सतना जिला अस्पताल के दो ऑक्सीजन प्लांट बंद:तीन साल से नहीं हुई सर्विसिंग, बजट की कमी से नहीं हो पा रहा रखरखाव

सतना जिला अस्पताल में लगे दो पीएसए ऑक्सीजन प्लांट बंद हो गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, पिछले करीब तीन साल से इन प्लांटों की नियमित सर्विसिंग नहीं हुई थी, जिसके चलते इन्हें बंद करना पड़ा। फिलहाल अस्पताल में 6000 किलोलीटर क्षमता का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) प्लांट चालू है, जिससे वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। बजट नहीं मिलने से अटका रखरखाव अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि प्लांटों की सर्विसिंग को लेकर लगातार चेतावनी मिल रही थी, लेकिन बजट के अभाव में काम नहीं हो सका। इसके लिए भोपाल स्थित वरिष्ठ कार्यालय को कई बार पत्र भेजे गए। मार्च 2026 के अंत में बजट मिला था, लेकिन अप्रैल में वह लैप्स हो गया। अब दोबारा बजट जारी करने का आश्वासन दिया गया है। कोरोना काल में लगाए गए थे प्लांट दोनों पीएसए ऑक्सीजन प्लांट सितंबर 2021 में कोरोना संक्रमण काल के दौरान लगाए गए थे। इनकी क्षमता एक-एक हजार लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन बनाने की थी। एलएंडटी कंपनी ने इन प्लांटों को स्थापित किया था। वारंटी अवधि के दौरान नियमित सर्विसिंग और मरम्मत होती रही, लेकिन वारंटी खत्म होने के बाद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। छह महीने में जरूरी होती है सर्विसिंग विशेषज्ञों के अनुसार, पीएसए प्लांटों की हर छह महीने में रूटीन सर्विसिंग जरूरी होती है, ताकि ऑक्सीजन की शुद्धता बनी रहे और मशीनें सही तरीके से काम करती रहें। सूत्रों के मुताबिक, इन प्लांटों की आखिरी सर्विसिंग मार्च 2023 से पहले हुई थी। सर्विसिंग पर करीब साढ़े छह लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। अस्पताल प्रबंधन के पास कुछ राशि उपलब्ध है, लेकिन करीब चार लाख रुपये की अतिरिक्त जरूरत बताई जा रही है।

May 11, 2026 - 07:53
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सतना जिला अस्पताल के दो ऑक्सीजन प्लांट बंद:तीन साल से नहीं हुई सर्विसिंग, बजट की कमी से नहीं हो पा रहा रखरखाव
सतना जिला अस्पताल में लगे दो पीएसए ऑक्सीजन प्लांट बंद हो गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, पिछले करीब तीन साल से इन प्लांटों की नियमित सर्विसिंग नहीं हुई थी, जिसके चलते इन्हें बंद करना पड़ा। फिलहाल अस्पताल में 6000 किलोलीटर क्षमता का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) प्लांट चालू है, जिससे वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। बजट नहीं मिलने से अटका रखरखाव अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि प्लांटों की सर्विसिंग को लेकर लगातार चेतावनी मिल रही थी, लेकिन बजट के अभाव में काम नहीं हो सका। इसके लिए भोपाल स्थित वरिष्ठ कार्यालय को कई बार पत्र भेजे गए। मार्च 2026 के अंत में बजट मिला था, लेकिन अप्रैल में वह लैप्स हो गया। अब दोबारा बजट जारी करने का आश्वासन दिया गया है। कोरोना काल में लगाए गए थे प्लांट दोनों पीएसए ऑक्सीजन प्लांट सितंबर 2021 में कोरोना संक्रमण काल के दौरान लगाए गए थे। इनकी क्षमता एक-एक हजार लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन बनाने की थी। एलएंडटी कंपनी ने इन प्लांटों को स्थापित किया था। वारंटी अवधि के दौरान नियमित सर्विसिंग और मरम्मत होती रही, लेकिन वारंटी खत्म होने के बाद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। छह महीने में जरूरी होती है सर्विसिंग विशेषज्ञों के अनुसार, पीएसए प्लांटों की हर छह महीने में रूटीन सर्विसिंग जरूरी होती है, ताकि ऑक्सीजन की शुद्धता बनी रहे और मशीनें सही तरीके से काम करती रहें। सूत्रों के मुताबिक, इन प्लांटों की आखिरी सर्विसिंग मार्च 2023 से पहले हुई थी। सर्विसिंग पर करीब साढ़े छह लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। अस्पताल प्रबंधन के पास कुछ राशि उपलब्ध है, लेकिन करीब चार लाख रुपये की अतिरिक्त जरूरत बताई जा रही है।