खरवे गांव में पसरा खौफ:शांति पूजा कराने वाले बैगा की भी जा चुकी जान
सिद्धार्थ श्रीवासन/शेखर वर्मा की रिपोर्ट बलौदाबाजार जिले का कसडोल ब्लॉक का खरवे गांव इन दिनों खौफ के साए में है। यहां 6 फरवरी से 14 मई 2026 के बीच महज 98 दिनों के भीतर 8 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। रहस्यमयी मौतों के इस सिलसिले से डरे ग्रामीणों की मांग पर पुलिस ने 7 शवों को कब्र से निकलवाकर पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। मौतों की असली वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन गांव में तंत्र-मंत्र, गड़े धन और मानव बलि जैसी अफवाहों का बाजार गर्म है। ग्रामीणों का सनसनीखेज दावा है कि जमीन में दबे कथित खजाने को हासिल करने के लिए यहां ‘21 नरबलि’ देने की साजिश रची गई थी। हैरानी की बात यह है कि गांव में शांति पूजा कराने वाले मुख्य ‘बैगा’ की भी इसी दौरान जान गई। इस खौफनाक सच का पता लगाने दैनिक भास्कर की टीम जब जमीनी हकीकत जानने खरवे गांव पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। मरने वाले कई लोगों ने मौत से ठीक पहले शराब पी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह शराब या तो सीधे तौर पर या फिर किसी अन्य माध्यम से गांव के ही रामसहाय जायसवाल द्वारा उपलब्ध कराई गई थी। कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर पी शराब, फिर गई जान: गांव में सबसे ज्यादा चर्चा शांति पूजा कराने वाले गजानंद मांझी की मौत की है। उनकी पत्नी साधिन बाई मांझी ने बताया, ‘दोपहर में उनके पति घर पर सो रहे थे, तभी मोहनलाल जायसवाल शराब लेकर पहुंचे और उन्हें जगाया। गजानंद ने कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पी और जैसे ही रोटी का पहला निवाला खाया, वे अचानक जमीन पर गिरे। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।’ शांति पूजा में टोटके के दौरान 3 बकरे, 1 सुअर व अन्य की बलि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जब लगातार 4 मौतें हुईं, तो खौफ दूर करने के लिए बाकायदा एक ‘शांति पूजा’ आयोजित की गई थी। इस पूजा में 3 बकरों, 1 सुअर और कई मुर्गों की बलि दी गई। लेकिन अंधविश्वास का यह टोटका भी नाकाम रहा और मौतों का सिलसिला नहीं रुका। हैरान करने वाली बात यह है कि गांव में शांति पूजा कराने वाले मुख्य ‘बैगा’ (तांत्रिक/पुजारी) से लेकर सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों तक की इस रहस्यमयी चक्रव्यूह में जान चली गई। ...और जब कार्तिक जिंदा बच गया, तो जुड़ने लगीं कड़ियां
लगातार हो रही मौतों के बाद जब गांव के मेहतरू साहू की भी जान चली गई, तो ग्रामीणों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इसी बैठक में कड़ियां तब जुड़ीं जब ‘कार्तिक कुम्हार’ का मामला सामने आया। कार्तिक उन चंद खुशकिस्मत लोगों में से है जो इस संदिग्ध जहर का शिकार होने के बाद भी जिंदा बच गया। कार्तिक ने बैठक में बताया, “14 अप्रैल को मेरे दोस्त प्रमोद साहू ने मुझे शराब दी थी। शराब पीते ही मुझे उसका स्वाद बेहद कड़वा लगा। कुछ ही मिनटों में मेरे पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया, उल्टियां होने लगीं और मैं बेहोश हो गया। प्रमोद ने खुद वह शराब नहीं पी थी, सिर्फ मुझे दी थी।” कार्तिक के इस बयान और अन्य मृतकों के लक्षणों (सिम्पटम्स) के हूबहू मिलने के बाद ग्रामीणों का शक रामसहाय जायसवाल पर गहरा गया, जिसके बाद पुलिस से जांच की मांग की गई। गजानंद को दी शराब इस मामले में मोहनलाल जायसवाल ने कबूल किया है कि गजानंद को पिलाई गई वह शराब उसे रामसहाय जायसवाल ने ही अपनी दुकान पर बुलाकर दी थी। कामता प्रसाद का दावा
मृतक छत्तूराम साहू के भाई और विनोद साहू के चाचा कामता प्रसाद ने सीधे आरोप लगाया कि रामसहाय द्वारा दी गई शराब पीने के कुछ ही देर बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। उन्होंने ही ‘21 बलि’ की थ्योरी का जिक्र करते हुए कहा कि 8 लोग मारे जा चुके हैं और 13 अब भी निशाने पर हैं। आरोपी के घर पसरा सन्नाटा, बेटा बोला- ‘पिता फरार नहीं हैं’
दैनिक भास्कर की टीम रामसहाय जायसवाल के घर और दुकान पहुंची, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं मिले। उनके बेटे रुद्रेश्वर ने भास्कर टीम से कहा, मेरे पिता फरार नहीं हैं। पुलिस ने मेरे पिता का बयान दर्ज कर उनका मोबाइल जब्त कर लिया है। पिता सभी आरोपों को गलत बता रहे हैं।
