गाड़ी में 1 नहीं 4 करोड़ थे,2 पुलिस ने रखे:ASI कारोबारी को लाया...चौकी प्रभारी ने डील की; पढ़िए हवालाकांड जांच रिपोर्ट में किसकी-क्या भूमिका

गुना हवाला कांड में गाड़ी से 1 करोड़ रुपए मिले और इनमें से 20 लाख रुपए लेकर पुलिस ने छोड़ दिया। हकीकत में ऐसा नहीं हुआ था। गाड़ी में 4 करोड़ रुपए थे और पुलिस ने इनमें से 2 करोड़ रुपए अपने पास रखे। इसकी प्रॉपर डील हुई और सभी पुलिसकर्मियों की अलग-अलग भूमिका थी। एएसआई हवाला कारोबारी को गाड़ी से लेकर आया और रुपए की डील थाना प्रभारी ने की थी। इस पूरे कांड में एसपी ऑफिस और निवास पर इसमें शामिल पुलिसकर्मियों की लोकेशन मिली है। इतना ही नहीं व्यापारी भी वहां मौजूद था। यह खुलासा जांच रिपोर्ट में हुआ है। मार्च में हुए हवालाकांड की जांच रिपोर्ट ग्वालियर आईजी की टेबल तक पहुंच चुकी है। आईजी के निर्देश पर गुना SP ने चारों पुलिसकर्मियों को चार्जशीट जारी कर दी है। अब इस मामले में विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। जांच रिपोर्ट में क्या है, किसकी भूमिका क्या रही… दैनिक भास्कर ने यह जानने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले मामला और अब तक का घटनाक्रम जानिए 19 मार्च 2026, रूठियाई चौकी। नेशनल हाईवे-46 पर पुलिस ने गुजरात पासिंग गाड़ी को रोका था। दावा किया गया कि सर्चिंग के दौरान कार में 1 करोड़ रुपए मिले। इनमें से पुलिस ने 20 लाख रुपए लेकर गाड़ी को छोड़ दिया। अगले दिन गुजरात से एक आईपीएस का कॉल आया तो पुलिस ने वह रुपए भी लौटा दिए। 20 मार्च को गाड़ी पैसे लेने वापस गुना आई और पांच घंटे तक यहीं रही। 22 मार्च को ग्वालियर DIG अमित सांघी गुना पहुंचे और उन्होंने शुरुआत में चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। अगले दिन गुना एसपी अंकित सोनी को भी हटा दिया। इतना ही नहीं मामले की जांच ट्रेनी आईपीएस आयुष जाखड़ को सौंपी गई। 25 दिन चली जांच के बाद आईजी अरविंद सक्सेना को यह रिपोर्ट सौंपी गई है। रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों, व्यापारियों और इससे जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में निलंबित चारों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। 7 पॉइंट्स में समझिए हवाला की पूरी कहानी 1. थाना प्रभारी ने आवास पर बुलाई गाड़ी 19 मार्च 2026 : धरनावदा थाना क्षेत्र के तत्कालीन प्रभारी प्रभात कटारे (SI) को पुलिसकर्मियों ने गाड़ी पकड़ने की जानकारी दी। बताया कि उसमें कैश मिला है। जानकारी लगने पर कटारे ने गाड़ी को रूठियाई चौकी न बुलवाकर सीधे अपने आवास पर बुलवाया। वहीं पर डील की गई। इसके बाद वह उसी रात प्राइवेट गाड़ी से गुना आए। अगले दिन भी उनके गुना आने के सबूत जांच अधिकारी को मिले हैं। वह तत्कालीन एसपी से भी ये मिलने पहुंचे। गाड़ी की लोकेशन गुना में मिली है। 2. एएसआई ने हाईवे पर पकड़ी थी गाड़ी रूठियाई चौकी के तत्कालीन प्रभारी सैयद हुसैन ने गाड़ी पकड़ी थी। पुलिसकर्मियों को जब सूचना दी गई तो तलाशी ली। गाड़ी में कैश मिला तो इन्होंने ही थाना प्रभारी को अवगत कराया और गाड़ी को उनके आवास पर लेकर पहुंचे। इनके ही नेतृत्व में CCTV के ब्लाइंड एरिया में थाना प्रभारी के आवास गाड़ी लाई गई। 3. गाड़ी में कैश आने की सूचना इन्हें ही मिली इस पूरे मामले में सबसे मुख्य भूमिका देवेंद्र सिकरवार (प्रधान आरक्षक) की रही। नेशनल हाईवे पर गाड़ी रोकने, फाइनेंस वाली गाड़ियों से वसूली करने वाले एक प्राइवेट आदमी नीरज जादौन (जिस पर आपराधिक मामले दर्ज हैं) से इन्हें इनपुट मिला। नीरज जादौन से इनकी 11 बार बात हुई। इस बात के प्रमाण भी जांच अधिकारी को मिले हैं। 