वकालत की प्रैक्टिस के साथ खेती:सोशल मीडिया से जानकारी लेकर एक एकड़ में उगाया ड्रैगन फ्रूट, आठ लाख इनकम की उम्मीद

सुबह साधारण कपड़े पहनकर खेत में देखभाल और किसानी का काम। दिन में काला कोट पहनकर न्यायालय में जिरह और कानून की बहस। पांढुर्णा के धर्मेंद्र गोलाइत का यही रूटीन रहता है। धर्मेंद्र पेशे से वकील हैं, लेकिन किसानी भी उतनी ही शिद्दत के साथ करते हैं। दैनिक भास्कर की स्मार्ट किसान सीरीज में इस बार बात पांढुर्णा के रहने वाले धर्मेंद्र गोलाइत की। उन्होंने एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट लगाया है। तीन हजार पेड़ लगाए हैं। इस बार करीब 8 से 9 टन उत्पादन की उम्मीद है। आखिर अपने खेती और प्रोफेशन में कैसे संतुलन बनाते हैं, धर्मेंद्र से ही जानते हैं। सोशल मीडिया से ली जानकारी धर्मेंद्र बताते हैं कि पुश्तैनी एक एकड़ खेत है। पहले पारंपरिक फसलें गेहूं, सोयाबीन, मक्का, चना आदि उगाता था, लेकिन उनमें मेहनत और लागत ज्यादा, लेकिन मुनाफा कम है। कभी-कभी तो मौसम की मार के कारण लागत भी नहीं निकल पाती थी। दो साल पहले की बात है। सोशल मीडिया पर ड्रैगन फ्रूट की फसल देखी। इसके बाद महाराष्ट्र के नासिक और रादुरी कृषि विश्वविद्यालय गए। यहां दिन भर फसलों को देखा। कम समय पर अधिक पैदावार फसलों के बारे में भी जानकारी ली। सोशल मीडिया पर पेड़ लगाने, उसकी सुविधा, सावधानी और काटने के बारे में जानकारी प्राप्त की। किसान ने बताया कि सितंबर 2024 में 70 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से ड्रैगन फ्रूट के तीन हजार पेड़ महाराष्ट्र के पंढरपुर के सांगोला नर्सरी से लेकर आए। यहां एक एकड़ खेत में पौधे लगाए। दो पौधों की दूरी 10 फीट रखी। करीब 500 पोल फसल को साल में केवल दो बार गोबर खाद दिया जाता है। दवाई और खाद का छिड़काव और ड्रिप के माध्यम से पानी दिया जाता है, ताकि जड़ें मजबूत हो सकें। पौधों की ऊंचाई 10 फीट तक होती है। इसे सीमेंट के पोल से बांधा जाता है। आठ महीने में इसमें फल आना शुरू हो जाते हैं। सुबह खेत और दिन में कोर्ट अपने प्रोफेशन को मैनेज करने के सवाल पर किसान बताते हैं कि सुबह 7 बजे से 11 बजे तक खेत में काम देखता हूं। इसके बाद दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक कोर्ट में प्रैक्टिस करने जाता हूं। शाम को आकर फिर से घर के काम और खेत में जाकर व्यवस्था देखता हूं। देखभाल के लिए दो लोगों रखा है। जरूरत पड़ने पर पांच से छह लोग भी काम करते हैं। एक पौधा 25 साल तक फल देता है किसान ने बताया कि कोविड के बाद से ड्रैगन फ्रूट का चलन बढ़ा है। डेंगू में भी इसे खाने की सलाह डॉक्टर देते हैं। यह फल बाजार में प्रति नग करीब 150 से 200 रुपए में मिलता है। होल सेल में कीमत 80 रुपए से 100 रुपए तक होती है। यह कैक्टस परिवार का ही बेल की तरह दिखने वाला पौधा है। पौधरोपण के एक साल के बाद यह फल देने लगता है। सबकुछ ठीक रहा, तो 25 साल तक फल आते हैं। आमतौर पर ड्रैगन फ्रूट पहले