दुर्ग रेंज में 270 से ज्यादा दोषमुक्ति मामलों की समीक्षा:IG ने जांच गुणवत्ता सुधारने दिए सख्त निर्देश, फोरेंसिक सहयोग-अभियोजन समन्वय पर दिया जोर
दुर्ग रेंज में 270 से ज्यादा दोषमुक्ति मामलों की समीक्षा:IG ने जांच गुणवत्ता सुधारने दिए सख्त निर्देश, फोरेंसिक सहयोग-अभियोजन समन्वय पर दिया जोर
दुर्ग रेंज में शुक्रवार को IG रामगोपाल गर्ग की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। इसमें हाल के सालों के 270 से अधिक दोषमुक्ति मामलों की गहन पड़ताल की गई। बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य गंभीर अपराधों में दोषमुक्ति के कारणों को समझना और भविष्य में दोषसिद्धि प्रतिशत बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था। रेंज कार्यालय के सभागार में आयोजित इस बैठक में महिला-बाल अपराध, पॉक्सो एक्ट, हत्या, हत्या का प्रयास, NDPS केस और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े उन मामलों का बिंदुवार विश्लेषण किया गया। जिनमें अदालतों ने आरोपियों को बरी कर दिया था। दोषमुक्ति को विवेचना की कमजोरी बताया IG ने कहा कि दोषमुक्ति केवल अदालत का निर्णय नहीं, बल्कि यह विवेचना, साक्ष्य संकलन और अभियोजन समन्वय की कमजोरियों का संकेत है। उन्होंने सभी विवेचकों को मजबूत फोरेंसिक सहयोग लेने, केस डायरी की गुणवत्ता सुधारने और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों को त्रुटिरहित बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए। फोरेंसिक सहयोग और अभियोजन समन्वय पर जोर उन्होंने पुलिस और अभियोजन के बीच मजबूत समन्वय को अत्यंत आवश्यक बताया। आईजी ने कहा कि यदि साक्ष्य कोर्ट में अपनी विश्वसनीयता सिद्ध नहीं कर पाते, तो पूरी जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषसिद्धि प्रतिशत बढ़ाना पुलिस की कार्यकुशलता और विश्वसनीयता का सीधा संकेतक है, इसलिए हर केस में पेशेवर मानक अनिवार्य हैं। आदतन अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश बैठक में आदतन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई। आईजी गर्ग ने कहा कि ऐसे अपराधी समाज में भय का वातावरण बनाते हैं, इसलिए उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन अपराधियों को जमानत मिल चुकी है और वे दोबारा अपराध करते पकड़े जा रहे हैं, उनकी जमानत निरस्तीकरण के लिए तत्काल न्यायालय में पहल की जाए। ऐसे अपराधियों की लगातार निगरानी, फील्ड इनपुट और नियमित रिपोर्ट तैयार कर रेंज कार्यालय भेजी जाए।
दुर्ग रेंज में शुक्रवार को IG रामगोपाल गर्ग की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। इसमें हाल के सालों के 270 से अधिक दोषमुक्ति मामलों की गहन पड़ताल की गई। बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य गंभीर अपराधों में दोषमुक्ति के कारणों को समझना और भविष्य में दोषसिद्धि प्रतिशत बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था। रेंज कार्यालय के सभागार में आयोजित इस बैठक में महिला-बाल अपराध, पॉक्सो एक्ट, हत्या, हत्या का प्रयास, NDPS केस और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े उन मामलों का बिंदुवार विश्लेषण किया गया। जिनमें अदालतों ने आरोपियों को बरी कर दिया था। दोषमुक्ति को विवेचना की कमजोरी बताया IG ने कहा कि दोषमुक्ति केवल अदालत का निर्णय नहीं, बल्कि यह विवेचना, साक्ष्य संकलन और अभियोजन समन्वय की कमजोरियों का संकेत है। उन्होंने सभी विवेचकों को मजबूत फोरेंसिक सहयोग लेने, केस डायरी की गुणवत्ता सुधारने और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों को त्रुटिरहित बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए। फोरेंसिक सहयोग और अभियोजन समन्वय पर जोर उन्होंने पुलिस और अभियोजन के बीच मजबूत समन्वय को अत्यंत आवश्यक बताया। आईजी ने कहा कि यदि साक्ष्य कोर्ट में अपनी विश्वसनीयता सिद्ध नहीं कर पाते, तो पूरी जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषसिद्धि प्रतिशत बढ़ाना पुलिस की कार्यकुशलता और विश्वसनीयता का सीधा संकेतक है, इसलिए हर केस में पेशेवर मानक अनिवार्य हैं। आदतन अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश बैठक में आदतन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई। आईजी गर्ग ने कहा कि ऐसे अपराधी समाज में भय का वातावरण बनाते हैं, इसलिए उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन अपराधियों को जमानत मिल चुकी है और वे दोबारा अपराध करते पकड़े जा रहे हैं, उनकी जमानत निरस्तीकरण के लिए तत्काल न्यायालय में पहल की जाए। ऐसे अपराधियों की लगातार निगरानी, फील्ड इनपुट और नियमित रिपोर्ट तैयार कर रेंज कार्यालय भेजी जाए।