फोरसिथ लॉज के मैनेजर-नेचुरलिस्ट की सेशन कोर्ट से जमानत खारिज:वन्यजीवों के अवशेष रखने के मामले में अब हाईकोर्ट से उम्मीद
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के मढ़ई स्थित फोरसिथ लॉज रिसॉर्ट में वन्यजीवों के अवशेष डिस्प्ले करने के मामले में गिरफ्तार मैनेजर और नेचुरलिस्ट को पिपरिया सेशन कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया है। इससे पहले सोहागपुर कोर्ट ने भी 16 मार्च को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। फिलहाल दोनों आरोपी 15 से 25 मार्च तक न्यायिक हिरासत के तहत पिपरिया उप जेल में हैं। अब जेल से बाहर आने के लिए उनके पास केवल हाईकोर्ट का ही सहारा बचा है। पिपरिया सेशन कोर्ट में जमानत के लिए लगाई गई याचिका पर मजिस्ट्रेट ने सुनवाई की और एसटीआर की जांच प्रक्रिया को देखते हुए इसे खारिज कर दिया। फोरसिथ लॉज रिसॉर्ट के मैनेजर निपुण मेहतो और नेचुरलिस्ट फैज अंसारी की तरफ से जबलपुर हाईकोर्ट के सीनियर अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह और स्थानीय अधिवक्ता प्रतीक तिवारी ने मजिस्ट्रेट के सामने दलीलें दी थीं। सोहागपुर कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत आरोपियों की जमानत के लिए सबसे पहले सोहागपुर कोर्ट में 16 मार्च को याचिका लगाई गई थी, जिसे कोर्ट ने नामंजूर करते हुए खारिज कर दिया था। सोहागपुर कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद ही आरोपियों की जमानत के लिए पिपरिया सेशन कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। चीतल के सींग और कोबरा की कांचली का प्रदर्शन एसटीआर ने 15 मार्च को फोरसिथ लॉज रिसॉर्ट के मैनेजर निपुण मेहतो और नेचुरलिस्ट फैज अंसारी को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर चीतल के सींग, सेही के कांटे और कोबरा सांप की कांचली को डिस्प्ले में रखकर अवैध प्रदर्शनी लगाने का आरोप है। दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसडीएम के निरीक्षण में सामने आया था मामला 7 मार्च 2026 को एसडीएम प्रियंका भलावी के निरीक्षण के दौरान फोरसिथ लॉज के डिस्प्ले में वन्यजीवों के अवशेष प्रदर्शित पाए गए थे। सूचना मिलने पर एसटीआर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच के बाद अवशेष बरामद किए। बागड़ा बफर जोन के रेंजर विलास डोंगरे ने बताया कि वन्यजीवों के अवशेषों को एसटीआर को सूचना दिए बगैर ही डिस्प्ले में रखा गया था। इसके लिए रिसॉर्ट प्रबंधन को अनुमति लेनी चाहिए थी। वनरक्षक की भूमिका पर उठे सवाल, जांच जारी बागड़ा बफर रेंज की जिस बीट में यह रिसॉर्ट आता है, वहां के वनरक्षक नरेंद्र परते की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रिसॉर्ट स्टाफ ने एसटीआर के अधिकारियों से वनरक्षक की मौखिक शिकायत भी की है। मामले में सहायक संचालक आशीष खोपरागढ़े ने बताया, "हमें जानकारी मिली है। वनरक्षक लम्बे समय से उसी बीट में पदस्थ है। इस संबंध में हम गोपनीय तरह से जानकारी जुटा रहे है। अगर किसी गलत कार्य भूमिका मिलती है तो वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएंगे।"
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के मढ़ई स्थित फोरसिथ लॉज रिसॉर्ट में वन्यजीवों के अवशेष डिस्प्ले करने के मामले में गिरफ्तार मैनेजर और नेचुरलिस्ट को पिपरिया सेशन कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया है। इससे पहले सोहागपुर कोर्ट ने भी 16 मार्च को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। फिलहाल दोनों आरोपी 15 से 25 मार्च तक न्यायिक हिरासत के तहत पिपरिया उप जेल में हैं। अब जेल से बाहर आने के लिए उनके पास केवल हाईकोर्ट का ही सहारा बचा है। पिपरिया सेशन कोर्ट में जमानत के लिए लगाई गई याचिका पर मजिस्ट्रेट ने सुनवाई की और एसटीआर की जांच प्रक्रिया को देखते हुए इसे खारिज कर दिया। फोरसिथ लॉज रिसॉर्ट के मैनेजर निपुण मेहतो और नेचुरलिस्ट फैज अंसारी की तरफ से जबलपुर हाईकोर्ट के सीनियर अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह और स्थानीय अधिवक्ता प्रतीक तिवारी ने मजिस्ट्रेट के सामने दलीलें दी थीं। सोहागपुर कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत आरोपियों की जमानत के लिए सबसे पहले सोहागपुर कोर्ट में 16 मार्च को याचिका लगाई गई थी, जिसे कोर्ट ने नामंजूर करते हुए खारिज कर दिया था। सोहागपुर कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद ही आरोपियों की जमानत के लिए पिपरिया सेशन कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। चीतल के सींग और कोबरा की कांचली का प्रदर्शन एसटीआर ने 15 मार्च को फोरसिथ लॉज रिसॉर्ट के मैनेजर निपुण मेहतो और नेचुरलिस्ट फैज अंसारी को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर चीतल के सींग, सेही के कांटे और कोबरा सांप की कांचली को डिस्प्ले में रखकर अवैध प्रदर्शनी लगाने का आरोप है। दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसडीएम के निरीक्षण में सामने आया था मामला 7 मार्च 2026 को एसडीएम प्रियंका भलावी के निरीक्षण के दौरान फोरसिथ लॉज के डिस्प्ले में वन्यजीवों के अवशेष प्रदर्शित पाए गए थे। सूचना मिलने पर एसटीआर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच के बाद अवशेष बरामद किए। बागड़ा बफर जोन के रेंजर विलास डोंगरे ने बताया कि वन्यजीवों के अवशेषों को एसटीआर को सूचना दिए बगैर ही डिस्प्ले में रखा गया था। इसके लिए रिसॉर्ट प्रबंधन को अनुमति लेनी चाहिए थी। वनरक्षक की भूमिका पर उठे सवाल, जांच जारी बागड़ा बफर रेंज की जिस बीट में यह रिसॉर्ट आता है, वहां के वनरक्षक नरेंद्र परते की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रिसॉर्ट स्टाफ ने एसटीआर के अधिकारियों से वनरक्षक की मौखिक शिकायत भी की है। मामले में सहायक संचालक आशीष खोपरागढ़े ने बताया, "हमें जानकारी मिली है। वनरक्षक लम्बे समय से उसी बीट में पदस्थ है। इस संबंध में हम गोपनीय तरह से जानकारी जुटा रहे है। अगर किसी गलत कार्य भूमिका मिलती है तो वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएंगे।"