एसटीआर से बाहर निकले बाघ का तीसरे दिन रेस्क्यू:पिंजरा और जाल फेल; 40 लोगों की टीम ने बेहोश कर पकड़ा
छिंदवाड़ा में बाघ को यूरिया खिलाकर मारने और दफनाने का मामला सामने आने के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) और वन विभाग अलर्ट हो गया है। इसी के चलते एसटीआर से बाहर निकलकर इटारसी और सुखतवा रेंज के जंगलों में घूम रहे कॉलर आईडी लगे दूसरे बाघ को रेस्क्यू कर कोर क्षेत्र छोड़ने की तैयारी कर रहे है। इसी क्रम में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कॉलर आईडी लगे बाघ को वन विभाग की टीम ने बुधवार सुबह तवा डैम के बेकवॉटर किनारे मांदीखोह इलाके से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया। यह बाघ पिछले डेढ़ महीने से एसटीआर के बाहर इटारसी और सुखतवा रेंज के जंगलों में घूम रहा था और गांव के पास मूवमेंट होने व मवेशी का शिकार करने के कारण उसे पकड़कर चूरना के कोर क्षेत्र में छोड़ने का निर्णय लिया गया। तीन दिन से चल रहा था रेस्क्यू ऑपरेशन वन विभाग की टीम पिछले तीन दिनों से लगातार इस बाघ को पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई थी। अलग-अलग तरीके अपनाए गए, लेकिन बाघ हर बार टीम को चकमा देकर झाड़ियों में छिप जाता था। बुधवार को टीम को बाघ की लोकेशन तवा डैम के बेकवॉटर के पास मांदीखोह क्षेत्र में मिली। इसके बाद एसटीआर रेस्क्यू दल, चूरना और टेरिटोरियल के इटारसी व सुखतवा रेंज के अमले ने घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की। पहले दो दिन नाकाम रही कोशिश सोमवार को सुबह 6 बजे से फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा, डिप्टी डायरेक्टर ऋषभा नेताम, डीएफओ गौरव शर्मा, सहायक संचालक विनोद वर्मा और वन्यप्राणी विशेषज्ञ डॉक्टर गुरुदत्त टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ट्रेंकुलाइज करने की कोशिश की गई, लेकिन बाघ झाड़ियों में भाग गया। मंगलवार को भी प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। पिंजरे और जाल भी रहे बेअसर बाघ को पकड़ने के लिए विभाग ने मंगलवार दोपहर में तीन अलग-अलग पिंजरे लगाए, जिनमें बकरियों को रखा गया ताकि बाघ लालच में आए। इसके साथ जाल लगाने की भी तैयारी की गई, लेकिन बाघ न पिंजरे में आया और न जाल में फंसा। लगातार कोशिशों के बाद बुधवार सुबह टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर बेहोश कर दिया। इसके बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में रखा गया और वाहन से चूरना के जंगल की ओर रवाना किया गया। बाघ की रेस्क्यू टीम में रेस्क्यू टीम के अमले में कुल 40 से ज्यादा स्टॉफ शामिल रहा। साथ ही दो हाथी की भी मदद ली गई। एसटीआर के मुताबिक झाड़ियों में बाघ के जाने पर ट्रेंकुलाइज करने बंदूक नहीं चलाई जाती। बाघ के खुले में आने का इंतजार किया जाता है। गर्मियों के दिनों में ट्रेंकुलाइज सुबह 8 बजे से पहले करते है। इसकी वजह ट्रेंकुलाइज करने के दौरान बॉडी का टेम्पचेयर बढ़ता है। चूरना के कोर क्षेत्र में छोड़ा जाएगा टीम बाघ को चूरना के घने कोर क्षेत्र में छोड़ने की तैयारी कर रही है, ताकि वह फिर से जंगल के अंदर अपनी टेरिटरी बना सके और आबादी से दूर रह सके। वन विभाग के अनुसार, 2 जनवरी को मालनी बाड़े से दो बाघों को चूरना के जंगल में छोड़ा गया था। दोनों को कॉलर आईडी लगाकर उनकी निगरानी की जा रही थी ताकि उनकी मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। दोनों बाघ जंगल से बाहर निकल गए इनमें से एक बाघ 17 फरवरी को एसटीआर से निकलकर इटारसी रेंज में पहुंच गया, जबकि दूसरा बाघ 7 मार्च को बाहर निकलकर तवा डैम के आसपास घूमने लगा। इसके बाद से वन विभाग लगातार उनकी निगरानी कर रहा था। जिस बाघ को रेस्क्यू किया गया है, उसने कुछ दिन पहले गांव के पास एक मवेशी का शिकार किया था। इसके बाद उसका मूवमेंट लगातार आबादी वाले इलाकों के पास बना हुआ था, जिससे खतरे की स्थिति बन गई थी। ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि दोनों बाघों पर लगातार नजर रखी जा रही है। एक बाघ को रेस्क्यू कर कोर क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि अगर कहीं बाघ दिखाई दे तो घबराएं नहीं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। टीम लगातार बाघों की लोकेशन पर नजर बनाए हुए है।
