विजय शाह को लेकर असमंजस में सरकार और संगठन, दिल्ली नेतृत्व के हाथ पर छोड़ा फैसला
विजय शाह को लेकर असमंजस में सरकार और संगठन, दिल्ली नेतृत्व के हाथ पर छोड़ा फैसला
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने के मामले मप्र के मंत्री विजय शाह को लेकर राज्य सरकार और मप्र भाजपा दोनों में असमंजस की स्थिति है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक शाह के मामले में सरकार और संगठन दोनों ने निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया है। पूरे प्रकरण की जानकारी दिल्ली भेज दी है और दिल्ली से निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी तक उनके पास कोई निर्देश नहीं आए हैं। मामला कैबिनेट मंत्री की अभियोजन स्वीकृति का है, जिसके लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी है। लेकिन अभी तक कोई भी दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के विरुद्ध एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के अंदर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को पूरी हो गई है। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। सरकार के सूत्रों को कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 फरवरी को है, लेकिन कार्यदिवस के आधार पर 2 सप्ताह की मोहलत 5 फरवरी तक है। इसलिए सरकार के पास अभी 3 दिन का वक्त और है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी 6 माह पहले ही अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज चुकी है। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के साथ ही मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की सिफारिश की गई है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने के मामले मप्र के मंत्री विजय शाह को लेकर राज्य सरकार और मप्र भाजपा दोनों में असमंजस की स्थिति है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक शाह के मामले में सरकार और संगठन दोनों ने निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया है। पूरे प्रकरण की जानकारी दिल्ली भेज दी है और दिल्ली से निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी तक उनके पास कोई निर्देश नहीं आए हैं। मामला कैबिनेट मंत्री की अभियोजन स्वीकृति का है, जिसके लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी है। लेकिन अभी तक कोई भी दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के विरुद्ध एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के अंदर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को पूरी हो गई है। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। सरकार के सूत्रों को कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 फरवरी को है, लेकिन कार्यदिवस के आधार पर 2 सप्ताह की मोहलत 5 फरवरी तक है। इसलिए सरकार के पास अभी 3 दिन का वक्त और है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी 6 माह पहले ही अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज चुकी है। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के साथ ही मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की सिफारिश की गई है।