जस्टिस को फोन मामले में आज फिर सुनवाई:हाईकोर्ट में पेश होंगे भाजपा विधायक संजय पाठक; गलती से डायल दलील पर कोर्ट सख्त
भाजपा विधायक संजय पाठक द्वारा जस्टिस को फोन लगाने के मामले में आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। तीन सप्ताह पहले कोर्ट में पेश होकर विधायक ने कहा था कि जस्टिस का नंबर उनसे गलती से डायल हो गया था। उन्होंने अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से छूट भी मांगी थी, लेकिन अदालत ने यह मांग खारिज कर दी थी। ऐसे में आज उन्हें अनिवार्य रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में होगी। कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को भी मामले में कोर्ट की सहायता करने की अनुमति दी है। इससे पहले हाईकोर्ट में पेशी के दौरान संजय पाठक ने मीडिया से कहा था कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। ओपन कोर्ट में जस्टिस ने किया था खुलासा पूरा विवाद 1 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने ओपन कोर्ट में कहा था कि एक विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। उस समय उनके समक्ष विधायक परिवार से जुड़े खनन मामले में दायर याचिका की सुनवाई चल रही थी। न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जस्टिस मिश्रा ने खुद को उस केस से अलग कर लिया था। इसके बाद कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने मामले में अलग याचिका दायर की। 2 अप्रैल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला है और प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना बनती है। इसके बाद विधायक संजय पाठक को नोटिस जारी किया गया था। एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में संजय पाठक ने कहा कि उनसे गलती से जस्टिस विशाल मिश्रा का नंबर डायल हो गया था और एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया गया। हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया था कि विधायक की व्यक्तिगत उपस्थिति के बिना हलफनामे पर विचार नहीं किया जाएगा। खनन कंपनी के मामले से जुड़ा विवाद मामला संजय पाठक परिवार से जुड़ी खनन कंपनियों पर कथित अवैध उत्खनन के आरोपों से जुड़ा था। इसी प्रकरण की सुनवाई जस्टिस मिश्रा की बेंच में चल रही थी। आदेश में जस्टिस मिश्रा ने लिखा था कि इस तरह का संपर्क न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, इसलिए वे मामले की सुनवाई नहीं करेंगे। बाद में हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए और पूछा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। यह खबर भी पढ़ें जस्टिस को फोन मामले में संजय पाठक हाईकोर्ट में पेश:माफी के बाद भी राहत नहीं, अगली सुनवाई 14 मई को; पेशी से छूट की मांग खारिज हाईकोर्ट जस्टिस को फोन करने के मामले पर भाजपा विधायक संजय पाठक मंगलवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। इस दौरान मीडिया ने उनसे बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर कुछ कहना उचित नहीं होगा। यहां पढ़ें पूरी खबर…
भाजपा विधायक संजय पाठक द्वारा जस्टिस को फोन लगाने के मामले में आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। तीन सप्ताह पहले कोर्ट में पेश होकर विधायक ने कहा था कि जस्टिस का नंबर उनसे गलती से डायल हो गया था। उन्होंने अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से छूट भी मांगी थी, लेकिन अदालत ने यह मांग खारिज कर दी थी। ऐसे में आज उन्हें अनिवार्य रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में होगी। कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को भी मामले में कोर्ट की सहायता करने की अनुमति दी है। इससे पहले हाईकोर्ट में पेशी के दौरान संजय पाठक ने मीडिया से कहा था कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। ओपन कोर्ट में जस्टिस ने किया था खुलासा पूरा विवाद 1 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने ओपन कोर्ट में कहा था कि एक विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। उस समय उनके समक्ष विधायक परिवार से जुड़े खनन मामले में दायर याचिका की सुनवाई चल रही थी। न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जस्टिस मिश्रा ने खुद को उस केस से अलग कर लिया था। इसके बाद कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने मामले में अलग याचिका दायर की। 2 अप्रैल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला है और प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना बनती है। इसके बाद विधायक संजय पाठक को नोटिस जारी किया गया था। एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में संजय पाठक ने कहा कि उनसे गलती से जस्टिस विशाल मिश्रा का नंबर डायल हो गया था और एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया गया। हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया था कि विधायक की व्यक्तिगत उपस्थिति के बिना हलफनामे पर विचार नहीं किया जाएगा। खनन कंपनी के मामले से जुड़ा विवाद मामला संजय पाठक परिवार से जुड़ी खनन कंपनियों पर कथित अवैध उत्खनन के आरोपों से जुड़ा था। इसी प्रकरण की सुनवाई जस्टिस मिश्रा की बेंच में चल रही थी। आदेश में जस्टिस मिश्रा ने लिखा था कि इस तरह का संपर्क न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, इसलिए वे मामले की सुनवाई नहीं करेंगे। बाद में हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए और पूछा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। यह खबर भी पढ़ें जस्टिस को फोन मामले में संजय पाठक हाईकोर्ट में पेश:माफी के बाद भी राहत नहीं, अगली सुनवाई 14 मई को; पेशी से छूट की मांग खारिज हाईकोर्ट जस्टिस को फोन करने के मामले पर भाजपा विधायक संजय पाठक मंगलवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। इस दौरान मीडिया ने उनसे बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर कुछ कहना उचित नहीं होगा। यहां पढ़ें पूरी खबर…