बदायूं में कड़ाके की ठंड, न्यूनतम पारा 7 डिग्री:सर्द हवाओं और कोहरे से गलन बढ़ी, लो विजिबिलिटी से थमे पहिए

बदायूं में नए साल के पहले दिन भी कड़ाके की सर्दी और घना कोहरा छाया रहा। बीती रात न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। ठंडी हवाओं और घने कोहरे के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। घने कोहरे के कारण सड़कों पर दृश्यता (विजिबिलिटी) काफी कम रही, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हाईवे और शहरी सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी रही। कड़ाके की ठंड के चलते लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले, जिससे बाजारों में भी चहल-पहल कम दिखी। इस मौसम का असर अब किसानों की फसलों पर भी दिखने लगा है। लगातार पड़ रही ठंड और कोहरे से आलू और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। खेतों में नमी और पाले का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी सर्दी और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम है। इससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि गतिविधियों पर भी असर जारी रह सकता है।

बदायूं में कड़ाके की ठंड, न्यूनतम पारा 7 डिग्री:सर्द हवाओं और कोहरे से गलन बढ़ी, लो विजिबिलिटी से थमे पहिए
बदायूं में नए साल के पहले दिन भी कड़ाके की सर्दी और घना कोहरा छाया रहा। बीती रात न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। ठंडी हवाओं और घने कोहरे के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। घने कोहरे के कारण सड़कों पर दृश्यता (विजिबिलिटी) काफी कम रही, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हाईवे और शहरी सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी रही। कड़ाके की ठंड के चलते लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले, जिससे बाजारों में भी चहल-पहल कम दिखी। इस मौसम का असर अब किसानों की फसलों पर भी दिखने लगा है। लगातार पड़ रही ठंड और कोहरे से आलू और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। खेतों में नमी और पाले का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी सर्दी और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम है। इससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि गतिविधियों पर भी असर जारी रह सकता है।