अमेरिका, वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों से भारत में आता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत में भी बड़े लेवल पर इसका प्रोडक्शन हो रहा है। गुजरात तो इसका हब है। यहां सरकार ने इसका नाम 'कमलम' रखा है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी इसकी खेती होने लगी है। कब और कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की बोवनी धर्मेंद्र ने बताया- ड्रैगन फ्रूट की खेती पौधे और बीज दोनों तरह से की जा सकती है। अगर बीज से खेती करेंगे, तो फल आने में 4-5 साल का समय लग सकता है। कलम से बनाए गए पौधे से खेती करते हैं, तो करीब 2 साल में ही फल आना शुरू हो जाएगा। इसकी खेती कम पानी में भी हो सकती है। बोवनी का सबसे अच्छा समय मार्च और अप्रैल का होता है। पहले खेत में पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद जरूर डालें, ताकि पौधे को पोषक तत्व की कमी न हो। ड्रिप सिंचाई के माध्यम से करते हैं खेती सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से हकाई-जुताई करनी होती है। इसे आमतौर पर कटिंग यानी कलम लगाकर उगाया जाता है। स्वस्थ और रोग रहित पौधे से 20-50 सेंटीमीटर लंबी कलम लेकर एक दिन के लिए छांव में सुखाते हैं। इसके बाद गड्ढे में कटिंग लगाते हैं। इससे पहले गड्ढे में 50 प्रतिशत जैविक खाद, 20 प्रतिशत रेत और 30 प्रतिशत मिट्टी के मिश्रण डालते हैं। ड्रैगन फ्रूट का पौधा बेल की तरह बढ़ता है। इसे सहारे की जरूरत होती है। मिट्टी के ढेर से खेत में 10-10 फीट की दूरी पर बेड बनाए जाते हैं। पौधों के पास 6-7 फीट की दूरी पर लकड़ी या कांक्रीट के खंभे लगाने होते हैं। एक खंभे के चारों ओर 3-4 पौधे लगा सकते हैं। ड्रैगन फ्रूट के पौधों को कम पानी की जरूरत होती है। इन्हें ड्रिप के माध्यम से सींचा जाता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती की मुख्य बातें ये सावधानियां रखें दुनिया में 153 वैरायटी, सियाम रेड MP के अनुकूल विश्व में ड्रैगन फ्रूट की 153 वैरायटी हैं। यह मध्यप्रदेश के मौसम के अनुकूल है। इसे सप्ताह में एक बार पानी देना होता है। इसके लिए ड्रिप सिस्टम लगाया है। इसमें दो प्रकार के फल आते हैं। एक बाहर से लाल, दूसरा पीला और सफेद होता है। लाल वाला फल अंदर से भी लाल होता है। पीला फल अंदर से सफेद होता है। फल की सेल्फ लाइफ 18 से 20 दिन की है यानी यह पकने के बाद 20 दिन तक खराब नहीं होता है। ये भी पढ़ें... कभी 20 रुपए रोज में नौकरी, आज 1.30 करोड़ टर्नओवर: 8वीं पास किसान कर रहा नेचुरल खेती; अमेजन, फ्लिपकार्ट पर बेच रहा प्रोडक्ट आगर मालवा के राधेश्याम परिहार कभी 20 रुपए रोजाना की नौकरी करते थे। आज 1.30 करोड़ सालाना का टर्न ओवर है। कभी सिर्फ 5 बीघा जमीन थी, आज 50 बीघा के मालिक हैं। खुद आठवीं पास हैं, लेकिन 5000 लोगों को खेती के गुर सिखा चुके हैं। चार नेशनल के साथ राज्य और जिला स्तर पर भी कई अवॉर्ड्स जीत चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर...

