118 हाई रिस्क गर्भवतियों की हुई पहचान:प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे, GPM में चला जांच अभियान

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे होने पर स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान 389 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व (एएनसी) जांच की गई। जांच के दौरान 118 उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई। इन महिलाओं को आवश्यक उपचार, सलाह और विशेष चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई गई। यह अभियान कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन और सीएमएचओ डॉ. रमेश्वर शर्मा के निर्देशन में आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था। जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों में हुई जांच विशेष जांच अभियान जिला अस्पताल, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आयोजित किया गया। यहां गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरी परामर्श दिया गया। इन महिलाओं की विशेष रूप से हुई जांच अभियान के दौरान उन गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की गई, जिनका पहले ऑपरेशन से प्रसव हुआ था, गर्भपात हुआ था या मृत शिशु का जन्म हुआ था। इसके अलावा कम वजन और कम ऊंचाई वाली महिलाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया। गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिलाओं पर विशेष नजर कम उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों से प्रभावित गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में शामिल कर उनकी विशेष निगरानी की गई। सुरक्षित मातृत्व के लिए जागरूकता पर दिया गया जोर स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, पौष्टिक आहार और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया, ताकि मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

Jun 10, 2026 - 10:47
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118 हाई रिस्क गर्भवतियों की हुई पहचान:प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे, GPM में चला जांच अभियान
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे होने पर स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान 389 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व (एएनसी) जांच की गई। जांच के दौरान 118 उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई। इन महिलाओं को आवश्यक उपचार, सलाह और विशेष चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई गई। यह अभियान कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन और सीएमएचओ डॉ. रमेश्वर शर्मा के निर्देशन में आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था। जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों में हुई जांच विशेष जांच अभियान जिला अस्पताल, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आयोजित किया गया। यहां गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरी परामर्श दिया गया। इन महिलाओं की विशेष रूप से हुई जांच अभियान के दौरान उन गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की गई, जिनका पहले ऑपरेशन से प्रसव हुआ था, गर्भपात हुआ था या मृत शिशु का जन्म हुआ था। इसके अलावा कम वजन और कम ऊंचाई वाली महिलाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया। गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिलाओं पर विशेष नजर कम उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों से प्रभावित गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में शामिल कर उनकी विशेष निगरानी की गई। सुरक्षित मातृत्व के लिए जागरूकता पर दिया गया जोर स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, पौष्टिक आहार और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया, ताकि मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।