ड्यूटी करने वाले 36% जवानों के फेफड़ों में संक्रमण:रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के चौराहों पर हवा 5 गुना तक जहरीली
ड्यूटी करने वाले 36% जवानों के फेफड़ों में संक्रमण:रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के चौराहों पर हवा 5 गुना तक जहरीली
रायपुर से प्रशांत गुप्ता/अमिताभ अरुण दुबे, बिलासपुर से लोकेंद्र सिंह ठाकुर, भिलाई से नीरज शर्मा की रिपोर्ट रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के चौक-चौराहों पर पीएम 2.5 औसतन 200 माइक्रोग्राम/क्वीक मीटर और पीएम-10 का स्तर 527 तक पाया गया। ये दोनों स्तर डब्ल्यूएचओ के मानक स्तर से 5 गुना तक है। पीएम-10 और पीएम 2.5 के बढ़ने की बड़ी वजह वाहनों का धुआं और धूल है। इन्हीं चौराहों पर बिना थमे-थके ट्रैफिक पुलिस जवान 10-10 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहकर व्यवस्था संभालते हैं। भास्कर ने इन्हीं जवानों के फेफड़ों का ऑन-स्पॉट पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) करवाया। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि 36% जवानों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। फेफड़े शत-प्रतिशत ठीक नहीं हैं। इनमें संक्रमण है। भास्कर टीम तीन जिलों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर, टेक्नीशियन को लेकर चौक-चौराहों पर पहुंची। पीएफटी टेस्टिंग मशीन से ऑन-स्पॉट जांच करवाई। इस जांच में 159 जवान शामिल हुए। इस दौरान कई अधिकारियों-जवानों ने टेस्ट करवाने से मना कर दिया, पूछे जाने पर क्यों नहीं करवाना चाहते तो बोले- रिपोर्ट निगेटिव आई तो क्या होगा। नौकरी थोड़ी न छोड़ देंगे। इससे ही घर चलता है। एक थाना प्रभारी बोले- मैं फिट हूं, टेस्ट नहीं करवाना। इसमें जवानों ने सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, लंबे समय तक सर्दी-जुखाम, खांसी, एलर्जी आदि समस्या बताई। जांच में श्रेयश दुबे, पीआर एग्जीक्यूटिव और विजेंद्र काटले, सिपला ब्रीद एजुकेटर का सहयोग रहा। भास्कर ने एक्सपर्ट से 3 जिलों में 157 जवानों का पीएफटी कराया, इसमें खुलासा... रायपुर: 22% जवानों को सांस से जुड़ी समस्या, 6% पर गंभीर असर
रायपुर के टाटीबंध, पचपेड़ी नाका, तेलीबांधा, शारदा चौक, भनपुरी में 52 पुलिस जवानों का पीएफटी टेस्ट करवाया गया। इनमें से 3 जवानों को सांस संबंधित गंभीर समस्या पाई गई। यानी 6 फीसदी गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। 18 जवानों ने धूल, धुआं की वजह से सांस संबंधित हल्की समस्याएं बताईं। यानी 22% को सांस से जुड़ी समस्याएं हैं। उर्मिला हॉस्पिटल के डॉयरेक्टर डॉ. विनोद सिंह, टीबी एंड चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. रौशन राठौर के मुताबिक वाहनों के धुएं से दिक्क्त होती है। इससे महीन कण शरीर में जाते हैं। भिलाई: 32% यातायात पुलिस जवानों को चेस्ट इंफेक्शन
भिलाई में 46 ट्रैफिक कर्मियों के फेफड़ों की जांच करवाई गई। 15 यानी 32% के चेस्ट में इंफेक्शन मिला। भिलाई के लाइफ केयर डाइग्नोस्टिक सेंटर चेस्ट फिजिशियन डॉ. राघवेंद्र वर्मा ने पीएफटी ग्राफ चेक कर बताया कि 15 जवानों के फेफड़े सांस लेने में नहीं फूल रहे। सावधानी न बरतने पर ब्रोंकाइटिस से पीड़ित जवानों को सांसों की गंभीर बीमारी हो सकती है। इसकी वजह धूल-धुआं ही है। ये टेस्ट यातायात भवन, नेहरू नगर में हुए। बिलासपुर: 34% जवानों को फेफड़ों से जुड़ी समस्या
बिलासपुर में 2 दिन में 61 ट्रैफिक पुलिस जवानों का पीएफटी टेस्ट हुआ। इनमें से 21 जवानों के फेफड़ों में रिस्ट्रेक्टिव लंग्स डिसीज के हल्के लक्षण पाए गए। यानी कि 34% जवानों को सांस में तकलीफ, सांस फूलने की समस्या है। बिलासपुर के गोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ केयर हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के मुताबिक इसकी प्रमुख वजह धूल-धुआं है। रायपुर: 15 साल पुराने 6 लाख वाहन, 7.1% बढ़ा पीएम-10
