नन्हे शावक को मुंह में दबाकर ले जाती दिखी बाघिन:इंदौर जू में बढ़ा बाघों का कुनबा, सफेद बाघिन 'पहर' ने 3 शावकों को दिया जन्म
नन्हे शावक को मुंह में दबाकर ले जाती दिखी बाघिन:इंदौर जू में बढ़ा बाघों का कुनबा, सफेद बाघिन 'पहर' ने 3 शावकों को दिया जन्म
इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में बाघों के कुनबे में इजाफा हो गया। बाघिन पहर ने तीन शावकों को जन्म दिया है। बुधवार को बाघिन एक शावक को मुंह में दबाकर ले जाते हुए नजर आई। चिड़ियाघर में जन्मे तीन में से दो सफेद शावक पर काले रंग की धारियां हैं और बाकी दोनों पर पीले व काले रंग की धारियां हैं। बता दें कि इंदौर प्रदेश का ऐसा चिड़ियाघर है जहां पीले, सफेद और काले तीनों रंग के बाघ हैं। चिड़ियाघर के अनुसार बाघिन के गर्भकाल के दौरान उसकी विशेष निगरानी की जा रही थी। अनुमान था कि मेलानिस्टिक (ब्लैक) टाइगर से मेटिंग के चलते ब्लैकधारी शावकों का जन्म हो सकता है, लेकिन बाघिन ने दो सफेद और एक सामान्य रंग के शावक को जन्म दिया है। चिड़ियाघर प्रबंधन द्वारा बाघिन और शावकों की निगरानी की जा रही है। फिलहाल बाघिन ही शावकों की देखभाल कर रही है। 10 से 15 दिन में शावकों की गतिविधियां दर्शकों को देखने को मिल सकती हैं, जो प्राणी संग्रहालय के लिए आकर्षण होंगी। इस जन्म के साथ ही चिड़ियाघर में बाघों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। यह ‘पहर’ की दूसरी संतान है। इससे पहले 24 फरवरी 2025 को भी उसने तीन शावकों को जन्म दिया था। उसी दौरान शेरनी ‘सुंदरी’ ने भी दो शावक दिए थे। ब्लैक टाइगर के जन्म की थी उम्मीद सितंबर 2025 में मेलानिस्टिक (ब्लैक) टाइगर की व्हाइट फीमेल टाइगर से मेटिंग कराई गई थी। इससे पूरी तरह काले रंग के टाइगर के जन्म की संभावना जताई जा रही थी। यदि ऐसा होता तो यह देश में अपनी तरह का एक अनोखा प्रयोग होता और संभवतः भारत का पहला पूर्णतः ब्लैक टाइगर होता। शावक पूरी तरह स्वस्थ चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार 'पहर' ने दो से तीन दिन पहले शावकों को जन्म दिया है। बाघिन और शावकों को एकांत में रखा है और सुरक्षा कारणों से किसी को उनके पास जाने की अनुमति नहीं है। अब तक दो से तीन शावक दिखाई दिए हैं। बाघिन और शावक दोनों ही पूरी तरह स्वस्थ प्रतीत हो रहे हैं। 2013 से 2021 तक नहीं था व्हाइट टाइगर व्हाइट टाइगर लाने के लिए चिड़ियाघर को खास प्रयास करने पड़े थे। 2013 के बाद से चिड़ियाघर में व्हाइट टाइगर नहीं था। इसके बाद सेंट्रल जू अथॉरिटी की अनुमति से 2021 में नंदन कानन जूलॉजिकल पार्क से एक सफेद बाघ मिला था। जैनेटिक डिफेक्ट के कारण आती हैं घनी काली धारियां घनी काली धारी वाले टाइगर का औपचारिक नाम मेलेनिस्टिक टाइगर है। आमतौर पर टाइगर के शरीर पर पीली या सफेद चमड़ी के ऊपर पतली काली धारियां होती हैं, जो शिकार करते समय झाड़ियों में छिपने में मदद करती हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक रेसेसिव जीन या मेलेनिन के कारण ये धारियां बनती हैं। जिस टाइगर की चमड़ी सफेद हो और काली धारियां बहुत घनी हों वह वाइट मेलेनिस्टिक टाइगर होता है। जिस टाइगर की चमड़ी पीली हो, लेकिन काली धारियां घनी हों वह यलो मेलेनिस्टिक टाइगर होता है।
इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में बाघों के कुनबे में इजाफा हो गया। बाघिन पहर ने तीन शावकों को जन्म दिया है। बुधवार को बाघिन एक शावक को मुंह में दबाकर ले जाते हुए नजर आई। चिड़ियाघर में जन्मे तीन में से दो सफेद शावक पर काले रंग की धारियां हैं और बाकी दोनों पर पीले व काले रंग की धारियां हैं। बता दें कि इंदौर प्रदेश का ऐसा चिड़ियाघर है जहां पीले, सफेद और काले तीनों रंग के बाघ हैं। चिड़ियाघर के अनुसार बाघिन के गर्भकाल के दौरान उसकी विशेष निगरानी की जा रही थी। अनुमान था कि मेलानिस्टिक (ब्लैक) टाइगर से मेटिंग के चलते ब्लैकधारी शावकों का जन्म हो सकता है, लेकिन बाघिन ने दो सफेद और एक सामान्य रंग के शावक को जन्म दिया है। चिड़ियाघर प्रबंधन द्वारा बाघिन और शावकों की निगरानी की जा रही है। फिलहाल बाघिन ही शावकों की देखभाल कर रही है। 10 से 15 दिन में शावकों की गतिविधियां दर्शकों को देखने को मिल सकती हैं, जो प्राणी संग्रहालय के लिए आकर्षण होंगी। इस जन्म के साथ ही चिड़ियाघर में बाघों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। यह ‘पहर’ की दूसरी संतान है। इससे पहले 24 फरवरी 2025 को भी उसने तीन शावकों को जन्म दिया था। उसी दौरान शेरनी ‘सुंदरी’ ने भी दो शावक दिए थे। ब्लैक टाइगर के जन्म की थी उम्मीद सितंबर 2025 में मेलानिस्टिक (ब्लैक) टाइगर की व्हाइट फीमेल टाइगर से मेटिंग कराई गई थी। इससे पूरी तरह काले रंग के टाइगर के जन्म की संभावना जताई जा रही थी। यदि ऐसा होता तो यह देश में अपनी तरह का एक अनोखा प्रयोग होता और संभवतः भारत का पहला पूर्णतः ब्लैक टाइगर होता। शावक पूरी तरह स्वस्थ चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार 'पहर' ने दो से तीन दिन पहले शावकों को जन्म दिया है। बाघिन और शावकों को एकांत में रखा है और सुरक्षा कारणों से किसी को उनके पास जाने की अनुमति नहीं है। अब तक दो से तीन शावक दिखाई दिए हैं। बाघिन और शावक दोनों ही पूरी तरह स्वस्थ प्रतीत हो रहे हैं। 2013 से 2021 तक नहीं था व्हाइट टाइगर व्हाइट टाइगर लाने के लिए चिड़ियाघर को खास प्रयास करने पड़े थे। 2013 के बाद से चिड़ियाघर में व्हाइट टाइगर नहीं था। इसके बाद सेंट्रल जू अथॉरिटी की अनुमति से 2021 में नंदन कानन जूलॉजिकल पार्क से एक सफेद बाघ मिला था। जैनेटिक डिफेक्ट के कारण आती हैं घनी काली धारियां घनी काली धारी वाले टाइगर का औपचारिक नाम मेलेनिस्टिक टाइगर है। आमतौर पर टाइगर के शरीर पर पीली या सफेद चमड़ी के ऊपर पतली काली धारियां होती हैं, जो शिकार करते समय झाड़ियों में छिपने में मदद करती हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक रेसेसिव जीन या मेलेनिन के कारण ये धारियां बनती हैं। जिस टाइगर की चमड़ी सफेद हो और काली धारियां बहुत घनी हों वह वाइट मेलेनिस्टिक टाइगर होता है। जिस टाइगर की चमड़ी पीली हो, लेकिन काली धारियां घनी हों वह यलो मेलेनिस्टिक टाइगर होता है।