पंचकोश : समग्र व्यक्तित्व विकास की भारतीय दृष्टि पर राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

Sep 6, 2026 - 18:04
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पंचकोश : समग्र व्यक्तित्व विकास की भारतीय दृष्टि पर राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

रीवा विज्ञानमय एवं मनोमय कोश पर हुआ गहन मंथन, भारतीय ज्ञान परंपरा से समग्र व्यक्तित्व निर्माण का संदेश रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘पंचकोश : समग्र व्यक्तित्व विकास की भारतीय दृष्टि’ का द्वितीय दिवस एवं समापन समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। द्वितीय दिवस दो महत्वपूर्ण सत्रों में विज्ञानमय कोश एवं मनोमय कोश पर केंद्रित रहा, जिसमें शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, अतिथि विद्वानों एवं शोधार्थियों ने भारतीय दृष्टि से समग्र व्यक्तित्व विकास के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। विवेक और आचरण से होती है व्यक्तित्व की पहचान प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. भरत व्यास, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल ने ‘विज्ञानमय कोश’ विषय पर कहा कि व्यक्तित्व के विकास के लिए व्यक्ति में विवेक का होना अत्यंत आवश्यक है। विवेक के अभाव में सही निर्णय लेने और उसके अनुरूप आचरण करने में कठिनाई होती है। व्यक्ति के आचरण से ही उसके व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान होती है। उन्होंने कहा कि विज्ञानमय कोश मनोमय कोश पर आधारित होता है। अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश—इन पांचों कोशों के संतुलित एवं क्रमिक विकास से व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व का विकास संभव है। ‘जैसा हमारा व्यक्तित्व होगा, वैसा ही हम दुनिया का नक्शा बनाएंगे’ द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता एवं विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया ने ‘मनोमय कोश’ विषय पर कहा कि “हमारा व्यक्तित्व जैसा होगा, हम दुनिया का नक्शा भी वैसा ही बनाएंगे। इसलिए सबसे पहले हमें अपना नक्शा बनाना होगा।” उन्होंने कहा कि व्यक्ति के लिए जड़ एवं चेतन दोनों को जानना आवश्यक है। समग्र विकास ही सच्चे व्यक्तित्व की पहचान है। मनोमय कोश के अंतर्गत शुद्ध मन श्रेष्ठ जीवन का आधार है। इसलिए मन को नियंत्रित एवं संतुलित रखना आवश्यक है। मन के नियंत्रण का प्रभाव शरीर, मन और बुद्धि पर पड़ता है। उन्होंने मन को नियंत्रित रखने के विभिन्न उपायों के साथ-साथ वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के नवाचारों की डॉ. नीलेश पाण्डेय ने की सराहना समापन अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत संयोजक डॉ. नीलेश पाण्डेय ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं समस्त आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा निरंतर नए-नए नवाचार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले दो वर्षों में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन कर एक सकारात्मक एवं रचनात्मक वातावरण निर्मित किया है। डॉ. पाण्डेय ने विश्वविद्यालय प्रशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस प्रकार विश्वविद्यालय द्वारा अकादमिक गतिविधियों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा एवं समाजोपयोगी विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलगुरु, कुलसचिव, प्राध्यापकों एवं समस्त प्रशासनिक टीम को आयोजन की सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षा को समाज और संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की भविष्य की योजनाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध, नवाचार एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां स्थापित करेगा। राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से हो शिक्षा का संचालन समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया ने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों का व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालन किया जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम, संस्कारवान एवं जिम्मेदार नागरिक तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा जल संवर्धन के क्षेत्र में कार्य करने की घोषणा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में आने वाले पांच गांवों को गोद लेकर जल संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्य किया जाएगा। परिवार और संस्कारों से होता है वास्तविक व्यक्तित्व निर्माण समापन कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के क्षेत्रीय संगठन प्रतिनिधि ने कहा कि आज व्यक्तित्व विकास के नाम पर अनेक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। ये संस्थान व्यक्ति के बाहरी आवरण और प्रस्तुति में सुधार करते हैं, जबकि वास्तविक व्यक्तित्व का निर्माण परिवार, दादा-दादी एवं बुजुर्गों से प्राप्त संस्कारों से होता है। उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था एवं संस्कारों को व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। प्रस्तुत किया दो दिवसीय कार्यशाला का प्रतिवेदन कार्यक्रम के अंत में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के रीवा संभाग प्रभारी प्रो. राम भूषण मिश्र ने दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा कार्यशाला में आयोजित विभिन्न सत्रों एवं विषय-विमर्श की जानकारी दी। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. एस.एन. तिवारी, जिला संघचालक एवं चिकित्सक, आयुर्वेद महाविद्यालय, रीवा रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. महेंद्र मणि द्विवेदी, प्रो. भरत व्यास, न्यास के क्षेत्र संयोजक राम सागर जी, डॉ. नीलेश पाण्डेय एवं सुश्री नीरजा नामदेव, कुलसचिव, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. ओम तिवारी, प्रो. शुभा तिवारी, प्रो. आर.एन. पटेल, प्रो. अतुल पाण्डेय, प्रो. श्रीकांत मिश्रा, डॉ. अतुल तिवारी, डॉ. लक्ष्मीकांत चंदेला, डॉ. अनुराग मिश्र, डॉ. कमलेश मिश्रा, डॉ. मुक्ता त्रिपाठी, डॉ. शेषपाल नामदेव सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अतिथि विद्वान एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर सुश्री नीरजा नामदेव, कुलसचिव, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

मनीष शुक्ला प्रधान सम्पादक मनीष शुक्ला