केंद्रीय वन-पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक 8 साल में रायपुर में पीएम-10 स्तर 7.1% बढ़ा है। सत्र 2017-18 में औसत पीएम-10 स्तर 70 था, जो 2025 में 75 हो गया है। रायपुर की तुलना में दुर्ग-भिलाई में पीएम-10 के स्तर में 19.8% का सुधार आया है। पीएम-10 स्तर बताता है कि हवा में महीन धूल के जहरीले कणों की मौजूदगी और हवा स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है। परिवहन विभाग के मुताबिक रायपुर में 17 लाख वाहन हैं। इनमें से 8 लाख चालकों ने ही डिजिटल नंबर प्लेट लगवाई है। 7 लाख चालकों ने नहीं। अधिकारियों का कहना है ये वाहन 15 साल पुराने हैं। आउट डेट हैं। इनकी प्रदूषण जांच भी नहीं हो सकती। प्रयास: हवा की गुणवत्ता सुधारने मिले 300 करोड़
ट्रैफिक पुलिस जवानों के फेफड़ों की जांच रिपोर्ट बताती है कि रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर में हवा की गुणवत्ता सही नहीं है। इस गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र सरकार से 15वें वित्त आयोग के तहत 300 करोड़ रु. का फंड मिला है। इसमें से अब तक 191 करोड़ खर्च हो चुके हैं। केंद्र ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया। इसके तहत रायपुर को 2019 से 24 के बीच 125 करोड़ मिले। इनमें से 51.86 करोड़ खर्च हो चुके हैं। दुर्ग-भिलाई को वित्तीय वर्ष 2019 से 26 तक 202 करोड़ रु. मिल चुके हैं। जानिए प्रदूषण का पैमाना क्या होता है... पीएम 10 धूल-मिट्टी, धातु के महीन कण, पीएम 2.5 वाहनों के धुएं से निकले कण पीएम 10 हवा में मौजूद 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले महीन धूल, मिट्टी और धातु के कण हैं, जो सांस से फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इनका सामान्य स्तर 100 है, जबकि चौक-चौराहों पर ये 346 से लेकर 527 तक पाया गया। पीएम 2.5 वो कण हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रो-मीटर या उससे कम है। इसकी सामान्य रेंज 60 माइक्रोग्राम/क्वीक मीटर है, जो रायपुर के चौक-चौराहों पर 220 तक मिली है।
रायपुर से प्रशांत गुप्ता/अमिताभ अरुण दुबे, बिलासपुर से लोकेंद्र सिंह ठाकुर, भिलाई से नीरज शर्मा की रिपोर्ट रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के चौक-चौराहों पर पीएम 2.5 औसतन 200 माइक्रोग्राम/क्वीक मीटर और पीएम-10 का स्तर 527 तक पाया गया। ये दोनों स्तर डब्ल्यूएचओ के मानक स्तर से 5 गुना तक है। पीएम-10 और पीएम 2.5 के बढ़ने की बड़ी वजह वाहनों का धुआं और धूल है। इन्हीं चौराहों पर बिना थमे-थके ट्रैफिक पुलिस जवान 10-10 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहकर व्यवस्था संभालते हैं। भास्कर ने इन्हीं जवानों के फेफड़ों का ऑन-स्पॉट पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) करवाया। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि 36% जवानों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। फेफड़े शत-प्रतिशत ठीक नहीं हैं। इनमें संक्रमण है। भास्कर टीम तीन जिलों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर, टेक्नीशियन को लेकर चौक-चौराहों पर पहुंची। पीएफटी टेस्टिंग मशीन से ऑन-स्पॉट जांच करवाई। इस जांच में 159 जवान शामिल हुए। इस दौरान कई अधिकारियों-जवानों ने टेस्ट करवाने से मना कर दिया, पूछे जाने पर क्यों नहीं करवाना चाहते तो बोले- रिपोर्ट निगेटिव आई तो क्या होगा। नौकरी थोड़ी न छोड़ देंगे। इससे ही घर चलता है। एक थाना प्रभारी बोले- मैं फिट हूं, टेस्ट नहीं करवाना। इसमें जवानों ने सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, लंबे समय तक सर्दी-जुखाम, खांसी, एलर्जी आदि समस्या बताई। जांच में श्रेयश दुबे, पीआर एग्जीक्यूटिव और विजेंद्र काटले, सिपला ब्रीद एजुकेटर का सहयोग रहा। भास्कर ने एक्सपर्ट से 3 जिलों में 157 जवानों का पीएफटी कराया, इसमें खुलासा... रायपुर: 22% जवानों को सांस से जुड़ी समस्या, 6% पर गंभीर असर
