गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में प्रोफेसर की भर्ती पर रोक:हाईकोर्ट ने इन-हाउस विज्ञापन किया रद्द, कहा-पदोन्नति के पद पर सीधी भर्ती नियमों के खिलाफ

ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्रोफेसर पद पर भर्ती को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति के लिए निर्धारित पद को बिना तय प्रक्रिया के सीधे भर्ती में बदलना नियमों के खिलाफ है। यह फैसला डॉ. आशीष कौशल की याचिका पर आया, जो वर्ष 2005 से कॉलेज में कार्यरत हैं और 2013 से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 6 फरवरी 2026 को जारी विज्ञापन को चुनौती दी थी। पदोन्नति से भरा जाना था पद डॉ. कौशल का तर्क था कि मध्य प्रदेश स्वायत्त मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज शैक्षणिक सेवा नियम 2018 के अनुसार यह पद पदोन्नति से भरा जाना चाहिए था। हालांकि, कॉलेज ने सीधे भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी, जिससे उनके अधिकारों का हनन हुआ। कॉलेज प्रशासन ने अपनी दलील में कहा कि आरक्षण से जुड़े मामले लंबित होने के कारण अस्थायी रूप से इन-हाउस सीधी भर्ती का विकल्प अपनाया गया था। उनका कहना था कि इससे याचिकाकर्ता को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि यह प्रक्रिया केवल आंतरिक उम्मीदवारों तक सीमित थी। पदोन्नति के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया तय करना जरूरी दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने पाया कि संबंधित पद मूल रूप से पदोन्नति से भरा जाना है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पदोन्नति के लिए अब तक कोई स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में बिना प्रक्रिया तय किए पद को सीधे भर्ती में बदलना अनुचित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीधी भर्ती में फीडर कैडर के अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता, जिससे पात्र उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले पदोन्नति के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया तय करना आवश्यक है।

Apr 1, 2026 - 08:29
 0  0
गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में प्रोफेसर की भर्ती पर रोक:हाईकोर्ट ने इन-हाउस विज्ञापन किया रद्द, कहा-पदोन्नति के पद पर सीधी भर्ती नियमों के खिलाफ
ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्रोफेसर पद पर भर्ती को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति के लिए निर्धारित पद को बिना तय प्रक्रिया के सीधे भर्ती में बदलना नियमों के खिलाफ है। यह फैसला डॉ. आशीष कौशल की याचिका पर आया, जो वर्ष 2005 से कॉलेज में कार्यरत हैं और 2013 से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 6 फरवरी 2026 को जारी विज्ञापन को चुनौती दी थी। पदोन्नति से भरा जाना था पद डॉ. कौशल का तर्क था कि मध्य प्रदेश स्वायत्त मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज शैक्षणिक सेवा नियम 2018 के अनुसार यह पद पदोन्नति से भरा जाना चाहिए था। हालांकि, कॉलेज ने सीधे भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी, जिससे उनके अधिकारों का हनन हुआ। कॉलेज प्रशासन ने अपनी दलील में कहा कि आरक्षण से जुड़े मामले लंबित होने के कारण अस्थायी रूप से इन-हाउस सीधी भर्ती का विकल्प अपनाया गया था। उनका कहना था कि इससे याचिकाकर्ता को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि यह प्रक्रिया केवल आंतरिक उम्मीदवारों तक सीमित थी। पदोन्नति के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया तय करना जरूरी दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने पाया कि संबंधित पद मूल रूप से पदोन्नति से भरा जाना है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पदोन्नति के लिए अब तक कोई स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में बिना प्रक्रिया तय किए पद को सीधे भर्ती में बदलना अनुचित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीधी भर्ती में फीडर कैडर के अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता, जिससे पात्र उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले पदोन्नति के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया तय करना आवश्यक है।