अनूपपुर में पांच दिन से हाथियों की दहशत:छत्तीसगढ़ से आए 4 हाथी राजेंद्र ग्राम में तोड़ रहे मकान, ग्रामीण परेशान
अनूपपुर में पांच दिन से हाथियों की दहशत:छत्तीसगढ़ से आए 4 हाथी राजेंद्र ग्राम में तोड़ रहे मकान, ग्रामीण परेशान
छत्तीसगढ़ के मरवाही से अनूपपुर जिले में आए चार हाथियों ने राजेंद्र ग्राम में डेरा डाल दिया है। पांच दिन से ये हाथी दिन में जंगल में रहते हैं और रात होते ही गांवों में पहुंच जाते हैं। हाथी ग्रामीणों के घरों में घुसकर अनाज की तलाश में तोड़फोड़ कर रहे हैं। शुक्रवार रात गुट्टीपारा बीट के जंगल से निकलकर बिजौरा में धन्ना, अजीत और निहाली के घरों को नुकसान पहुंचाया। शनिवार को छींदपानी बीट से निकलकर बिजौरा के बैगानटोला में रतनी बाई, टिल्लू, अमृत, कान्ता और लामू के मकानों में तोड़फोड़ की। रविवार सुबह ये हाथी लमसरई और गर्जन बीजा होते हुए बेनीबारी बीट के रौषरखार गांव के पास जंगल में पहुंच गए। माना जा रहा है कि खेतों में अनाज नहीं मिलने के कारण हाथी घरों को निशाना बना रहे हैं। हाथियों के डर से ग्रामीण रात भर जागकर अपनी संपत्ति की रखवाली कर रहे हैं। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों पर नजर रख रही है। विभाग ने ग्रामीणों को दिन में हाथियों के आराम करने वाले जंगल क्षेत्र में न जाने की चेतावनी दी है। साथ ही रात में जंगल के पास बने मकानों के बजाय गांव के बीच स्थित पक्के मकानों में रहने की सलाह दी है।
छत्तीसगढ़ के मरवाही से अनूपपुर जिले में आए चार हाथियों ने राजेंद्र ग्राम में डेरा डाल दिया है। पांच दिन से ये हाथी दिन में जंगल में रहते हैं और रात होते ही गांवों में पहुंच जाते हैं। हाथी ग्रामीणों के घरों में घुसकर अनाज की तलाश में तोड़फोड़ कर रहे हैं। शुक्रवार रात गुट्टीपारा बीट के जंगल से निकलकर बिजौरा में धन्ना, अजीत और निहाली के घरों को नुकसान पहुंचाया। शनिवार को छींदपानी बीट से निकलकर बिजौरा के बैगानटोला में रतनी बाई, टिल्लू, अमृत, कान्ता और लामू के मकानों में तोड़फोड़ की। रविवार सुबह ये हाथी लमसरई और गर्जन बीजा होते हुए बेनीबारी बीट के रौषरखार गांव के पास जंगल में पहुंच गए। माना जा रहा है कि खेतों में अनाज नहीं मिलने के कारण हाथी घरों को निशाना बना रहे हैं। हाथियों के डर से ग्रामीण रात भर जागकर अपनी संपत्ति की रखवाली कर रहे हैं। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों पर नजर रख रही है। विभाग ने ग्रामीणों को दिन में हाथियों के आराम करने वाले जंगल क्षेत्र में न जाने की चेतावनी दी है। साथ ही रात में जंगल के पास बने मकानों के बजाय गांव के बीच स्थित पक्के मकानों में रहने की सलाह दी है।