महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा से ही देश की तरक्की संभव:न्यायाधीश अमिताभ बोले-अभियोजन का काम सिर्फ सजा दिलाना नहीं, न्याय सुनिश्चित करना है
महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा से ही देश की तरक्की संभव:न्यायाधीश अमिताभ बोले-अभियोजन का काम सिर्फ सजा दिलाना नहीं, न्याय सुनिश्चित करना है
गुना में जिला अभियोजन संचालनालय द्वारा अभियोजन अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वक्ताओं ने अभियोजन अधिकारियों की भूमिका, न्याय प्रक्रिया में उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्रा ने कहा कि लोक अभियोजन का कार्य केवल सजा दिलाना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने में सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी पद की सार्थकता तभी है जब उसे पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ निभाया जाए। उन्होंने अभियोजन अधिकारियों से कहा कि प्रॉसिक्यूटर को गाड़ी के ड्राइवर की तरह पूरे ट्रायल को दिशा देनी चाहिए। एडीपीओ की भूमिका पूरे ट्रायल के दौरान बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से समझकर कार्य करना चाहिए। यह कार्यशाला हजारीलाल बैरवा, प्रभारी उपनिदेशक के निर्देशन में आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्रा, विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस राधाकृष्ण मालवीय, विशेष न्यायाधीश शैलजा गुप्ता और सीजेएम मधुलिका मुले मौजूद रहीं। बच्चों को अपराधों के प्रति जागरूक करना जरूरी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेएम मधुलिका मुले ने कहा कि बच्चों को अपराधों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। आजकल कई स्कैमर लोगों को जाल में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने से ज्यादा जरूरी है कि हम पहले ही उससे बचाव के तरीके सीखें। पॉक्सो मामलों की विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों में अभियोजन और न्यायाधीश दोनों को संवेदनशील होकर कार्य करना चाहिए। पीड़ित का विश्वास जीतना और उसे न्याय दिलाना सबसे महत्वपूर्ण है। निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए विशेष न्यायाधीश राधाकृष्ण मालवीय ने कहा कि भले ही 99 दोषी बच जाएं, लेकिन किसी एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। कार्यक्रम में कहा गया कि कोई भी देश तब तक तरक्की नहीं कर सकता जब तक वहां की महिलाएं और बच्चे सुरक्षित नहीं होंगे। कार्यक्रम में डीपीओ हजारीलाल बैरवा ने कहा कि अभियोजन संचालनालय भोपाल के निर्देशन में आयोजित यह कार्यशाला अधिकारियों के ज्ञान को बढ़ाने में सहायक होगी, जिससे वे न्यायालय में राज्य का पक्ष अधिक प्रभावी तरीके से रख सकेंगे। कार्यक्रम के समापन पर आईपी मिश्रा (सेवानिवृत्त डीडीपी) ने कहा कि प्रशिक्षण समय के साथ ज्ञान पर जमी धूल को हटाने का काम करता है। कार्यक्रम का संचालन ममता दीक्षित, विशेष लोक अभियोजक ने किया।
गुना में जिला अभियोजन संचालनालय द्वारा अभियोजन अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वक्ताओं ने अभियोजन अधिकारियों की भूमिका, न्याय प्रक्रिया में उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्रा ने कहा कि लोक अभियोजन का कार्य केवल सजा दिलाना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने में सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी पद की सार्थकता तभी है जब उसे पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ निभाया जाए। उन्होंने अभियोजन अधिकारियों से कहा कि प्रॉसिक्यूटर को गाड़ी के ड्राइवर की तरह पूरे ट्रायल को दिशा देनी चाहिए। एडीपीओ की भूमिका पूरे ट्रायल के दौरान बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से समझकर कार्य करना चाहिए। यह कार्यशाला हजारीलाल बैरवा, प्रभारी उपनिदेशक के निर्देशन में आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्रा, विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस राधाकृष्ण मालवीय, विशेष न्यायाधीश शैलजा गुप्ता और सीजेएम मधुलिका मुले मौजूद रहीं। बच्चों को अपराधों के प्रति जागरूक करना जरूरी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेएम मधुलिका मुले ने कहा कि बच्चों को अपराधों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। आजकल कई स्कैमर लोगों को जाल में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने से ज्यादा जरूरी है कि हम पहले ही उससे बचाव के तरीके सीखें। पॉक्सो मामलों की विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों में अभियोजन और न्यायाधीश दोनों को संवेदनशील होकर कार्य करना चाहिए। पीड़ित का विश्वास जीतना और उसे न्याय दिलाना सबसे महत्वपूर्ण है। निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए विशेष न्यायाधीश राधाकृष्ण मालवीय ने कहा कि भले ही 99 दोषी बच जाएं, लेकिन किसी एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। कार्यक्रम में कहा गया कि कोई भी देश तब तक तरक्की नहीं कर सकता जब तक वहां की महिलाएं और बच्चे सुरक्षित नहीं होंगे। कार्यक्रम में डीपीओ हजारीलाल बैरवा ने कहा कि अभियोजन संचालनालय भोपाल के निर्देशन में आयोजित यह कार्यशाला अधिकारियों के ज्ञान को बढ़ाने में सहायक होगी, जिससे वे न्यायालय में राज्य का पक्ष अधिक प्रभावी तरीके से रख सकेंगे। कार्यक्रम के समापन पर आईपी मिश्रा (सेवानिवृत्त डीडीपी) ने कहा कि प्रशिक्षण समय के साथ ज्ञान पर जमी धूल को हटाने का काम करता है। कार्यक्रम का संचालन ममता दीक्षित, विशेष लोक अभियोजक ने किया।