20 मार्च को सिकरवार का मूवमेंट भी एसपी ऑफिस के आसपास मिला है। धरनावदा थाने की डायल 112, एक निजी क्रेटा गाड़ी का मूवमेंट गुना तरफ दिखा। 4. जानकारी अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई आरक्षक ड्राइवर सुंदर रमन गाड़ी चलाकर चौकी प्रभारी एएसआई साजिद हुसैन को मौके पर लेकर गया। आरक्षक के सामने ही पूरी कार्रवाई हुई। तब भी उसने वरिष्ठ अधिकारियों को कोई सूचना नहीं दी। बाद में भी किसी बात से अवगत नहीं कराया। 5. व्यापारी भी एसपी ऑफिस/बंगले पहुंचे जांच टीम को यह भी सबूत मिले हैं कि घटना के अगले दिन 20 मार्च को गुजरात के व्यापारी अनिल पटेल और मौलिक पटेल का मूवमेंट भी गुना में रहा। एसपी ऑफिस/बंगले के पास उनकी गाड़ी आती जाती दिखी है। 20 मार्च को पांच घंटे वही गाड़ी गुना में थी। ये पगारा टोल नाके के CCTV और टोल कटने से स्पष्ट हुआ है। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि अगले दिन दोनों व्यापारियों की मुलाकात एसपी से हुई और फिर इन्हें पैसे वापस किए गए। 6. पुलिस ने रोजनामचे में नहीं की एंट्री इस कैश कांड में धरनावदा थाने की टीम पर यही सबसे बड़ा सवाल है कि पुलिस ने गाड़ी को पकड़ा और उसमें कैश लीगल भी था। जांच के बाद गाड़ी को छोड़ दिया गया, तो इसकी एंट्री रोजनामचे में क्यों नहीं की गई। न ही वरिष्ठ अधिकारियों को कोई सूचना दी गई। इसी कारण प्रथम दृष्टया इनकी भूमिका संदिग्ध लगने पर चारों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। 7. पुलिस ने जूट बैग में 2 करोड़ लिए जांच रिपोर्ट में गाड़ी में मिले कैश को लेकर भी उल्लेख है। भास्कर पड़ताल में पता चला कि गाड़ी में जूट की बोरी में 4 करोड़ मिले थे। डील अनुसार- 50 प्रतिशत यानि दो करोड़ कैश पुलिस ने रखा और दो करोड़ के साथ गाड़ी को रवाना कर दिया। गाड़ी के रवाना होते ही पुलिस ने पसरेंट पर बात की, लेकिन बंटे नहीं। हालांकि कुछ घंटे बाद ही इन्हें पूरे दो करोड़ रुपए हवाला कारोबारी को वापस करना पड़े, क्योंकि रुपए वापस करने के लिए गुजरात से हाई लेवल पर कॉल किया गया था। कॉल आने के बाद अगले दिन वही गाड़ी पैसे वापस लेने आई। व्यापारियों ने मानी एसपी से मुलाकात की बात गुजरात के व्यापारी ने अपने बयानों में एसपी से मुलाकात की बात स्वीकार की थी। सूरत के मसाला व्यापारी दक्षित पटेल ने बताया था कि उनके पास केवल 9.50 लाख रुपए थे, जो गुजरात से दिल्ली भेजे थे। लेकिन जब दिल्ली में दूसरा व्यापारी नहीं मिला तो उनका ड्राइवर स्कॉर्पियो गाड़ी (GJ05 RK 9351) से पैसे वापस लेकर इंदौर लौट रहा था, तभी गुना की रूठियाई पुलिस चौकी के पास स्थित टोल नाके पर पुलिस ने चैकिंग के दौरान गाड़ी को रोक लिया था

Apr 23, 2026 - 07:23
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गाड़ी में 1 नहीं 4 करोड़ थे,2 पुलिस ने रखे:ASI कारोबारी को लाया...चौकी प्रभारी ने डील की; पढ़िए हवालाकांड जांच रिपोर्ट में किसकी-क्या भूमिका
गुना हवाला कांड में गाड़ी से 1 करोड़ रुपए मिले और इनमें से 20 लाख रुपए लेकर पुलिस ने छोड़ दिया। हकीकत में ऐसा नहीं हुआ था। गाड़ी में 4 करोड़ रुपए थे और पुलिस ने इनमें से 2 करोड़ रुपए अपने पास रखे। इसकी प्रॉपर डील हुई और सभी पुलिसकर्मियों की अलग-अलग भूमिका थी। एएसआई हवाला कारोबारी को गाड़ी से लेकर आया और रुपए की डील थाना प्रभारी ने की थी। इस पूरे कांड में एसपी ऑफिस और निवास पर इसमें शामिल पुलिसकर्मियों की लोकेशन मिली है। इतना ही नहीं व्यापारी भी वहां मौजूद था। यह खुलासा जांच रिपोर्ट में हुआ है। मार्च में हुए हवालाकांड की जांच रिपोर्ट