धमतरी में महाशिवरात्रि पर निकली बूढ़ेश्वर महादेव की बारात:बनारस का डमरू, अघोरी और कटप्पा रहे आकर्षण का केंद्र
धमतरी में महाशिवरात्रि पर निकली बूढ़ेश्वर महादेव की बारात:बनारस का डमरू, अघोरी और कटप्पा रहे आकर्षण का केंद्र
छत्तीसगढ़ के धमतरी में महाशिवरात्रि पर्व पर बूढ़ेश्वर महादेव की भव्य बारात निकाली गई। इस बारात में बनारस का डमरू दल, अघोरी, भूत-पिशाच और ओडिशा से कटप्पा जैसे आकर्षक झांकियां शामिल हुईं। बारात लगभग 2 किलोमीटर की दूरी तय कर बूढ़ेश्वर मंदिर पहुंची, जिसकी लंबाई करीब 100 मीटर थी। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यह बारात विंध्यवासिनी मंदिर से शुरू हुई और धीरे-धीरे आगे बढ़ी। बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट और बोलबम कांवरिया संघ द्वारा प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि से पूर्व इस बारात का आयोजन किया जाता है। इसमें विभिन्न स्थानों से आकर्षक टोलियां बुलाई जाती हैं। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को अपने कैमरों में कैद किया। बाबा की पालकी के स्वागत के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा स्टॉल भी लगाए गए थे। शिव बारात में दिखी झांकियों और कलाकारों की भव्य प्रस्तुति बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि बारात में धूप, त्रिपुंड लगाने वाले महाराज, गांव का बाजा, आंगा देवता, घोड़ी, डी.जे. सेटअप, स्केटिंग पर रंगोली, आरंग की जसगीत झांकी, बालाघाट के अघोरी, रायपुर की झांकी, कोंडागांव का राउत नाचा, नागपुर की काली मां, किन्नरों का नृत्य, ओडिशा का कटप्पा, सोन अघोरी, बनारस का डमरू और पालकी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। महाशिवरात्रि महोत्सव में हुआ भव्य संगीत कार्यक्रम इससे पहले, शहर के प्राचीन बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत शुक्रवार को एक संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मां पाताल भैरवी भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने भक्तों को देर तक भक्तिरस में सराबोर रखा। भजन गायक नवीन सोनी की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। आस्था और संस्कृति से जोड़ने वाला आयोजन बारात में शामिल भक्तों ने बताया कि वे हर वर्ष इस आयोजन में शामिल होते हैं। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। उनका मानना है कि ऐसे आयोजन लोगों को आस्था से जोड़ने और अपनी संस्कृति को जानने-समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
छत्तीसगढ़ के धमतरी में महाशिवरात्रि पर्व पर बूढ़ेश्वर महादेव की भव्य बारात निकाली गई। इस बारात में बनारस का डमरू दल, अघोरी, भूत-पिशाच और ओडिशा से कटप्पा जैसे आकर्षक झांकियां शामिल हुईं। बारात लगभग 2 किलोमीटर की दूरी तय कर बूढ़ेश्वर मंदिर पहुंची, जिसकी लंबाई करीब 100 मीटर थी। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यह बारात विंध्यवासिनी मंदिर से शुरू हुई और धीरे-धीरे आगे बढ़ी। बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट और बोलबम कांवरिया संघ द्वारा प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि से पूर्व इस बारात का आयोजन किया जाता है। इसमें विभिन्न स्थानों से आकर्षक टोलियां बुलाई जाती हैं। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को अपने कैमरों में कैद किया। बाबा की पालकी के स्वागत के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा स्टॉल भी लगाए गए थे। शिव बारात में दिखी झांकियों और कलाकारों की भव्य प्रस्तुति बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि बारात में धूप, त्रिपुंड लगाने वाले महाराज, गांव का बाजा, आंगा देवता, घोड़ी, डी.जे. सेटअप, स्केटिंग पर रंगोली, आरंग की जसगीत झांकी, बालाघाट के अघोरी, रायपुर की झांकी, कोंडागांव का राउत नाचा, नागपुर की काली मां, किन्नरों का नृत्य, ओडिशा का कटप्पा, सोन अघोरी, बनारस का डमरू और पालकी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। महाशिवरात्रि महोत्सव में हुआ भव्य संगीत कार्यक्रम इससे पहले, शहर के प्राचीन बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत शुक्रवार को एक संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मां पाताल भैरवी भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने भक्तों को देर तक भक्तिरस में सराबोर रखा। भजन गायक नवीन सोनी की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। आस्था और संस्कृति से जोड़ने वाला आयोजन बारात में शामिल भक्तों ने बताया कि वे हर वर्ष इस आयोजन में शामिल होते हैं। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। उनका मानना है कि ऐसे आयोजन लोगों को आस्था से जोड़ने और अपनी संस्कृति को जानने-समझने का अवसर प्रदान करते हैं।