कड़ाके की ठंड में महंत की 41 दिवसीय जलधारा तपस्या:शेरनगर शिव मंदिर में जगत कल्याण के लिए कठोर साधना, 18 जनवरी को होगा समापन

मुजफ्फरनगर के शेरनगर स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ शिव मंदिर में महंत कन्हैया गिरी 41 दिवसीय जलधारा तपस्या कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद वे शीतल जल की धारा के नीचे बैठकर क्षेत्र की शांति, समृद्धि और जगत कल्याण की कामना कर रहे हैं। यह कठोर साधना इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र बनी हुई है। महंत स्वतंत्र गिरी के शिष्य महंत कन्हैया गिरी द्वारा की जा रही यह तपस्या 41 दिनों तक चलेगी। इसकी शुरुआत 11 घड़ों से हुई थी, जो अब बढ़कर 75 घड़ों तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण ऋषि पाल के अनुसार, प्रतिदिन 2 से 3 अतिरिक्त घड़े जोड़े जा रहे हैं। यह साधना कुल 108 घड़ों पर समाप्त होगी, जिसके बाद यह अपने अंतिम चरण में प्रवेश करेगी। पहले 2 तस्वीरें देखिए... तपस्या का समापन 18 जनवरी को होगा। इससे एक दिन पहले, 17 जनवरी को भगवान शिव का भव्य जागरण आयोजित किया जाएगा। वहीं, 18 जनवरी की सुबह गांव में एक विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। श्रद्धालु मोनू सैनी ने बताया कि महंत कन्हैया गिरी की यह तपस्या भगवान शिव की गहन साधना से प्रेरित है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार और समाज कल्याण है। गांववासियों के अनुसार, शेरनगर में पहली बार किसी संन्यासी द्वारा इतनी कठोर जलधारा तपस्या की जा रही है। निकटवर्ती गांव बिलासपुर से आए श्रद्धालु राजपाल ने जानकारी दी कि प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। दूर-दराज से लोग इस अलौकिक साधना के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। साधना के साथ-साथ दिनभर धार्मिक सत्संग, भजन-कीर्तन और अन्य विनयपूर्ण गतिविधियां भी चल रही हैं, जो भक्तों को आकर्षित कर रही हैं। महंत कन्हैया गिरी महाराज ने बताया कि वे जूना अखाड़े से संबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तपस्या पूरी तरह से भगवान शिव और सनातन धर्म को समर्पित है।

कड़ाके की ठंड में महंत की 41 दिवसीय जलधारा तपस्या:शेरनगर शिव मंदिर में जगत कल्याण के लिए कठोर साधना, 18 जनवरी को होगा समापन
मुजफ्फरनगर के शेरनगर स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ शिव मंदिर में महंत कन्हैया गिरी 41 दिवसीय जलधारा तपस्या कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद वे शीतल जल की धारा के नीचे बैठकर क्षेत्र की शांति, समृद्धि और जगत कल्याण की कामना कर रहे हैं। यह कठोर साधना इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र बनी हुई है। महंत स्वतंत्र गिरी के शिष्य महंत कन्हैया गिरी द्वारा की जा रही यह तपस्या 41 दिनों तक चलेगी। इसकी शुरुआत 11 घड़ों से हुई थी, जो अब बढ़कर 75 घड़ों तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण ऋषि पाल के अनुसार, प्रतिदिन 2 से 3 अतिरिक्त घड़े जोड़े जा रहे हैं। यह साधना कुल 108 घड़ों पर समाप्त होगी, जिसके बाद यह अपने अंतिम चरण में प्रवेश करेगी। पहले 2 तस्वीरें देखिए... तपस्या का समापन 18 जनवरी को होगा। इससे एक दिन पहले, 17 जनवरी को भगवान शिव का भव्य जागरण आयोजित किया जाएगा। वहीं, 18 जनवरी की सुबह गांव में एक विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। श्रद्धालु मोनू सैनी ने बताया कि महंत कन्हैया गिरी की यह तपस्या भगवान शिव की गहन साधना से प्रेरित है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार और समाज कल्याण है। गांववासियों के अनुसार, शेरनगर में पहली बार किसी संन्यासी द्वारा इतनी कठोर जलधारा तपस्या की जा रही है। निकटवर्ती गांव बिलासपुर से आए श्रद्धालु राजपाल ने जानकारी दी कि प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। दूर-दराज से लोग इस अलौकिक साधना के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। साधना के साथ-साथ दिनभर धार्मिक सत्संग, भजन-कीर्तन और अन्य विनयपूर्ण गतिविधियां भी चल रही हैं, जो भक्तों को आकर्षित कर रही हैं। महंत कन्हैया गिरी महाराज ने बताया कि वे जूना अखाड़े से संबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तपस्या पूरी तरह से भगवान शिव और सनातन धर्म को समर्पित है।