ग्वालियर आईजी की टेबल तक पहुंच चुकी है। आईजी के निर्देश पर गुना SP ने चारों पुलिसकर्मियों को चार्जशीट जारी कर दी है। अब इस मामले में विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। जांच रिपोर्ट में क्या है, किसकी भूमिका क्या रही… दैनिक भास्कर ने यह जानने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले मामला और अब तक का घटनाक्रम जानिए 19 मार्च 2026, रूठियाई चौकी। नेशनल हाईवे-46 पर पुलिस ने गुजरात पासिंग गाड़ी को रोका था। दावा किया गया कि सर्चिंग के दौरान कार में 1 करोड़ रुपए मिले। इनमें से पुलिस ने 20 लाख रुपए लेकर गाड़ी को छोड़ दिया। अगले दिन गुजरात से एक आईपीएस का कॉल आया तो पुलिस ने वह रुपए भी लौटा दिए। 20 मार्च को गाड़ी पैसे लेने वापस गुना आई और पांच घंटे तक यहीं रही। 22 मार्च को ग्वालियर DIG अमित सांघी गुना पहुंचे और उन्होंने शुरुआत में चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। अगले दिन गुना एसपी अंकित सोनी को भी हटा दिया। इतना ही नहीं मामले की जांच ट्रेनी आईपीएस आयुष जाखड़ को सौंपी गई। 25 दिन चली जांच के बाद आईजी अरविंद सक्सेना को यह रिपोर्ट सौंपी गई है। रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों, व्यापारियों और इससे जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में निलंबित चारों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। 7 पॉइंट्स में समझिए हवाला की पूरी कहानी 1. थाना प्रभारी ने आवास पर बुलाई गाड़ी 19 मार्च 2026 : धरनावदा थाना क्षेत्र के तत्कालीन प्रभारी प्रभात कटारे (SI) को पुलिसकर्मियों ने गाड़ी पकड़ने की जानकारी दी। बताया कि उसमें कैश मिला है। जानकारी लगने पर कटारे ने गाड़ी को रूठियाई चौकी न बुलवाकर सीधे अपने आवास पर बुलवाया। वहीं पर डील की गई। इसके बाद वह उसी रात प्राइवेट गाड़ी से गुना आए। अगले दिन भी उनके गुना आने के सबूत जांच अधिकारी को मिले हैं। वह तत्कालीन एसपी से भी ये मिलने पहुंचे। गाड़ी की लोकेशन गुना में मिली है। 2. एएसआई ने हाईवे पर पकड़ी थी गाड़ी रूठियाई चौकी के तत्कालीन प्रभारी सैयद हुसैन ने गाड़ी पकड़ी थी। पुलिसकर्मियों को जब सूचना दी गई तो तलाशी ली। गाड़ी में कैश मिला तो इन्होंने ही थाना प्रभारी को अवगत कराया और गाड़ी को उनके आवास पर लेकर पहुंचे। इनके ही नेतृत्व में CCTV के ब्लाइंड एरिया में थाना प्रभारी के आवास गाड़ी लाई गई। 3. गाड़ी में कैश आने की सूचना इन्हें ही मिली इस पूरे मामले में सबसे मुख्य भूमिका देवेंद्र सिकरवार (प्रधान आरक्षक) की रही। नेशनल हाईवे पर गाड़ी रोकने, फाइनेंस वाली गाड़ियों से वसूली करने वाले एक प्राइवेट आदमी नीरज जादौन (जिस पर आपराधिक मामले दर्ज हैं) से इन्हें इनपुट मिला। नीरज जादौन से इनकी 11 बार बात हुई। इस बात के प्रमाण भी जांच अधिकारी को मिले हैं। 20 मार्च को सिकरवार का मूवमेंट भी एसपी ऑफिस के आसपास मिला है। धरनावदा थाने की डायल 112, एक निजी क्रेटा गाड़ी का मूवमेंट गुना तरफ दिखा। 4. जानकारी अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई आरक्षक ड्राइवर सुंदर रमन गाड़ी चलाकर चौकी प्रभारी एएसआई साजिद हुसैन को मौके पर लेकर गया। आरक्षक के सामने ही पूरी कार्रवाई हुई। तब भी उसने वरिष्ठ अधिकारियों को कोई सूचना नहीं दी। बाद में भी किसी बात से अवगत नहीं कराया। 5. व्यापारी भी एसपी ऑफिस/बंगले पहुंचे जांच टीम को यह भी सबूत मिले हैं कि घटना के अगले दिन 20 मार्च को गुजरात के व्यापारी अनिल पटेल और मौलिक पटेल का मूवमेंट भी गुना में रहा। एसपी ऑफिस/बंगले के पास उनकी गाड़ी आती जाती दिखी है। 