रायपुर के टाटीबंध, पचपेड़ी नाका, तेलीबांधा, शारदा चौक, भनपुरी में 52 पुलिस जवानों का पीएफटी टेस्ट करवाया गया। इनमें से 3 जवानों को सांस संबंधित गंभीर समस्या पाई गई। यानी 6 फीसदी गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। 18 जवानों ने धूल, धुआं की वजह से सांस संबंधित हल्की समस्याएं बताईं। यानी 22% को सांस से जुड़ी समस्याएं हैं। उर्मिला हॉस्पिटल के डॉयरेक्टर डॉ. विनोद सिंह, टीबी एंड चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. रौशन राठौर के मुताबिक वाहनों के धुएं से दिक्क्त होती है। इससे महीन कण शरीर में जाते हैं। भिलाई: 32% यातायात पुलिस जवानों को चेस्ट इंफेक्शन
भिलाई में 46 ट्रैफिक कर्मियों के फेफड़ों की जांच करवाई गई। 15 यानी 32% के चेस्ट में इंफेक्शन मिला। भिलाई के लाइफ केयर डाइग्नोस्टिक सेंटर चेस्ट फिजिशियन डॉ. राघवेंद्र वर्मा ने पीएफटी ग्राफ चेक कर बताया कि 15 जवानों के फेफड़े सांस लेने में नहीं फूल रहे। सावधानी न बरतने पर ब्रोंकाइटिस से पीड़ित जवानों को सांसों की गंभीर बीमारी हो सकती है। इसकी वजह धूल-धुआं ही है। ये टेस्ट यातायात भवन, नेहरू नगर में हुए। बिलासपुर: 34% जवानों को फेफड़ों से जुड़ी समस्या
बिलासपुर में 2 दिन में 61 ट्रैफिक पुलिस जवानों का पीएफटी टेस्ट हुआ। इनमें से 21 जवानों के फेफड़ों में रिस्ट्रेक्टिव लंग्स डिसीज के हल्के लक्षण पाए गए। यानी कि 34% जवानों को सांस में तकलीफ, सांस फूलने की समस्या है। बिलासपुर के गोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ केयर हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के मुताबिक इसकी प्रमुख वजह धूल-धुआं है। रायपुर: 15 साल पुराने 6 लाख वाहन, 7.1% बढ़ा पीएम-10
केंद्रीय वन-पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक 8 साल में रायपुर में पीएम-10 स्तर 7.1% बढ़ा है। सत्र 2017-18 में औसत पीएम-10 स्तर 70 था, जो 2025 में 75 हो गया है। रायपुर की तुलना में दुर्ग-भिलाई में पीएम-10 के स्तर में 19.8% का सुधार आया है। पीएम-10 स्तर बताता है कि हवा में महीन धूल के जहरीले कणों की मौजूदगी और हवा स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है। परिवहन विभाग के मुताबिक रायपुर में 17 लाख वाहन हैं। इनमें से 8 लाख चालकों ने ही डिजिटल नंबर प्लेट लगवाई है। 7 लाख चालकों ने नहीं। अधिकारियों का कहना है ये वाहन 15 साल पुराने हैं। आउट डेट हैं। इनकी प्रदूषण जांच भी नहीं हो सकती। प्रयास: हवा की गुणवत्ता सुधारने मिले 300 करोड़
ट्रैफिक पुलिस जवानों के फेफड़ों की जांच रिपोर्ट बताती है कि रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर में हवा की गुणवत्ता सही नहीं है। इस गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र सरकार से 15वें वित्त आयोग के तहत 300 करोड़ रु. का फंड मिला है। इसमें से अब तक 191 करोड़ खर्च हो चुके हैं। केंद्र ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया। इसके तहत रायपुर को 2019 से 24 के बीच 125 करोड़ मिले। इनमें से 51.86 करोड़ खर्च हो चुके हैं। दुर्ग-भिलाई को वित्तीय वर्ष 2019 से 26 तक 202 करोड़ रु. मिल चुके हैं। जानिए प्रदूषण का पैमाना क्या होता है... पीएम 10 धूल-मिट्टी, धातु के महीन कण, पीएम 2.5 वाहनों के धुएं से निकले कण पीएम 10 हवा में मौजूद 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले महीन धूल, मिट्टी और धातु के कण हैं, जो सांस से फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इनका सामान्य स्तर 100 है, जबकि चौक-चौराहों पर ये 346 से लेकर 527 तक पाया गया। पीएम 2.5 वो कण हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रो-मीटर या उससे कम है। इसकी सामान्य रेंज 60 माइक्रोग्राम/क्वीक मीटर है, जो रायपुर के चौक-चौराहों पर 220 तक मिली है।