पेंच टाइगर रिजर्व में 1560 कुत्तों का होगा वैक्सीनेशन:बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बचाने की तैयारी; प्रबंधन अलर्ट
सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से बचाने के लिए तैयारी की जा रही है। बफर जोन के 1560 आवारा श्वानों को वैक्सीनेशन किया जाएगा। कान्हा टाइगर रिजर्व में इस वायरस से पांच बाघों की मौत के बाद पेंच प्रबंधन सतर्क हो गया है। कान्हा और पेंच के बीच वन्यजीव कॉरिडोर होने के कारण बाघों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। बफर क्षेत्र के गांवों में सर्वेक्षण कराया पार्क प्रबंधन ने वन रक्षकों की मदद से बफर क्षेत्र के गांवों में सर्वेक्षण कराया। इसमें 120 गांवों में लगभग 1560 आवारा श्वान चिन्हित किए गए हैं। इन गांवों में सिवनी जिले के 80 और छिंदवाड़ा जिले के 40 गांव शामिल हैं। अब इन श्वानों का टीकाकरण कर संक्रमण को रोकने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि वैक्सीनेशन का कार्य कौन करेगा। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से श्वानों और जंगली मांसाहारी जीवों को प्रभावित करती है। यह बाघ, शेर, तेंदुआ, लोमड़ी, भेड़िया और लकड़बग्घा जैसे वन्यजीवों को भी संक्रमित कर सकता है। जंगलों के आसपास घूमने वाले संक्रमित या आवारा श्वान इस बीमारी के प्रमुख वाहक माने जाते हैं। संक्रमित जानवरों में सांस लेने में कठिनाई होती विशेषज्ञों के अनुसार, इस वायरस से संक्रमित जानवरों में सांस लेने में कठिनाई, खांसी, फेफड़ों में संक्रमण, उल्टी-दस्त, कमजोरी, शरीर कांपना, चलने में लड़खड़ाहट और शिकार करने की क्षमता में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वन विभाग के सामने वैक्सीनेशन के लिए बजट की चुनौती बनी हुई है। इस स्थिति में, पार्क प्रबंधन विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), पशु चिकित्सा विभाग और स्कूल फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ (एसडब्ल्यूएच) से सहयोग लेने की तैयारी कर रहा है। 120 गांवों में 1560 आवारा श्वानों को चिन्हित पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि बफर क्षेत्र के 120 गांवों में चिन्हित 1560 आवारा श्वानों का वैक्सीनेशन करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है और जल्द ही इस पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से बचाने के लिए तैयारी की जा रही है। बफर जोन के 1560 आवारा श्वानों को वैक्सीनेशन किया जाएगा। कान्हा टाइगर रिजर्व में इस वायरस से पांच बाघों की मौत के बाद पेंच प्रबंधन सतर्क हो गया है। कान्हा और पेंच के बीच वन्यजीव कॉरिडोर होने के कारण बाघों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। बफर क्षेत्र के गांवों में सर्वेक्षण कराया पार्क प्रबंधन ने वन रक्षकों की मदद से बफर क्षेत्र के गांवों में सर्वेक्षण कराया। इसमें 120 गांवों में लगभग 1560 आवारा श्वान चिन्हित किए गए हैं। इन गांवों में सिवनी जिले के 80 और छिंदवाड़ा जिले के 40 गांव शामिल हैं। अब इन श्वानों का टीकाकरण कर संक्रमण को रोकने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि वैक्सीनेशन का कार्य कौन करेगा। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से श्वानों और जंगली मांसाहारी जीवों को प्रभावित करती है। यह बाघ, शेर, तेंदुआ, लोमड़ी, भेड़िया और लकड़बग्घा जैसे वन्यजीवों को भी संक्रमित कर सकता है। जंगलों के आसपास घूमने वाले संक्रमित या आवारा श्वान इस बीमारी के प्रमुख वाहक माने जाते हैं। संक्रमित जानवरों में सांस लेने में कठिनाई होती विशेषज्ञों के अनुसार, इस वायरस से संक्रमित जानवरों में सांस लेने में कठिनाई, खांसी, फेफड़ों में संक्रमण, उल्टी-दस्त, कमजोरी, शरीर कांपना, चलने में लड़खड़ाहट और शिकार करने की क्षमता में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वन विभाग के सामने वैक्सीनेशन के लिए बजट की चुनौती बनी हुई है। इस स्थिति में, पार्क प्रबंधन विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), पशु चिकित्सा विभाग और स्कूल फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ (एसडब्ल्यूएच) से सहयोग लेने की तैयारी कर रहा है। 120 गांवों में 1560 आवारा श्वानों को चिन्हित पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि बफर क्षेत्र के 120 गांवों में चिन्हित 1560 आवारा श्वानों का वैक्सीनेशन करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है और जल्द ही इस पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।