Aug 29, 2025 - 07:47
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वकालत की प्रैक्टिस के साथ खेती:सोशल मीडिया से जानकारी लेकर एक एकड़ में उगाया ड्रैगन फ्रूट, आठ लाख इनकम की उम्मीद
सुबह साधारण कपड़े पहनकर खेत में देखभाल और किसानी का काम। दिन में काला कोट पहनकर न्यायालय में जिरह और कानून की बहस। पांढुर्णा के धर्मेंद्र गोलाइत का यही रूटीन रहता है। धर्मेंद्र पेशे से वकील हैं, लेकिन किसानी भी उतनी ही शिद्दत के साथ करते हैं। दैनिक भास्कर की स्मार्ट किसान सीरीज में इस बार बात पांढुर्णा के रहने वाले धर्मेंद्र गोलाइत की। उन्होंने एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट लगाया है। तीन हजार पेड़ लगाए हैं। इस बार करीब 8 से 9 टन उत्पादन की उम्मीद है। आखिर अपने खेती और प्रोफेशन में कैसे संतुलन बनाते हैं, धर्मेंद्र से ही जानते हैं। सोशल मीडिया से ली जानकारी धर्मेंद्र बताते हैं कि पुश्तैनी एक एकड़ खेत है। पहले पारंपरिक फसलें गेहूं, सोयाबीन, मक्का, चना आदि उगाता था, लेकिन उनमें मेहनत और लागत ज्यादा, लेकिन मुनाफा कम है। कभी-कभी तो मौसम की मार के कारण लागत भी नहीं निकल पाती थी। दो साल पहले की बात है। सोशल मीडिया पर ड्रैगन फ्रूट की फसल देखी। इसके बाद महाराष्ट्र के नासिक और रादुरी कृषि विश्वविद्यालय गए। यहां दिन भर फसलों को देखा। कम समय पर अधिक पैदावार फसलों के बारे में भी जानकारी ली। सोशल मीडिया पर पेड़ लगाने, उसकी सुविधा, सावधानी और काटने के बारे में जानकारी प्राप्त की। किसान ने बताया कि सितंबर 2024 में 70 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से ड्रैगन फ्रूट के तीन हजार पेड़ महाराष्ट्र के पंढरपुर के सांगोला नर्सरी से लेकर आए। यहां एक एकड़ खेत में पौधे लगाए। दो पौधों की दूरी 10 फीट रखी। करीब 500 पोल फसल को साल में केवल दो बार गोबर खाद दिया जाता है। दवाई और खाद का छिड़काव और ड्रिप के माध्यम से पानी दिया जाता है, ताकि जड़ें मजबूत हो सकें। पौधों की ऊंचाई 10 फीट तक होती है। इसे सीमेंट के पोल से बांधा जाता है। आठ महीने में इसमें फल आना शुरू हो जाते हैं। सुबह खेत और दिन में कोर्ट अपने प्रोफेशन को मैनेज करने के सवाल पर किसान बताते हैं कि सुबह 7 बजे से 11 बजे तक खेत में काम देखता हूं। इसके बाद दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक कोर्ट में प्रैक्टिस करने जाता हूं। शाम को आकर फिर से घर के काम और खेत में जाकर व्यवस्था देखता हूं। देखभाल के लिए दो लोगों रखा है। जरूरत पड़ने पर पांच से छह लोग भी काम करते हैं। एक पौधा 25 साल तक फल देता है किसान ने बताया कि कोविड के बाद से ड्रैगन फ्रूट का चलन बढ़ा है। डेंगू में भी इसे खाने की सलाह डॉक्टर देते हैं। यह फल बाजार में प्रति नग करीब 150 से 200 रुपए में मिलता है। होल सेल में कीमत 80 रुपए से 100 रुपए तक होती है। यह कैक्टस परिवार का ही बेल की तरह दिखने वाला पौधा है। पौधरोपण के एक साल के बाद यह फल देने लगता है। सबकुछ ठीक रहा, तो 25 साल तक फल आते हैं। आमतौर पर