सिवनी में नरवाई जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण:प्रशासन की चेतावनी बेअसर, ग्रामीण चिंतित; शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

सिवनी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन की सख्त चेतावनियों के बावजूद किसान नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार रात धनोरा से मोहगांव टेक क्षेत्र के आसपास कई खेतों में नरवाई जलाई गई। आग की लपटें दूर तक दिखाई दीं। नरवाई जलाने से उठने वाला धुआं और राख हवा के साथ गांवों से होते हुए शहर तक पहुंच रहा है। इससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और आमजन को परेशानी हो रही है। छिंदवाड़ा रोड बायपास और लखनवाड़ा क्षेत्र में भी ऐसी ही घटनाएं दर्ज की गई हैं। प्रदूषण के साथ-साथ आग फैलने का खतरा भी बढ़ा नरवाई जलाने से प्रदूषण के साथ-साथ आग फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कई स्थानों पर आग आसपास के खेतों तक पहुंच गई, जिससे खड़ी फसल और कृषि सामग्री को नुकसान होने की आशंका है। लखनवाड़ा क्षेत्र में बुधवार रात एक खेत में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया और गांव के अंतिम छोर तक पहुंच गई। ग्रामीणों ने मिलकर आग पर काबू पाया। इस घटना के बाद से इलाके में भय का माहौल है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं धुएं के कारण विजिबिलिटी प्रभावित हो रही है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे नियम तोड़ने वालों के हौसले बुलंद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसके बावजूद किसान पारंपरिक तरीके से खेत साफ कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में सख्त कदम उठाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस खतरे को नियंत्रित किया जा सके। नियम उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। संबंधित पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही राजस्व विभाग की ओर से आर्थिक दंड और कृषि योजनाओं के लाभ (सब्सिडी/समर्थन मूल्य) से वंचित किया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।

Apr 23, 2026 - 07:23
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सिवनी में नरवाई जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण:प्रशासन की चेतावनी बेअसर, ग्रामीण चिंतित; शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
सिवनी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन की सख्त चेतावनियों के बावजूद किसान नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार रात धनोरा से मोहगांव टेक क्षेत्र के आसपास कई खेतों में नरवाई जलाई गई। आग की लपटें दूर तक दिखाई दीं। नरवाई जलाने से उठने वाला धुआं और राख हवा के साथ गांवों से होते हुए शहर तक पहुंच रहा है। इससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और आमजन को परेशानी हो रही है। छिंदवाड़ा रोड बायपास और लखनवाड़ा क्षेत्र में भी ऐसी ही घटनाएं दर्ज की गई हैं। प्रदूषण के साथ-साथ आग फैलने का खतरा भी बढ़ा नरवाई जलाने से प्रदूषण के साथ-साथ आग फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कई स्थानों पर आग आसपास के खेतों तक पहुंच गई, जिससे खड़ी फसल और कृषि सामग्री को नुकसान होने की आशंका है। लखनवाड़ा क्षेत्र में बुधवार रात एक खेत में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया और गांव के अंतिम छोर तक पहुंच गई। ग्रामीणों ने मिलकर आग पर काबू पाया। इस घटना के बाद से इलाके में भय का माहौल है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं धुएं के कारण विजिबिलिटी प्रभावित हो रही है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे नियम तोड़ने वालों के हौसले बुलंद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसके बावजूद किसान पारंपरिक तरीके से खेत साफ कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में सख्त कदम उठाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस खतरे को नियंत्रित किया जा सके। नियम उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। संबंधित पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही राजस्व विभाग की ओर से आर्थिक दंड और कृषि योजनाओं के लाभ (सब्सिडी/समर्थन मूल्य) से वंचित किया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।