सिद्धार्थ श्रीवासन/शेखर वर्मा की रिपोर्ट बलौदाबाजार जिले का कसडोल ब्लॉक का खरवे गांव इन दिनों खौफ के साए में है। यहां 6 फरवरी से 14 मई 2026 के बीच महज 98 दिनों के भीतर 8 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। रहस्यमयी मौतों के इस सिलसिले से डरे ग्रामीणों की मांग पर पुलिस ने 7 शवों को कब्र से निकलवाकर पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। मौतों की असली वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन गांव में तंत्र-मंत्र, गड़े धन और मानव बलि जैसी अफवाहों का बाजार गर्म है। ग्रामीणों का सनसनीखेज दावा है कि जमीन में दबे कथित खजाने को हासिल करने के लिए यहां ‘21 नरबलि’ देने की साजिश रची गई थी। हैरानी की बात यह है कि गांव में शांति पूजा कराने वाले मुख्य ‘बैगा’ की भी इसी दौरान जान गई। इस खौफनाक सच का पता लगाने दैनिक भास्कर की टीम जब जमीनी हकीकत जानने खरवे गांव पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। मरने वाले कई लोगों ने मौत से ठीक पहले शराब पी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह शराब या तो सीधे तौर पर या फिर किसी अन्य माध्यम से गांव के ही रामसहाय जायसवाल द्वारा उपलब्ध कराई गई थी। कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर पी शराब, फिर गई जान: गांव में सबसे ज्यादा चर्चा शांति पूजा कराने वाले गजानंद मांझी की मौत की है। उनकी पत्नी साधिन बाई मांझी ने बताया, ‘दोपहर में उनके पति घर पर सो रहे थे, तभी मोहनलाल जायसवाल शराब लेकर पहुंचे और उन्हें जगाया। गजानंद ने कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पी और जैसे ही रोटी का पहला निवाला खाया, वे अचानक जमीन पर गिरे। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।’ शांति पूजा में टोटके के दौरान 3 बकरे, 1 सुअर व अन्य की बलि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जब लगातार 4 मौतें हुईं, तो खौफ दूर करने के लिए बाकायदा एक ‘शांति पूजा’ आयोजित की गई थी। इस पूजा में 3 बकरों, 1 सुअर और कई मुर्गों की बलि दी गई। लेकिन अंधविश्वास का यह टोटका भी नाकाम रहा और मौतों का सिलसिला नहीं रुका। हैरान करने वाली बात यह है कि गांव में शांति पूजा कराने वाले मुख्य ‘बैगा’ (तांत्रिक/पुजारी) से लेकर सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों तक की इस रहस्यमयी चक्रव्यूह में जान चली गई। ...और जब कार्तिक जिंदा बच गया, तो जुड़ने लगीं कड़ियां
लगातार हो रही मौतों के बाद जब गांव के मेहतरू साहू की भी जान चली गई, तो ग्रामीणों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इसी बैठक में कड़ियां तब जुड़ीं जब ‘कार्तिक कुम्हार’ का मामला सामने आया। कार्तिक उन चंद खुशकिस्मत लोगों में से है जो इस संदिग्ध जहर का शिकार होने के बाद भी जिंदा बच गया। कार्तिक ने बैठक में बताया, “14 अप्रैल को मेरे दोस्त प्रमोद साहू ने मुझे शराब दी थी। शराब पीते ही मुझे उसका स्वाद बेहद कड़वा लगा। कुछ ही मिनटों में मेरे पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया, उल्टियां होने लगीं और मैं बेहोश हो गया। प्रमोद ने खुद वह शराब नहीं पी थी, सिर्फ मुझे दी थी।” कार्तिक के इस बयान और अन्य मृतकों के लक्षणों (सिम्पटम्स) के हूबहू मिलने के बाद ग्रामीणों का शक रामसहाय जायसवाल पर गहरा गया, जिसके बाद पुलिस से जांच की मांग की गई। गजानंद को दी शराब इस मामले में मोहनलाल जायसवाल ने कबूल किया है कि गजानंद को पिलाई गई वह शराब उसे रामसहाय जायसवाल ने ही अपनी दुकान पर बुलाकर दी थी। कामता प्रसाद का दावा
मृतक छत्तूराम साहू के भाई और विनोद साहू के चाचा कामता प्रसाद ने सीधे आरोप लगाया कि रामसहाय द्वारा दी गई शराब पीने के कुछ ही देर बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। उन्होंने ही ‘21 बलि’ की थ्योरी का जिक्र करते हुए कहा कि 8 लोग मारे जा चुके हैं और 13 अब भी निशाने पर हैं। आरोपी के घर पसरा सन्नाटा, बेटा बोला- ‘पिता फरार नहीं हैं’
दैनिक भास्कर की टीम रामसहाय जायसवाल के घर और दुकान पहुंची, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं मिले। उनके बेटे रुद्रेश्वर ने भास्कर टीम से कहा, मेरे पिता फरार नहीं हैं। पुलिस ने मेरे पिता का बयान दर्ज कर उनका मोबाइल जब्त कर लिया है। पिता सभी आरोपों को गलत बता रहे हैं।