इलाज के दौरान मौत, लावारिस बताकर किया अंतिम संस्कार:पत्नी हाईकोर्ट पहुंची; चीफ जस्टिस ने कहा- परिजनों को खबर क्यों नहीं दी, जवाब भी मांगा

जबलपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इलाज के दौरान लापता हुए पति की मौत हो जाने और शव को लावारिस बताकर दफनाने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जबलपुर निवासी प्रीति विश्वकर्मा ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बताया कि उनके पति मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती थे, लेकिन अचानक वार्ड से गायब हो गए। काफी तलाश के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला। महिला ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और पुलिस से शिकायत कर पति की खोज की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई नहीं होने पर पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि उनके पति की इलाज के दौरान ही अगले दिन मौत हो गई थी। इसके बाद अस्पताल ने शव को लावारिस मानते हुए अंतिम संस्कार कर दिया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने बताया कि महिला ने अपने पति की पहचान उन कपड़ों से की, जो उन्होंने अस्पताल में भर्ती होते समय पहने थे। बिना सूचना शव दफनाने पर कोर्ट सख्त बुधवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मरीज अस्पताल में भर्ती था, तो उसकी मौत की जानकारी परिजनों को क्यों नहीं दी गई? शव को मुर्दाघर में रखने के बाद बिना सूचना अंतिम संस्कार कैसे कर दिया गया? हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए महिला को स्वतंत्रता दी है कि वह पति की मौत की जांच और मुआवजे की मांग के लिए अलग से याचिका दायर कर सकती है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मामले में लापरवाही के गंभीर पहलुओं की जांच हो सकती है।

Apr 23, 2026 - 07:23
 0  0
इलाज के दौरान मौत, लावारिस बताकर किया अंतिम संस्कार:पत्नी हाईकोर्ट पहुंची; चीफ जस्टिस ने कहा- परिजनों को खबर क्यों नहीं दी, जवाब भी मांगा
जबलपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इलाज के दौरान लापता हुए पति की मौत हो जाने और शव को लावारिस बताकर दफनाने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जबलपुर निवासी प्रीति विश्वकर्मा ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बताया कि उनके पति मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती थे, लेकिन अचानक वार्ड से गायब हो गए। काफी तलाश के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला। महिला ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और पुलिस से शिकायत कर पति की खोज की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई नहीं होने पर पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि उनके पति की इलाज के दौरान ही अगले दिन मौत हो गई थी। इसके बाद अस्पताल ने शव को लावारिस मानते हुए अंतिम संस्कार कर दिया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने बताया कि महिला ने अपने पति की पहचान उन कपड़ों से की, जो उन्होंने अस्पताल में भर्ती होते समय पहने थे। बिना सूचना शव दफनाने पर कोर्ट सख्त बुधवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मरीज अस्पताल में भर्ती था, तो उसकी मौत की जानकारी परिजनों को क्यों नहीं दी गई? शव को मुर्दाघर में रखने के बाद बिना सूचना अंतिम संस्कार कैसे कर दिया गया? हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए महिला को स्वतंत्रता दी है कि वह पति की मौत की जांच और मुआवजे की मांग के लिए अलग से याचिका दायर कर सकती है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मामले में लापरवाही के गंभीर पहलुओं की जांच हो सकती है।