20 मार्च को पांच घंटे वही गाड़ी गुना में थी। ये पगारा टोल नाके के CCTV और टोल कटने से स्पष्ट हुआ है। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि अगले दिन दोनों व्यापारियों की मुलाकात एसपी से हुई और फिर इन्हें पैसे वापस किए गए। 6. पुलिस ने रोजनामचे में नहीं की एंट्री इस कैश कांड में धरनावदा थाने की टीम पर यही सबसे बड़ा सवाल है कि पुलिस ने गाड़ी को पकड़ा और उसमें कैश लीगल भी था। जांच के बाद गाड़ी को छोड़ दिया गया, तो इसकी एंट्री रोजनामचे में क्यों नहीं की गई। न ही वरिष्ठ अधिकारियों को कोई सूचना दी गई। इसी कारण प्रथम दृष्टया इनकी भूमिका संदिग्ध लगने पर चारों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। 7. पुलिस ने जूट बैग में 2 करोड़ लिए जांच रिपोर्ट में गाड़ी में मिले कैश को लेकर भी उल्लेख है। भास्कर पड़ताल में पता चला कि गाड़ी में जूट की बोरी में 4 करोड़ मिले थे। डील अनुसार- 50 प्रतिशत यानि दो करोड़ कैश पुलिस ने रखा और दो करोड़ के साथ गाड़ी को रवाना कर दिया। गाड़ी के रवाना होते ही पुलिस ने पसरेंट पर बात की, लेकिन बंटे नहीं। हालांकि कुछ घंटे बाद ही इन्हें पूरे दो करोड़ रुपए हवाला कारोबारी को वापस करना पड़े, क्योंकि रुपए वापस करने के लिए गुजरात से हाई लेवल पर कॉल किया गया था। कॉल आने के बाद अगले दिन वही गाड़ी पैसे वापस लेने आई। व्यापारियों ने मानी एसपी से मुलाकात की बात गुजरात के व्यापारी ने अपने बयानों में एसपी से मुलाकात की बात स्वीकार की थी। सूरत के मसाला व्यापारी दक्षित पटेल ने बताया था कि उनके पास केवल 9.50 लाख रुपए थे, जो गुजरात से दिल्ली भेजे थे। लेकिन जब दिल्ली में दूसरा व्यापारी नहीं मिला तो उनका ड्राइवर स्कॉर्पियो गाड़ी (GJ05 RK 9351) से पैसे वापस लेकर इंदौर लौट रहा था, तभी गुना की रूठियाई पुलिस चौकी के पास स्थित टोल नाके पर पुलिस ने चैकिंग के दौरान गाड़ी को रोक लिया था, लेकिन जब हमने बताया कि हमारा पैसा एक नंबर का है तो हमें जाने दिया। उन्होंने इंदौर पहुंचकर देखा तो बैग में 8.50 लाख रुपए थे। पैसे गिनने में गलती हो गई थी, इसलिए वापस गुना पहुंचकर एसपी अंकित सोनी से मुलाकात की और एक लाख रुपए गायब होने के बारे में बताया। एसपी साहब ने कहा कि लिखित शिकायत कर दो, जांच करवाते हैं। लेकिन हमने कहा कि एक बार दोबारा रूठियाई थाने में जाकर देखते हैं, कहीं पैसा किसी ने निकाला तो नहीं। रूठियाई थाने पहुंचकर पता किया तो पुलिस की कोई गलती नहीं थी, बल्कि बैग में शुरू से ही एक लाख रुपए कम थे। हमने किसी भी तरह की शिकायत नहीं की और वहां से वापस आ गए। (भास्कर ने 22 मार्च को ही बता दिया था कि किस पुलिसकर्मी की क्या भूमिका रही।) इससे जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… 1. गुना हवाला कांड: जांच में चार पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप गुना में मार्च महीने में हुए हवाला कांड में जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट IG को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में चार पुलिसकर्मियों का आचरण संदिग्ध पाया गया है। इसके बाद SP ने चारों पुलिसकर्मियों पर आरोप तय कर उन्हें आरोप पत्र सौंप दिए हैं। इस मामले में अब विभागीय जांच होगी। पढ़ें पूरी खबर… 2. पुलिस ने 1 करोड़ पकड़े...20 लाख लेकर छोड़ा, 4 सस्पेंड एमपी के गुना में सिवनी जैसा एक और संदिग्ध हवाला कांड सामने आया है। आरोप है कि पुलिस ने गुजरात के एक जीरा कारोबारी की कार से करीब 1 करोड़ रुपए कैश पकड़े, लेकिन 20 लाख रुपए रखकर उसे छोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर…