स्मार्ट मीटर के विरोध में घर-घर पहुंच रहे कांग्रेसी:बारिश में खपत कम फिर भी दोगुना बिल, शिकायत लेकर रोज पहुंच रहे 20-25 उपभोक्ता दफ्तर
बिलासपुर में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का विरोध अब सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस नेता और पार्षद अपने अभियान के तहत शहर के अलग-अलग वार्डों में घर-घर पहुंचकर उपभोक्ताओं से बिजली बिल का हिसाब ले रहे हैं। मई-जून की भीषण गर्मी में बिजली की खपत बढ़ने के कारण बिल अधिक आने की बात कही गई थी, लेकिन अब बारिश के मौसम में खपत कम होने के बावजूद कई उपभोक्ताओं के बिल दोगुने आने से परेशानी बढ़ गई है। लगातार बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर उपभोक्ताओं में भी असंतोष बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि शहर में रोजाना करीब 20 से 25 उपभोक्ता अधिक बिल आने की शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं। कांग्रेसियों का आरोप है कि शिकायतों का मौके पर समाधान करने के बजाय कई बार मोबाइल में दिखाई जा रही यूनिट की जानकारी देखकर ही उपभोक्ताओं को वापस भेज दिया जाता है। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है। प्रदेश और जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस ने घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इसके लिए पार्टी ने बाकायदा एक फॉर्म तैयार किया है, जिसमें स्मार्ट मीटर लगने से पहले और बाद के बिजली बिल की जानकारी जुटाई जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई घरों में बिजली बिल बढ़ गया है। 20-25 शिकायतें रोज पहुंचने का दावा शहर में स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिल की शिकायतों को लेकर रोजाना करीब 20 से 25 उपभोक्ताओं के बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचने की बात सामने आ रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में मोबाइल पर दिखाई दे रही यूनिट की जानकारी देखकर ही उन्हें वापस भेज दिया जाता है। मीटर की जांच का आश्वासन मिलने के बाद भी जांच रिपोर्ट की जानकारी समय पर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने से स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का अविश्वास बढ़ रहा है। स्मार्ट मीटर से बढ़ा बिजली बिल कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मई-जून की गर्मी में बिजली की खपत बढ़ना स्वाभाविक था, लेकिन बारिश के मौसम में खपत कम होने के बावजूद कई उपभोक्ताओं के बिल अधिक आ रहे हैं। पार्टी इसी मुद्दे को आधार बनाकर स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। हर वार्ड में जुटाया जा रहा बिल का हिसाब जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि घर-घर अभियान में उपभोक्ताओं से पुराने और स्मार्ट मीटर लगने के बाद के बिल की जानकारी ली जा रही है। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि मीटर बदलने के बाद बिजली की खपत और बिल की राशि में कितना अंतर आया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद इसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे और सरकार के सामने उपभोक्ताओं की शिकायतें रखी जाएंगी। बिल दोगुना होने का दावा, विभाग ने नकारा कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर बिजली विभाग ऐसी किसी गड़बड़ी से इनकार कर रहा है। विभाग का कहना है कि अधिक बिल की शिकायत मिलने पर मीटर की जांच कराई जाती है और जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाती है। महतारी वंदन योजना पर भी सरकार को घेरा जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष स्मार्ट मीटर के मुद्दे को कांग्रेस ने सीधे सरकार की महतारी वंदन योजना से जोड़ते हुए राजनीतिक हमला भी तेज कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार एक तरफ महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिल बढ़ने से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पार्टी इसे लेकर सरकार से जवाब मांग रही है। सर्वे के आंकड़ों से तय होगी आगे की रणनीति कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा के नेतृत्व में चल रहे अभियान को पार्टी फिलहाल जनसंपर्क और तथ्य जुटाने की कवायद बता रही है। हालांकि स्मार्ट मीटर के बहाने घर-घर पहुंचकर बिजली बिल का हिसाब जुटाने से यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी गरमाता दिख रहा है। कांग्रेस का दावा है कि सर्वे के आंकड़े सामने आने के बाद सरकार के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा। वहीं, बिजली बिल बढ़ने के दावों की वास्तविकता आधिकारिक जांच