आज से चैत्र नवरात्र शुरू:सूर्योदय के साथ घटस्थापना के मुहूर्त, नौ दिन भक्तों को पूर्ण फल देने वाली मानी जा रही नवरात्रि

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू होगा। इस बार प्रतिपदा तिथि के क्षय के कारण अमावस्या युक्त प्रतिपदा गुरुवार को पड़ रही है, ऐसे में इसी दिन से कलश स्थापना और सिद्धि संकल्प की शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार इस वर्ष माता का आगमन पालकी में होगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से विशेष शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि सूर्योदय के साथ ही घटस्थापना के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त के अलावा सायंकाल प्रदोषकाल भी सिद्धि साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष पूरे नौ दिनों की नवरात्रि होने से भक्तों को पूर्ण फल की प्राप्ति होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और मीन राशि में चंद्रमा की उपस्थिति में माता का आगमन होगा। वहीं चैत्र शुक्ल नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि के चंद्रमा में आदिशक्ति का गमन होगा। इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। नौ रूपों की होती है आराधना नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री की आराधना होती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है और वे जीवन में नई शुरुआत व आशा का प्रतीक हैं। ये हैं घटस्थापना के प्रमुख नियम ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार नवरात्रि में घटस्थापना के कुछ धार्मिक नियम भी बताए गए हैं। प्रतिपदा तिथि का सूर्योदय के बाद का समय शुभ माना जाता है और सूर्योदय से लगभग चार घंटे के भीतर कलश स्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है।यदि प्रात:काल में चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग हो तो उस समय स्थापना नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की जा सकती है। देवी का आवाहन, नित्य पूजन और विसर्जन प्रात:काल में करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शक्ति और शांति की प्राप्ति होती है। यह पर्व आत्मसंयम, साधना और सकारात्मक परिवर्तन का भी संदेश देता है।

Mar 19, 2026 - 06:32
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आज से चैत्र नवरात्र शुरू:सूर्योदय के साथ घटस्थापना के मुहूर्त, नौ दिन भक्तों को पूर्ण फल देने वाली मानी जा रही नवरात्रि
19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू होगा। इस बार प्रतिपदा तिथि के क्षय के कारण अमावस्या युक्त प्रतिपदा गुरुवार को पड़ रही है, ऐसे में इसी दिन से कलश स्थापना और सिद्धि संकल्प की शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार इस वर्ष माता का आगमन पालकी में होगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से विशेष शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि सूर्योदय के साथ ही घटस्थापना के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त के अलावा सायंकाल प्रदोषकाल भी सिद्धि साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष पूरे नौ दिनों की नवरात्रि होने से भक्तों को पूर्ण फल की प्राप्ति होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और मीन राशि में चंद्रमा की उपस्थिति में माता का आगमन होगा। वहीं चैत्र शुक्ल नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि के चंद्रमा में आदिशक्ति का गमन होगा। इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। नौ रूपों की होती है आराधना नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री की आराधना होती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है और वे जीवन में नई शुरुआत व आशा का प्रतीक हैं। ये हैं घटस्थापना के प्रमुख नियम ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार नवरात्रि में घटस्थापना के कुछ धार्मिक नियम भी बताए गए हैं। प्रतिपदा तिथि का सूर्योदय के बाद का समय शुभ माना जाता है और सूर्योदय से लगभग चार घंटे के भीतर कलश स्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है।यदि प्रात:काल में चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग हो तो उस समय स्थापना नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की जा सकती है। देवी का आवाहन, नित्य पूजन और विसर्जन प्रात:काल में करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शक्ति और शांति की प्राप्ति होती है। यह पर्व आत्मसंयम, साधना और सकारात्मक परिवर्तन का भी संदेश देता है।