छिंदवाड़ा में बाघ को यूरिया खिलाकर मारने और दफनाने का मामला सामने आने के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) और वन विभाग अलर्ट हो गया है। इसी के चलते एसटीआर से बाहर निकलकर इटारसी और सुखतवा रेंज के जंगलों में घूम रहे कॉलर आईडी लगे दूसरे बाघ को रेस्क्यू कर कोर क्षेत्र छोड़ने की तैयारी कर रहे है। इसी क्रम में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कॉलर आईडी लगे बाघ को वन विभाग की टीम ने बुधवार सुबह तवा डैम के बेकवॉटर किनारे मांदीखोह इलाके से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया। यह बाघ पिछले डेढ़ महीने से एसटीआर के बाहर इटारसी और सुखतवा रेंज के जंगलों में घूम रहा था और गांव के पास मूवमेंट होने व मवेशी का शिकार करने के कारण उसे पकड़कर चूरना के कोर क्षेत्र में छोड़ने का निर्णय लिया गया। तीन दिन से चल रहा था रेस्क्यू ऑपरेशन वन विभाग की टीम पिछले तीन दिनों से लगातार इस बाघ को पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई थी। अलग-अलग तरीके अपनाए गए, लेकिन बाघ हर बार टीम को चकमा देकर झाड़ियों में छिप जाता था। बुधवार को टीम को बाघ की लोकेशन तवा डैम के बेकवॉटर के पास मांदीखोह क्षेत्र में मिली। इसके बाद एसटीआर रेस्क्यू दल, चूरना और टेरिटोरियल के इटारसी व सुखतवा रेंज के अमले ने घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की। पहले दो दिन नाकाम रही कोशिश सोमवार को सुबह 6 बजे से फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा, डिप्टी डायरेक्टर ऋषभा नेताम, डीएफओ गौरव शर्मा, सहायक संचालक विनोद वर्मा और वन्यप्राणी विशेषज्ञ डॉक्टर गुरुदत्त टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ट्रेंकुलाइज करने की कोशिश की गई, लेकिन बाघ झाड़ियों में भाग गया। मंगलवार को भी प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। पिंजरे और जाल भी रहे बेअसर बाघ को पकड़ने के लिए विभाग ने मंगलवार दोपहर में तीन अलग-अलग पिंजरे लगाए, जिनमें बकरियों को रखा गया ताकि बाघ लालच में आए। इसके साथ जाल लगाने की भी तैयारी की गई, लेकिन बाघ न पिंजरे में आया और न जाल में फंसा। लगातार कोशिशों के बाद बुधवार सुबह टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर बेहोश कर दिया। इसके बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में रखा गया और वाहन से चूरना के जंगल की ओर रवाना किया गया। बाघ की रेस्क्यू टीम में रेस्क्यू टीम के अमले में कुल 40 से ज्यादा स्टॉफ शामिल रहा। साथ ही दो हाथी की भी मदद ली गई। एसटीआर के मुताबिक झाड़ियों में बाघ के जाने पर ट्रेंकुलाइज करने बंदूक नहीं चलाई जाती। बाघ के खुले में आने का इंतजार किया जाता है। गर्मियों के दिनों में ट्रेंकुलाइज सुबह 8 बजे से पहले करते है। इसकी वजह ट्रेंकुलाइज करने के दौरान बॉडी का टेम्पचेयर बढ़ता है। चूरना के कोर क्षेत्र में छोड़ा जाएगा टीम बाघ को चूरना के घने कोर क्षेत्र में छोड़ने की तैयारी कर रही है, ताकि वह फिर से जंगल के अंदर अपनी टेरिटरी बना सके और आबादी से दूर रह सके। वन विभाग के अनुसार, 2 जनवरी को मालनी बाड़े से दो बाघों को चूरना के जंगल में छोड़ा गया था। दोनों को कॉलर आईडी लगाकर उनकी निगरानी की जा रही थी ताकि उनकी मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। दोनों बाघ जंगल से बाहर निकल गए इनमें से एक बाघ 17 फरवरी को एसटीआर से निकलकर इटारसी रेंज में पहुंच गया, जबकि दूसरा बाघ 7 मार्च को बाहर निकलकर तवा डैम के आसपास घूमने लगा। इसके बाद से वन विभाग लगातार उनकी निगरानी कर रहा था। जिस बाघ को रेस्क्यू किया गया है, उसने कुछ दिन पहले गांव के पास एक मवेशी का शिकार किया था। इसके बाद उसका मूवमेंट लगातार आबादी वाले इलाकों के पास बना हुआ था, जिससे खतरे की स्थिति बन गई थी। ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि दोनों बाघों पर लगातार नजर रखी जा रही है। एक बाघ को रेस्क्यू कर कोर क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि अगर कहीं बाघ दिखाई दे तो घबराएं नहीं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। टीम लगातार बाघों की लोकेशन पर नजर बनाए हुए है।