावा- फीस बाकी होने पर डायवर्सन नहीं होगा राजस्व विभाग के अफसरों का कहना है कि जमीन के डायवर्सन के लिए नया एप और सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया गया है। कृषि जमीन को आवासीय या कमर्शियल लैंड में तब्दील करने के लिए जैसे ही सॉफ्टवेयर में आवेदन किया जाएगा पता चल जाएगा कि जमीन पर कितना शुल्क बकाया है। जमीन बेचने वाला जब तक इस शुल्क का भुगतान नहीं कर देगा उसकी जमीन का डायवर्सन नहीं होगा। इस सॉफ्टवेयर को जनवरी से ही काम करना था। लेकिन अभी इसे ट्रायल के तौर पर ही इस्तेमाल किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि मार्च के पहले डायवर्सन का पूरा सिस्टम ऑनलाइन हो जाएगा। अब इस तरह से कर सकते हैं कार्रवाई तहसील अफसरों के अनुसार डायवर्सन शुल्क जमा नहीं करने पर जमीन का लैंडयूज वापस वैसा कर सकते हैं जैसा पहले था। यानी किसी कृषि जमीन को आवासीय बनाया गया है तो उसे वापस कृषि बनाया जा सकता है। इतना ही नहीं डायवर्सन शुल्क नहीं देने वालों की जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक भी लगा सकते हैं। जब तक बकाया है, नए निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी, लेकिन रायपुर के किसी भी तहसील से ऐसी कार्रवाई नहीं की गई है।
ऐसे समझिए...पूरा नियम
कृषि जमीन का लैंडयूज चेंज कराने के लिए जमीन का डायवर्सन कराना अनिवार्य है। लोग पहली बारी भी डायवर्सन शुल्क इसलिए देते हैं क्योंकि बिना शुल्क दिए जमीन का लैंडयूज चेंज नहीं हो सकता। इसके बाद हर साल यह शुल्क देना अनिवार्य है। नियमानुसार जब तक जमीन पर कोई निर्माण नहीं हो जाता या जमीन निगम के रिकार्ड में नहीं चढ़ जाती डायवर्सन शुल्क देना ही होगा। इसमें किसी भी तरह की कोई छूट नहीं है। लगातार कर कर रहे हैं सख्ती
सभी तहसीलदारों से कहा गया है कि वे हर आरआई-पटवारी से जानकारी लेकर डायवर्सन शुल्क की वसूली को तेज करें। बार-बार नोटिस के बाद भी जो शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं उन पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। बकाया शुल्क की वसूली हर हाल में होगी।
नंद कुमार चौबे, एसडीएम रायपुर