दीपक बनाने का खर्च बढ़ा, दाम नहीं:सीहोर के कारीगर 20 रुपए में 25 दीपक बेच रहे, दो रुपए प्रति दीपक देने की मांग
सीहोर में दीपावली के लिए दीपक बनाने वाले कारीगर महंगाई से परेशान हैं। मिट्टी, गोबर के कंडे और चाक के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन बाजार में दीपकों की कीमत नहीं बढ़ी। कारीगरों को 20 रुपए में 25 दीपक बेचने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने प्रति दीपक कम से कम 2 रुपए कीमत तय करने की मांग की है। मिट्टी की ट्रॉली 5 हजार रुपए में खरीद रहे माटी कला से जुड़ी कारीगर दीपिका प्रजापति ने बताया कि मिट्टी की एक ट्रॉली 5 हजार रुपए में खरीदनी पड़ती है। दीपक पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गोबर के कंडे 5 रुपए प्रति नग मिल रहे हैं। वहीं, दीपक बनाने का चाक करीब 8 हजार रुपए का है। कारीगरों के मुताबिक, इस काम में परिवार के सभी सदस्य दिन-रात मेहनत करते हैं। इसके बावजूद लागत के मुकाबले कम कमाई होती है। उनका कहना है कि कच्चे माल और उपकरणों के दाम बढ़ने के साथ दीपकों की कीमत भी बढ़नी चाहिए, ताकि परिवार का गुजारा हो सके और पारंपरिक माटी कला भी बची रहे। प्रति दीपक 2 रुपए कीमत तय करने की मांग कारीगरों ने शासन से मांग की है कि दीपकों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि बाजार में एक दीपक कम से कम 2 रुपए में बिक सके। कारीगर लता ने मांग की कि माटी कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार चाक, मिट्टी और अन्य जरूरी उपकरण रियायती दरों पर या निशुल्क उपलब्ध कराए। इससे कारीगरों को आर्थिक राहत मिलेगी और पीढ़ियों से चली आ रही इस कला को बचाने में मदद मिलेगी।
सीहोर में दीपावली के लिए दीपक बनाने वाले कारीगर महंगाई से परेशान हैं। मिट्टी, गोबर के कंडे और चाक के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन बाजार में दीपकों की कीमत नहीं बढ़ी। कारीगरों को 20 रुपए में 25 दीपक बेचने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने प्रति दीपक कम से कम 2 रुपए कीमत तय करने की मांग की है। मिट्टी की ट्रॉली 5 हजार रुपए में खरीद रहे माटी कला से जुड़ी कारीगर दीपिका प्रजापति ने बताया कि मिट्टी की एक ट्रॉली 5 हजार रुपए में खरीदनी पड़ती है। दीपक पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गोबर के कंडे 5 रुपए प्रति नग मिल रहे हैं। वहीं, दीपक बनाने का चाक करीब 8 हजार रुपए का है। कारीगरों के मुताबिक, इस काम में परिवार के सभी सदस्य दिन-रात मेहनत करते हैं। इसके बावजूद लागत के मुकाबले कम कमाई होती है। उनका कहना है कि कच्चे माल और उपकरणों के दाम बढ़ने के साथ दीपकों की कीमत भी बढ़नी चाहिए, ताकि परिवार का गुजारा हो सके और पारंपरिक माटी कला भी बची रहे। प्रति दीपक 2 रुपए कीमत तय करने की मांग कारीगरों ने शासन से मांग की है कि दीपकों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि बाजार में एक दीपक कम से कम 2 रुपए में बिक सके। कारीगर लता ने मांग की कि माटी कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार चाक, मिट्टी और अन्य जरूरी उपकरण रियायती दरों पर या निशुल्क उपलब्ध कराए। इससे कारीगरों को आर्थिक राहत मिलेगी और पीढ़ियों से चली आ रही इस कला को बचाने में मदद मिलेगी।