गर्भवती महिलाएं नहीं रखें पूरे 9 दिन के व्रत:पहले और आखिरी दिन में भी लें फुल डायट, चैत्र नवरात्र में गाइनेकोलॉजिस्ट की गर्भवतियों को सलाह
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2 मिनट से ज्यादा धूपबत्ती या अगरबत्ती के धुएं में रहना उनके लिए हानिकारक हो सकता है, वहीं लंबे समय तक भूखे रहने से कमजोरी बढ़ सकती है, जिसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। आगरा की गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. मधु ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के दौरान गर्भवती महिलाओं को पूरे 9 दिन का व्रत नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यदि वे व्रत रखती भी हैं, तो एक-दो दिन से ज्यादा नहीं और उस दौरान भी लंबा गैप रखकर भूखे रहना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि व्रत के दौरान महिलाओं को थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। संतुलित डाइट बेहद जरूरी है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और विटामिन शामिल हों। आमतौर पर व्रत में खाए जाने वाले आलू और कूटू के आटे का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए। डॉ. मधु के अनुसार गर्भवती महिलाओं को फ्रूट्स, दूध, दही और हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता रहे और कमजोरी न आए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पूजा के दौरान जलने वाली धूपबत्ती और अगरबत्ती के धुएं से दूरी बनाकर रखें। 2 मिनट से अधिक समय तक इस धुएं में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्रत के दौरान कई महिलाएं अपनी दवाइयों को नजरअंदाज कर देती हैं, जो कि गलत है। गर्भवती महिलाओं को अपनी सभी निर्धारित दवाइयां नियमित रूप से लेते रहना चाहिए और किसी भी स्थिति में दवा बंद नहीं करनी चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि सावधानी और संतुलित आहार अपनाकर ही गर्भवती महिलाएं सुरक्षित तरीके से नवरात्रि के व्रत कर सकती हैं।
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2 मिनट से ज्यादा धूपबत्ती या अगरबत्ती के धुएं में रहना उनके लिए हानिकारक हो सकता है, वहीं लंबे समय तक भूखे रहने से कमजोरी बढ़ सकती है, जिसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। आगरा की गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. मधु ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के दौरान गर्भवती महिलाओं को पूरे 9 दिन का व्रत नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यदि वे व्रत रखती भी हैं, तो एक-दो दिन से ज्यादा नहीं और उस दौरान भी लंबा गैप रखकर भूखे रहना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि व्रत के दौरान महिलाओं को थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। संतुलित डाइट बेहद जरूरी है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और विटामिन शामिल हों। आमतौर पर व्रत में खाए जाने वाले आलू और कूटू के आटे का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए। डॉ. मधु के अनुसार गर्भवती महिलाओं को फ्रूट्स, दूध, दही और हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता रहे और कमजोरी न आए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पूजा के दौरान जलने वाली धूपबत्ती और अगरबत्ती के धुएं से दूरी बनाकर रखें। 2 मिनट से अधिक समय तक इस धुएं में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्रत के दौरान कई महिलाएं अपनी दवाइयों को नजरअंदाज कर देती हैं, जो कि गलत है। गर्भवती महिलाओं को अपनी सभी निर्धारित दवाइयां नियमित रूप से लेते रहना चाहिए और किसी भी स्थिति में दवा बंद नहीं करनी चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि सावधानी और संतुलित आहार अपनाकर ही गर्भवती महिलाएं सुरक्षित तरीके से नवरात्रि के व्रत कर सकती हैं।