प्राइवेट स्कूलों को फीस डिटेल पोर्टल पर अपलोड करनी होगी:10 अप्रैल तक जानकारी नहीं दी तो होगी कार्रवाई, डुप्लीकेट किताबों रखने पर भी होगा एक्शन
सीहोर जिले में अब निजी स्कूल मनमर्जी से फीस तय नहीं कर सकेंगे। कलेक्टर बालागुरू के. ने फीस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। इसके तहत सभी निजी स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 की फीस और अन्य शुल्क की पूरी जानकारी शासन के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। कलेक्टर ने साफ कहा है कि सभी स्कूलों को 10 अप्रैल 2026 तक अपनी फीस से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इसमें ट्यूशन फीस, अन्य शुल्क और पूरी फीस संरचना शामिल रहेगी। समय पर जानकारी नहीं दी तो लगेगा जुर्माना
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो स्कूल तय समय सीमा तक जानकारी अपलोड नहीं करेंगे, उनके खिलाफ फीस विनियमन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिसकी राशि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के आधार पर तय होगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को राहत देना है। कई बार स्कूलों पर मनमानी फीस वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। अब इस व्यवस्था से फीस को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को पहले से सही जानकारी मिल सकेगी। जिला और ब्लॉक स्तर पर बनी समितियां
इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने के लिए कलेक्टर ने जिला और ब्लॉक स्तर पर समितियों का गठन किया है। ये समितियां स्कूलों की निगरानी करेंगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगी। कलेक्टर ने कुछ स्कूलों में फर्जी या डुप्लीकेट ISBN वाली किताबें चलाए जाने के मामले को भी गंभीरता से लिया है। इस पर जांच के लिए अलग से टीमें बनाई गई हैं। 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान
निर्देश दिए गए हैं कि 15 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाकर ऐसे मामलों की जांच पूरी की जाए। अगर किसी स्कूल में गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित प्रकाशक और बुक सेलर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर के इन आदेशों से साफ है कि अब शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्कूलों को नियमों के तहत काम करना होगा, वरना कार्रवाई तय है।
सीहोर जिले में अब निजी स्कूल मनमर्जी से फीस तय नहीं कर सकेंगे। कलेक्टर बालागुरू के. ने फीस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। इसके तहत सभी निजी स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 की फीस और अन्य शुल्क की पूरी जानकारी शासन के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। कलेक्टर ने साफ कहा है कि सभी स्कूलों को 10 अप्रैल 2026 तक अपनी फीस से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इसमें ट्यूशन फीस, अन्य शुल्क और पूरी फीस संरचना शामिल रहेगी। समय पर जानकारी नहीं दी तो लगेगा जुर्माना
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो स्कूल तय समय सीमा तक जानकारी अपलोड नहीं करेंगे, उनके खिलाफ फीस विनियमन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिसकी राशि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के आधार पर तय होगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को राहत देना है। कई बार स्कूलों पर मनमानी फीस वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। अब इस व्यवस्था से फीस को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को पहले से सही जानकारी मिल सकेगी। जिला और ब्लॉक स्तर पर बनी समितियां
इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने के लिए कलेक्टर ने जिला और ब्लॉक स्तर पर समितियों का गठन किया है। ये समितियां स्कूलों की निगरानी करेंगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगी। कलेक्टर ने कुछ स्कूलों में फर्जी या डुप्लीकेट ISBN वाली किताबें चलाए जाने के मामले को भी गंभीरता से लिया है। इस पर जांच के लिए अलग से टीमें बनाई गई हैं। 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान
निर्देश दिए गए हैं कि 15 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाकर ऐसे मामलों की जांच पूरी की जाए। अगर किसी स्कूल में गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित प्रकाशक और बुक सेलर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर के इन आदेशों से साफ है कि अब शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्कूलों को नियमों के तहत काम करना होगा, वरना कार्रवाई तय है।