हरदा का 200 साल पुराना गणेश मंदिर:अजनाल नदी के किनारे स्थित है मंदिर, दावा- विवाह संबंधी समस्याओं का होता है समाधान
हरदा शहर की अजनाल नदी के पेड़ी घाट पर स्थित लगभग 200 साल पुराना गणेश मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां बुधवार को भगवान गणेश के दर्शन मात्र से संकट दूर हो जाते हैं। बुधवार से शुरू हुए गणेशोत्सव के 10 दिनों तक मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहेगा। मंदिर में रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजित भगवान गणेश की प्रतिमा सिंदूरी रंग की है। पुजारी श्याम शर्मा ने बताया कि यह शहर का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान गणेश का श्रृंगार सिंदूर से किया जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस मंदिर में मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। पांच बुधवार पूजा से विवाह संबंधी बाधाएं दूर पुजारी ने बताया कि यदि किसी परिवार में बच्चों के विवाह संबंध में दिक्कत आती है तो वे अपने बच्चों के साथ लगातार पांच बुधवार भगवान गणेश के दर्शन कर दूर्वा और हल्दी की गठान की माला चढ़ाएं। मान्यता है कि इससे मनचाहा रिश्ता और इच्छानुसार परिवार मिल जाता है। दक्षिणमुखी सूंड का महत्व मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा की सूंड दाईं ओर है। पंडित श्याम शर्मा ने बताया कि दाईं सूंड वाली गणपति मूर्ति को ‘जागृत’ माना जाता है। दक्षिण दिशा यमलोक और दाईं बाजू सूर्य नाड़ी से जुड़ी है। ऐसी मूर्ति की पूजा में सभी विधि-विधानों का पालन जरूरी होता है। मान्यता है कि इससे सात्विकता बढ़ती है और दक्षिण दिशा से प्रसारित होने वाली रज लहरियों का असर भक्तों पर नहीं पड़ता। देखिए तस्वीरें...
