एक साल बाद जेल से छूटे कवासी लखमा:पत्नी बोलीं- पति की रिहाई की चिंता में हो गई दुबली
एक साल बाद जेल से छूटे कवासी लखमा:पत्नी बोलीं- पति की रिहाई की चिंता में हो गई दुबली
प्रदेश के 3200 करोड़ के आबकारी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा बुधवार को जेल से छूट गए। बाहर आते ही कार्यकर्ताओं-नेताओं ने स्वागत किया। फिर लखमा ने गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और खुली जीप में धरमपुरा स्थित विधायक निवास के लिए रवाना हुए। लखमा ने कहा- ‘एक साल बाद जेल से बाहर आने का मौका मिला है। इसके लिए मैं सुप्रीम कोर्ट को बधाई देता हूं। मैं गरीब आदिवासी हूं, बस्तर के जल-जंगल-जमीन के मुद्दे उठाता रहा हूं। जेल में रहने के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने टीवी और अखबारों में मेरे समर्थन में बयान दिया। इसके लिए उनका धन्यवाद।’ मैं स्पीकर डॉ. रमन सिंह से मिलकर आग्रह करूंगा कि मुझे विधानसभा में अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। इधर, जेल से रिहाई पर कवासी की पत्नी बुधरी ने कहा कि पति की रिहाई कब होगी, ये सोच कर दुबली हो गईं हूं। वहीं लखमा के बेटे हरीश ने कहा, सत्य की जीत हुई। न्यायालय ने जो भी निर्देश दिया है, उसका हम पालन करेंगे। जमानत के दौरान शर्तों का करना होगा पालन
जमानत की शर्तों के तहत लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, हालांकि कोर्ट में पेशी के दौरान वे छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। बता दें कि ईडी ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। ईडी ने रिमांड पर उनसे 7 दिन पूछताछ की थी। इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था। उसके बाद से ही कवासी लखमा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। लखमा बलि का बकरा बने
भूपेश के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में शराब, डीएमएफ, कोयला घोटाला समेत कई कारनामे हुए। पर, कवासी को बलि का बकरा बना दिया गया है।
- विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री वे बलि का बकरा तो दोषी कौन
अगर कवासी लखमा बलि का बकरा हैं, तो फिर दोषी कौन है? क्या भाजपा ये कह रही है कि लखमा निर्दोष हैं? ऐसा है तो भाजपा को माफी मांगनी चाहिए।’
-दीपक बैज, पीसीसी चीफ
भास्कर एक्सपर्ट - उमेश शर्मा, अपर सचिव, मध्यप्रदेश विधानसभा विधानसभा की बैठक में शामिल होना मुश्किल सुप्रीम कोर्ट की जमानत शर्तों के कारण विधायक कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। इस आदेश के चलते वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकते। नियमानुसार विधानसभा का कोई भी विशेषाधिकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त, शिथिल अथवा अप्रभावी नहीं कर सकता। यदि लखमा विशेषाधिकार का हवाला देकर विधानसभा की बैठक में शामिल होना भी चाहें, तब भी यह संभव नहीं है। इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। केवल न्यायालय से राहत मिलने की स्थिति में ही उनकी उपस्थिति संभव हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यदि वे विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन देकर अनुमति की मांग करते हैं, तो भी अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। व्यवहारिक रूप से ऐसा होना अत्यंत कठिन है।
यदि लखमा अयोग्यता के आधार पर भी बैठक में शामिल होने की बात करते हैं, तो वह भी संभव नहीं है। नियमानुसार कोई विधायक यदि विधानसभा की लगातार 60 बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो उसे अयोग्य किया जा सकता है। किंतु जब अनुपस्थिति न्यायालय के आदेश के कारण होती है, तो इसकी सूचना संबंधित विधानसभा को दी जाती है, जिससे अयोग्यता संबंधी प्रावधान शिथिल हो जाता है।
प्रदेश के 3200 करोड़ के आबकारी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा बुधवार को जेल से छूट गए। बाहर आते ही कार्यकर्ताओं-नेताओं ने स्वागत किया। फिर लखमा ने गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और खुली जीप में धरमपुरा स्थित विधायक निवास के लिए रवाना हुए। लखमा ने कहा- ‘एक साल बाद जेल से बाहर आने का मौका मिला है। इसके लिए मैं सुप्रीम कोर्ट को बधाई देता हूं। मैं गरीब आदिवासी हूं, बस्तर के जल-जंगल-जमीन के मुद्दे उठाता रहा हूं। जेल में रहने के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने टीवी और अखबारों में मेरे समर्थन में बयान दिया। इसके लिए उनका धन्यवाद।’ मैं स्पीकर डॉ. रमन सिंह से मिलकर आग्रह करूंगा कि मुझे विधानसभा में अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। इधर, जेल से रिहाई पर कवासी की पत्नी बुधरी ने कहा कि पति की रिहाई कब होगी, ये सोच कर दुबली हो गईं हूं। वहीं लखमा के बेटे हरीश ने कहा, सत्य की जीत हुई। न्यायालय ने जो भी निर्देश दिया है, उसका हम पालन करेंगे। जमानत के दौरान शर्तों का करना होगा पालन
जमानत की शर्तों के तहत लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, हालांकि कोर्ट में पेशी के दौरान वे छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। बता दें कि ईडी ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। ईडी ने रिमांड पर उनसे 7 दिन पूछताछ की थी। इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था। उसके बाद से ही कवासी लखमा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। लखमा बलि का बकरा बने
भूपेश के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में शराब, डीएमएफ, कोयला घोटाला समेत कई कारनामे हुए। पर, कवासी को बलि का बकरा बना दिया गया है।
- विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री वे बलि का बकरा तो दोषी कौन
अगर कवासी लखमा बलि का बकरा हैं, तो फिर दोषी कौन है? क्या भाजपा ये कह रही है कि लखमा निर्दोष हैं? ऐसा है तो भाजपा को माफी मांगनी चाहिए।’
-दीपक बैज, पीसीसी चीफ
भास्कर एक्सपर्ट - उमेश शर्मा, अपर सचिव, मध्यप्रदेश विधानसभा विधानसभा की बैठक में शामिल होना मुश्किल सुप्रीम कोर्ट की जमानत शर्तों के कारण विधायक कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। इस आदेश के चलते वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकते। नियमानुसार विधानसभा का कोई भी विशेषाधिकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त, शिथिल अथवा अप्रभावी नहीं कर सकता। यदि लखमा विशेषाधिकार का हवाला देकर विधानसभा की बैठक में शामिल होना भी चाहें, तब भी यह संभव नहीं है। इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। केवल न्यायालय से राहत मिलने की स्थिति में ही उनकी उपस्थिति संभव हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यदि वे विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन देकर अनुमति की मांग करते हैं, तो भी अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। व्यवहारिक रूप से ऐसा होना अत्यंत कठिन है।
यदि लखमा अयोग्यता के आधार पर भी बैठक में शामिल होने की बात करते हैं, तो वह भी संभव नहीं है। नियमानुसार कोई विधायक यदि विधानसभा की लगातार 60 बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो उसे अयोग्य किया जा सकता है। किंतु जब अनुपस्थिति न्यायालय के आदेश के कारण होती है, तो इसकी सूचना संबंधित विधानसभा को दी जाती है, जिससे अयोग्यता संबंधी प्रावधान शिथिल हो जाता है।