ड्रैगन फ्रूट पहले अमेरिका, वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों से भारत में आता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत में भी बड़े लेवल पर इसका प्रोडक्शन हो रहा है। गुजरात तो इसका हब है। यहां सरकार ने इसका नाम 'कमलम' रखा है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी इसकी खेती होने लगी है। कब और कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की बोवनी धर्मेंद्र ने बताया- ड्रैगन फ्रूट की खेती पौधे और बीज दोनों तरह से की जा सकती है। अगर बीज से खेती करेंगे, तो फल आने में 4-5 साल का समय लग सकता है। कलम से बनाए गए पौधे से खेती करते हैं, तो करीब 2 साल में ही फल आना शुरू हो जाएगा। इसकी खेती कम पानी में भी हो सकती है। बोवनी का सबसे अच्छा समय मार्च और अप्रैल का होता है। पहले खेत में पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद जरूर डालें, ताकि पौधे को पोषक तत्व की कमी न हो। ड्रिप सिंचाई के माध्यम से करते हैं खेती सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से हकाई-जुताई करनी होती है। इसे आमतौर पर कटिंग यानी कलम लगाकर उगाया जाता है। स्वस्थ और रोग रहित पौधे से 20-50 सेंटीमीटर लंबी कलम लेकर एक दिन के लिए छांव में सुखाते हैं। इसके बाद गड्ढे में कटिंग लगाते हैं। इससे पहले गड्ढे में 50 प्रतिशत जैविक खाद, 20 प्रतिशत रेत और 30 प्रतिशत मिट्टी के मिश्रण डालते हैं। ड्रैगन फ्रूट का पौधा बेल की तरह बढ़ता है। इसे सहारे की जरूरत होती है। मिट्टी के ढेर से खेत में 10-10 फीट की दूरी पर बेड बनाए जाते हैं। पौधों के पास 6-7 फीट की दूरी पर लकड़ी या कांक्रीट के खंभे लगाने होते हैं। एक खंभे के चारों ओर 3-4 पौधे लगा सकते हैं। ड्रैगन फ्रूट के पौधों को कम पानी की जरूरत होती है। इन्हें ड्रिप के माध्यम से सींचा जाता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती की मुख्य बातें ये सावधानियां रखें दुनिया में 153 वैरायटी, सियाम रेड MP के अनुकूल विश्व में ड्रैगन फ्रूट की 153 वैरायटी हैं। यह मध्यप्रदेश के मौसम के अनुकूल है। इसे सप्ताह में एक बार पानी देना होता है। इसके लिए ड्रिप सिस्टम लगाया है। इसमें दो प्रकार के फल आते हैं। एक बाहर से लाल, दूसरा पीला और सफेद होता है। लाल वाला फल अंदर से भी लाल होता है। पीला फल अंदर से सफेद होता है। फल की सेल्फ लाइफ 18 से 20 दिन की है यानी यह पकने के बाद 20 दिन तक खराब नहीं होता है। ये भी पढ़ें... कभी 20 रुपए रोज में नौकरी, आज 1.30 करोड़ टर्नओवर: 8वीं पास किसान कर रहा नेचुरल खेती; अमेजन, फ्लिपकार्ट पर बेच रहा प्रोडक्ट आगर मालवा के राधेश्याम परिहार कभी 20 रुपए रोजाना की नौकरी करते थे। आज 1.30 करोड़ सालाना का टर्न ओवर है। कभी सिर्फ 5 बीघा जमीन थी, आज 50 बीघा के मालिक हैं। खुद आठवीं पास हैं, लेकिन 5000 लोगों को खेती के गुर सिखा चुके हैं। चार नेशनल के साथ राज्य और जिला स्तर पर भी कई अवॉर्ड्स जीत चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर...