करौंदी गांव में चैत्र नवरात्रि पर रामलीला:स्थानीय कलाकारों ने किया मंचन; संत बोले-सनातन संस्कृति से जुड़ने का माध्यम
डिंडोरी के करौंदी गांव में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर शनिवार शाम स्थानीय कलाकारों की ओर से रामलीला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संत भगत गिरी बच्चू महाराज, स्थानीय विधायक ओमप्रकाश और जनपद अध्यक्ष उपस्थित रहे। रामलीला देखने के लिए आसपास के गांवों से भी ग्रामीण पहुंचे। संत भगत गिरी बच्चू महाराज ने मुकुट किरीट पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने आशीर्वचन में कहा कि यह आयोजन लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है और भगवान राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। विधायक ने स्थानीय कलाकारों की सराहना की विधायक ओमप्रकाश ने स्थानीय कलाकारों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आस्था, कला तथा भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। रामलीला के पहले दिन स्थानीय कलाकारों ने नारद मोह और विश्वमोहनी स्वयंवर के रोचक प्रसंगों का जीवंत मंचन किया। ग्रामीण दर्शक मंत्रमुग्ध होकर इस प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। डिजिटल दौर में युवाओं ने शुरू की रामलीला संस्कार रामलीला समिति के अध्यक्ष टेकेश्वर साहू ने बताया कि डिजिटल युग में जब लोग मोबाइल और टीवी पर मनोरंजन कर रहे हैं, तब गांव के कुछ पढ़े-लिखे युवकों ने रामलीला के आयोजन का विचार रखा। इसके बाद समिति का गठन किया गया। समिति के अनुसार, रामलीला में सभी कलाकार और वाद्य यंत्र बजाने वाले स्थानीय हैं। आज रात आठ बजे रावण अत्याचार और भगवान राम जन्म लीला का मंचन किया जाएगा, जो रात 12 बजे तक चलेगा।
डिंडोरी के करौंदी गांव में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर शनिवार शाम स्थानीय कलाकारों की ओर से रामलीला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संत भगत गिरी बच्चू महाराज, स्थानीय विधायक ओमप्रकाश और जनपद अध्यक्ष उपस्थित रहे। रामलीला देखने के लिए आसपास के गांवों से भी ग्रामीण पहुंचे। संत भगत गिरी बच्चू महाराज ने मुकुट किरीट पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने आशीर्वचन में कहा कि यह आयोजन लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है और भगवान राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। विधायक ने स्थानीय कलाकारों की सराहना की विधायक ओमप्रकाश ने स्थानीय कलाकारों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आस्था, कला तथा भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। रामलीला के पहले दिन स्थानीय कलाकारों ने नारद मोह और विश्वमोहनी स्वयंवर के रोचक प्रसंगों का जीवंत मंचन किया। ग्रामीण दर्शक मंत्रमुग्ध होकर इस प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। डिजिटल दौर में युवाओं ने शुरू की रामलीला संस्कार रामलीला समिति के अध्यक्ष टेकेश्वर साहू ने बताया कि डिजिटल युग में जब लोग मोबाइल और टीवी पर मनोरंजन कर रहे हैं, तब गांव के कुछ पढ़े-लिखे युवकों ने रामलीला के आयोजन का विचार रखा। इसके बाद समिति का गठन किया गया। समिति के अनुसार, रामलीला में सभी कलाकार और वाद्य यंत्र बजाने वाले स्थानीय हैं। आज रात आठ बजे रावण अत्याचार और भगवान राम जन्म लीला का मंचन किया जाएगा, जो रात 12 बजे तक चलेगा।