देवास में धूमधाम से मनाई गई देवउठनी एकादशी:तुलसी विवाह और आतिशबाजी के साथ हुई शुभ कार्यों की शुरुआत
देवास में धूमधाम से मनाई गई देवउठनी एकादशी:तुलसी विवाह और आतिशबाजी के साथ हुई शुभ कार्यों की शुरुआत
देवास में शनिवार को देवउठनी एकादशी का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। शाम से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में जमकर आतिशबाजी की गई, जो देर रात तक जारी रही। इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो गई है। एकादशी के अवसर पर शहर में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। बाजारों में रौनक दिखाई दी, जहां गन्ने और फूल-मालाओं की दुकानें लोगों को आकर्षित कर रही थीं। दीपावली की तरह ही घरों में दीपक सजाकर पूजा-अर्चना की गई। पंडित राजेश दुबे के अनुसार, इस वर्ष दो एकादशी मनाई जा रही हैं। कुछ परिवारों ने कल व्रत रखा था, जबकि कई जगहों पर आज (रविवार) भी एकादशी का पर्व मनाकर पूजा-अर्चना की जा रही है। देवउठनी एकादशी पर शहर भर में सुबह से रात तक कई आयोजन हुए। कई घरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई और शहनाइयों की गूंज सुनाई दी, जिससे शादियों के मौसम की शुरुआत हुई। शाम के समय शहर में दो से तीन स्थानों पर तुलसी विवाह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वर्णकार समाज द्वारा भी परंपरागत तुलसी विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तिभाव से तुलसी माता का विवाह भगवान शालिग्राम के साथ करवाया गया।
देवास में शनिवार को देवउठनी एकादशी का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। शाम से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में जमकर आतिशबाजी की गई, जो देर रात तक जारी रही। इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो गई है। एकादशी के अवसर पर शहर में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। बाजारों में रौनक दिखाई दी, जहां गन्ने और फूल-मालाओं की दुकानें लोगों को आकर्षित कर रही थीं। दीपावली की तरह ही घरों में दीपक सजाकर पूजा-अर्चना की गई। पंडित राजेश दुबे के अनुसार, इस वर्ष दो एकादशी मनाई जा रही हैं। कुछ परिवारों ने कल व्रत रखा था, जबकि कई जगहों पर आज (रविवार) भी एकादशी का पर्व मनाकर पूजा-अर्चना की जा रही है। देवउठनी एकादशी पर शहर भर में सुबह से रात तक कई आयोजन हुए। कई घरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई और शहनाइयों की गूंज सुनाई दी, जिससे शादियों के मौसम की शुरुआत हुई। शाम के समय शहर में दो से तीन स्थानों पर तुलसी विवाह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वर्णकार समाज द्वारा भी परंपरागत तुलसी विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तिभाव से तुलसी माता का विवाह भगवान शालिग्राम के साथ करवाया गया।