60 हजार से अधिक मिसिंग पर्सन पर सिंघार का तंज:नेता प्रतिपक्ष बोले- मिसिंग पर्सन में 39 हजार वयस्क महिलाएं, पश्चिम बंगाल से आगे निकला एमपी
60 हजार से अधिक मिसिंग पर्सन पर सिंघार का तंज:नेता प्रतिपक्ष बोले- मिसिंग पर्सन में 39 हजार वयस्क महिलाएं, पश्चिम बंगाल से आगे निकला एमपी
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि मध्य प्रदेश से 60 हजार से अधिक लापता व्यक्तियों की संख्या सामने आई है। जिसके चलते मिसिंग पर्सन के मामले में एमपी देश के अन्य राज्यों के मुकाबले टॉप पर आ गया है। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने इसका आंकड़ा जारी करते हुए एमपी सरकार पर तंज कसा है और कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार को इसके लिए बधाई देते हैं। सिंघार ने कहा है कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर मध्यप्रदेश अब 60 हजार अनट्रेक्ड मिसिंग पर्सन के मामलों के साथ देश में अव्वल हो गया है। इसमें करीब 39 हजार वयस्क महिलाएं हैं। साथ ही 3,725 नाबालिग लड़कियां और 1,110 लड़के शामिल हैं। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को बधाई ! मध्य प्रदेश अब देश में "Untraced Missing Person" के मामलों में पश्चिम बंगाल को पीछे छोड़कर सबसे ऊपर पहुंच गया है। भाजपा सरकार इसे एक "शानदार" उपलब्धि के तौर पर देख सकती हैं। संसद सत्र में केंद्र सरकार ने खुलासा किया कि 2020 में मध्य प्रदेश में कुल 48 हजार Untraced Missing Person के मामले थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 60 हजार हो गई जबकि पश्चिम बंगाल, जो 2020 में 52 हजार मामलों के साथ पहले नंबर पर था, अब दूसरे स्थान पर धकेल दिया गया है। इन 60 हजार Untraced Missing Person में करीब 39 हजार वयस्क महिलाएं हैं। साथ ही 3,725 नाबालिग लड़कियां और 1,110 लड़के शामिल हैं। सिंघार ने लिखा है कि यह आंकड़ा भयावह है। कुल 60 हजार में से 44 हजार सिर्फ औरतें और बच्चे हैं, जिन्हें ढूंढने में पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हुई। सरकार को कटघरे में खड़े कर रहे आंकड़े सिंघार ने लिखा है कि मध्य प्रदेश में 2020 से 2023 के बीच कुल 1.53 लाख मिसिंग केस दर्ज हुए थे। हालांकि हर साल की शुरुआत में प्रदेश पुलिस "ऑपरेशन मुस्कान" चलाकर मिसिंग केस सुलझाने की कोशिश करती है, लेकिन ये प्रयास बिल्कुल नाकाफी साबित हो रहे हैं। बढ़ते Untraced Missing Person के मामले मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर और कठघरे में खड़े सवाल उठाते हैं। सिंघार ने यह भी लिखा है कि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस विभाग 25-30% कम क्षमता पर काम कर रहा है। हर थाने में स्वीकृत पदों के मुकाबले 35-40% कर्मचारी कम हैं, जिससे उन पर असहनीय कार्यभार पड़ रहा है। इसके अलावा आधुनिक उपकरणों की भी भारी कमी है। पुलिस विभाग और उसके तंत्र को तुरंत मजबूत करने की सख्त जरूरत है, ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके और कम किया जा सके।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि मध्य प्रदेश से 60 हजार से अधिक लापता व्यक्तियों की संख्या सामने आई है। जिसके चलते मिसिंग पर्सन के मामले में एमपी देश के अन्य राज्यों के मुकाबले टॉप पर आ गया है। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने इसका आंकड़ा जारी करते हुए एमपी सरकार पर तंज कसा है और कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार को इसके लिए बधाई देते हैं। सिंघार ने कहा है कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर मध्यप्रदेश अब 60 हजार अनट्रेक्ड मिसिंग पर्सन के मामलों के साथ देश में अव्वल हो गया है। इसमें करीब 39 हजार वयस्क महिलाएं हैं। साथ ही 3,725 नाबालिग लड़कियां और 1,110 लड़के शामिल हैं। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को बधाई ! मध्य प्रदेश अब देश में "Untraced Missing Person" के मामलों में पश्चिम बंगाल को पीछे छोड़कर सबसे ऊपर पहुंच गया है। भाजपा सरकार इसे एक "शानदार" उपलब्धि के तौर पर देख सकती हैं। संसद सत्र में केंद्र सरकार ने खुलासा किया कि 2020 में मध्य प्रदेश में कुल 48 हजार Untraced Missing Person के मामले थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 60 हजार हो गई जबकि पश्चिम बंगाल, जो 2020 में 52 हजार मामलों के साथ पहले नंबर पर था, अब दूसरे स्थान पर धकेल दिया गया है। इन 60 हजार Untraced Missing Person में करीब 39 हजार वयस्क महिलाएं हैं। साथ ही 3,725 नाबालिग लड़कियां और 1,110 लड़के शामिल हैं। सिंघार ने लिखा है कि यह आंकड़ा भयावह है। कुल 60 हजार में से 44 हजार सिर्फ औरतें और बच्चे हैं, जिन्हें ढूंढने में पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हुई। सरकार को कटघरे में खड़े कर रहे आंकड़े सिंघार ने लिखा है कि मध्य प्रदेश में 2020 से 2023 के बीच कुल 1.53 लाख मिसिंग केस दर्ज हुए थे। हालांकि हर साल की शुरुआत में प्रदेश पुलिस "ऑपरेशन मुस्कान" चलाकर मिसिंग केस सुलझाने की कोशिश करती है, लेकिन ये प्रयास बिल्कुल नाकाफी साबित हो रहे हैं। बढ़ते Untraced Missing Person के मामले मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर और कठघरे में खड़े सवाल उठाते हैं। सिंघार ने यह भी लिखा है कि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस विभाग 25-30% कम क्षमता पर काम कर रहा है। हर थाने में स्वीकृत पदों के मुकाबले 35-40% कर्मचारी कम हैं, जिससे उन पर असहनीय कार्यभार पड़ रहा है। इसके अलावा आधुनिक उपकरणों की भी भारी कमी है। पुलिस विभाग और उसके तंत्र को तुरंत मजबूत करने की सख्त जरूरत है, ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके और कम किया जा सके।