GPM कलेक्टर ने अनुपस्थित अधिकारियों को फटकारा:समस्या निवारण शिविर में सख्त रुख, कार्रवाई के दिए निर्देश

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सुदूर मगुरदा गांव में शुक्रवार को जिला स्तरीय समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने अलग-अलग विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी गैरमौजूद पाए गए, जिस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। शिविर में जिले के अलग-अलग विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए थे, जहां ग्रामीणों से उनकी समस्याओं और मांगों से संबंधित 45 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से कुछ समस्याओं का तत्काल निवारण किया गया, जबकि शेष आवेदनों को समय-सीमा की बैठक में हल करने का आश्वासन दिया गया। कलेक्टर ने सभी स्टॉलों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि कई महत्वपूर्ण विभागों के जिला स्तरीय या ब्लॉक अधिकारी अपने स्टॉल पर मौजूद नहीं थे। इस पर कलेक्टर ने अनुपस्थित अधिकारियों को फटकार लगाई और उन पर कार्यवाही करने की बात कही। शिक्षा विभाग के स्टॉल पर लापरवाही पर कलेक्टर नाराज शिक्षा विभाग के स्टॉल पर शिक्षकों को बैठे देखकर कलेक्टर ने कहा कि यहां बीईओ और डीईओ को उपस्थित होना चाहिए था, जबकि शिक्षकों को अपने स्कूलों में होना चाहिए। राजस्व विभाग के स्टॉल पर राजस्व संबंधी प्रकरणों के जल्द निराकरण न होने पर उन्होंने कहा कि जब शिविर का दिन पहले से तय था, तो पूरी तैयारी क्यों नहीं की गई। अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को जारी किए जाएंगे नोटिस वन विभाग के स्टॉल पर भी अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "न डीएफओ हैं, न रेंजर, और न ही एसडीओ। ऐसे में समस्या निराकरण शिविर का क्या मतलब हुआ?" कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने स्पष्ट किया कि बिना किसी पूर्व सूचना के शिविर से अनुपस्थित रहने वाले जिला स्तरीय अधिकारियों के नाम नोटिस जारी किए जाएंगे और उन पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

GPM कलेक्टर ने अनुपस्थित अधिकारियों को फटकारा:समस्या निवारण शिविर में सख्त रुख, कार्रवाई के दिए निर्देश
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सुदूर मगुरदा गांव में शुक्रवार को जिला स्तरीय समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने अलग-अलग विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी गैरमौजूद पाए गए, जिस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। शिविर में जिले के अलग-अलग विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए थे, जहां ग्रामीणों से उनकी समस्याओं और मांगों से संबंधित 45 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से कुछ समस्याओं का तत्काल निवारण किया गया, जबकि शेष आवेदनों को समय-सीमा की बैठक में हल करने का आश्वासन दिया गया। कलेक्टर ने सभी स्टॉलों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि कई महत्वपूर्ण विभागों के जिला स्तरीय या ब्लॉक अधिकारी अपने स्टॉल पर मौजूद नहीं थे। इस पर कलेक्टर ने अनुपस्थित अधिकारियों को फटकार लगाई और उन पर कार्यवाही करने की बात कही। शिक्षा विभाग के स्टॉल पर लापरवाही पर कलेक्टर नाराज शिक्षा विभाग के स्टॉल पर शिक्षकों को बैठे देखकर कलेक्टर ने कहा कि यहां बीईओ और डीईओ को उपस्थित होना चाहिए था, जबकि शिक्षकों को अपने स्कूलों में होना चाहिए। राजस्व विभाग के स्टॉल पर राजस्व संबंधी प्रकरणों के जल्द निराकरण न होने पर उन्होंने कहा कि जब शिविर का दिन पहले से तय था, तो पूरी तैयारी क्यों नहीं की गई। अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को जारी किए जाएंगे नोटिस वन विभाग के स्टॉल पर भी अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "न डीएफओ हैं, न रेंजर, और न ही एसडीओ। ऐसे में समस्या निराकरण शिविर का क्या मतलब हुआ?" कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने स्पष्ट किया कि बिना किसी पूर्व सूचना के शिविर से अनुपस्थित रहने वाले जिला स्तरीय अधिकारियों के नाम नोटिस जारी किए जाएंगे और उन पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।