और सर्वे के आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बिलासपुर में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का विरोध अब सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस नेता और पार्षद अपने अभियान के तहत शहर के अलग-अलग वार्डों में घर-घर पहुंचकर उपभोक्ताओं से बिजली बिल का हिसाब ले रहे हैं। मई-जून की भीषण गर्मी में बिजली की खपत बढ़ने के कारण बिल अधिक आने की बात कही गई थी, लेकिन अब बारिश के मौसम में खपत कम होने के बावजूद कई उपभोक्ताओं के बिल दोगुने आने से परेशानी बढ़ गई है। लगातार बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर उपभोक्ताओं में भी असंतोष बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि शहर में रोजाना करीब 20 से 25 उपभोक्ता अधिक बिल आने की शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं। कांग्रेसियों का आरोप है कि शिकायतों का मौके पर समाधान करने के बजाय कई बार मोबाइल में दिखाई जा रही यूनिट की जानकारी देखकर ही उपभोक्ताओं को वापस भेज दिया जाता है। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है। प्रदेश और जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस ने घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इसके लिए पार्टी ने बाकायदा एक फॉर्म तैयार किया है, जिसमें स्मार्ट मीटर लगने से पहले और बाद के बिजली बिल की जानकारी जुटाई जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई घरों में बिजली बिल बढ़ गया है। 20-25 शिकायतें रोज पहुंचने का दावा शहर में स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिल की शिकायतों को लेकर रोजाना करीब 20 से 25 उपभोक्ताओं के बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचने की बात सामने आ रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में मोबाइल पर दिखाई दे रही यूनिट की जानकारी देखकर ही उन्हें वापस भेज दिया जाता है। मीटर की जांच का आश्वासन मिलने के बाद भी जांच रिपोर्ट की जानकारी समय पर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने से स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का अविश्वास बढ़ रहा है। स्मार्ट मीटर से बढ़ा बिजली बिल कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मई-जून की गर्मी में बिजली की खपत बढ़ना स्वाभाविक था, लेकिन बारिश के मौसम में खपत कम होने के बावजूद कई उपभोक्ताओं के बिल अधिक आ रहे हैं। पार्टी इसी मुद्दे को आधार बनाकर स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। हर वार्ड में जुटाया जा रहा बिल का हिसाब जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि घर-घर अभियान में उपभोक्ताओं से पुराने और स्मार्ट मीटर लगने के बाद के बिल की जानकारी ली जा रही है। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि मीटर बदलने के बाद बिजली की खपत और बिल की राशि में कितना अंतर आया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद इसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे और सरकार के सामने उपभोक्ताओं की शिकायतें रखी जाएंगी। बिल दोगुना होने का दावा, विभाग ने नकारा कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर बिजली विभाग ऐसी किसी गड़बड़ी से इनकार कर रहा है। विभाग का कहना है कि अधिक बिल की शिकायत मिलने पर मीटर की जांच कराई जाती है और जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाती है। महतारी वंदन योजना पर भी सरकार को घेरा जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष स्मार्ट मीटर के मुद्दे को कांग्रेस ने सीधे सरकार की महतारी वंदन योजना से जोड़ते हुए राजनीतिक हमला भी तेज कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार एक तरफ महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिल बढ़ने से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पार्टी इसे लेकर सरकार से जवाब मांग रही है। सर्वे के आंकड़ों से तय होगी आगे की रणनीति कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा के नेतृत्व में चल रहे अभियान को पार्टी फिलहाल जनसंपर्क और तथ्य जुटाने की कवायद बता रही है। हालांकि स्मार्ट मीटर के बहाने घर-घर पहुंचकर बिजली बिल का हिसाब जुटाने से यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी गरमाता दिख रहा है। कांग्रेस का दावा है कि सर्वे के आंकड़े सामने आने के बाद सरकार के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा। वहीं, बिजली बिल बढ़ने के दावों की वास्तविकता आधिकारिक जांच और सर्वे के आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।