बीजापुर छात्रावास मामला: कांग्रेस ने बनाई जांच कमेटी:9 महिला नेताओं को मिली जिम्मेदारी
बीजापुर जिले में छात्राओं के गर्भवती होने के मामले को लेकर कांग्रेस ने जांच कमेटी का गठन किया है। कांग्रेस ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि शासकीय छात्रावास में हुई इस घटना से मानवता शर्मसार हुई है और पालकों का भरोसा टूटा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छात्रावास में तीन नाबालिग बच्चियों के साथ दुराचार हुआ, जिसके कारण वे गर्भवती हो गईं। उन्होंने कहा कि मामले को छिपाने के लिए प्रबंधन ने पीड़ित छात्राओं को छात्रावास से निकालकर घर भेज दिया, जबकि पॉक्सो एक्ट के तहत ऐसी स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होता है। 9 सदस्यीय महिला जांच कमेटी गठित कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच के लिए 9 महिला नेताओं की कमेटी बनाई है। इस कमेटी की संयोजक सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष मंगमा को बनाया गया है। कमेटी में पीसीसी महामंत्री नीना रावतिया, सुलोचना कर्मा, बबीता मांडवी, पार्वती कश्यप, अनीता तेलम, रिंकी कोरम और पायल हेमला को सदस्य बनाया गया है। यह टीम मौके पर जाकर पूरे मामले की जांच करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। सरकार पर सुरक्षा को लेकर सवाल कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद सरकारी आश्रमों में बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले बीजापुर, सुकमा और कोरबा में भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश का मुखिया आदिवासी होने के बावजूद आदिवासी बच्चियों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रदेश के सभी छात्रावासों की सुरक्षा की समीक्षा की जाए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि हर छात्रावास में महिला पुलिस की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बीजापुर जिले में छात्राओं के गर्भवती होने के मामले को लेकर कांग्रेस ने जांच कमेटी का गठन किया है। कांग्रेस ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि शासकीय छात्रावास में हुई इस घटना से मानवता शर्मसार हुई है और पालकों का भरोसा टूटा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छात्रावास में तीन नाबालिग बच्चियों के साथ दुराचार हुआ, जिसके कारण वे गर्भवती हो गईं। उन्होंने कहा कि मामले को छिपाने के लिए प्रबंधन ने पीड़ित छात्राओं को छात्रावास से निकालकर घर भेज दिया, जबकि पॉक्सो एक्ट के तहत ऐसी स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होता है। 9 सदस्यीय महिला जांच कमेटी गठित कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच के लिए 9 महिला नेताओं की कमेटी बनाई है। इस कमेटी की संयोजक सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष मंगमा को बनाया गया है। कमेटी में पीसीसी महामंत्री नीना रावतिया, सुलोचना कर्मा, बबीता मांडवी, पार्वती कश्यप, अनीता तेलम, रिंकी कोरम और पायल हेमला को सदस्य बनाया गया है। यह टीम मौके पर जाकर पूरे मामले की जांच करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। सरकार पर सुरक्षा को लेकर सवाल कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद सरकारी आश्रमों में बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले बीजापुर, सुकमा और कोरबा में भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश का मुखिया आदिवासी होने के बावजूद आदिवासी बच्चियों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रदेश के सभी छात्रावासों की सुरक्षा की समीक्षा की जाए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि हर छात्रावास में महिला पुलिस की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।