सहारनपुर में शिवालिक फार्म हत्याकांड के आरोपी का फेसबुक लाइव:बोला-अगर मैं दोषी निकाला तो मुझे बीच चौराहे पर जिंदा जला दें, जो सच नहीं बोल सकता वो महाराणा का वंश...
सहारनपुर में शिवालिक फार्म हत्याकांड के आरोपी का फेसबुक लाइव:बोला-अगर मैं दोषी निकाला तो मुझे बीच चौराहे पर जिंदा जला दें, जो सच नहीं बोल सकता वो महाराणा का वंशज नहीं हो सकता
शिवालिक वन क्षेत्र की भाग रेंज में 4 फरवरी को जमीन के विवाद में फायरिंग हुई। जिसमें एक युवक की मौत हो गई। मामले में दूसरे पक्ष के चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। जिसमें उत्तराखंड में श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेशाध्यक्ष शक्ति सिंह भी है। आरोपी शक्ति सिंह ने फेसबुक पर लाइव आकर खुद को निर्दोष बताया है। वीडियो में बताया कि जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, उस पर पिछले करीब तीन वर्षों से न्यायालय का स्टे चल रहा है। इसी विवाद के समाधान के लिए पंचायत बुलाई गई थी। बताया जा रहा है कि पंचायत में दोनों पक्षों के अलावा बाहरी जिलों से भी लोग मौजूद थे। फेसबुक लाइव में ठाकुर शक्ति सिंह ने दावा किया कि उन्हें समाज के दो पक्षों के बीच समझौता कराने और विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए मध्यस्थ के तौर पर बुलाया गया था। कहा-वे घटना स्थल पर शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे और उनकी मौजूदगी में कोई फायरिंग नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत में शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और हरियाणा से कई लोग पहुंचे थे। साथ ही उन्होंने रविंदर राणा, योगेंद्र चौधरी और पंकज शर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने बाहरी और हिस्ट्रीशीटरों को बुलाया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोपी का कहना है कि वे जब वहां से निकले, उसके लगभग 100–150 मीटर की दूरी पर सैकड़ों राउंड फायरिंग हुई। इसी दौरान एक युवक को पीछे से गोली लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने मृतक को अपना 'छोटा भाई समान' बताते हुए गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि वे स्वयं इस घटना से आहत हैं। ठाकुर शक्ति सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि घटना से जुड़े सभी लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाली जाए और शिवालिक क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की गहन जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि वे 'एक प्रतिशत भी दोषी' पाए जाते हैं तो वे किसी भी तरह की जांच, यहां तक कि नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हैं। पढ़िए...पूरा मामला दरअसल, 4 फरवरी को गणेशपुर गांव के पास स्थित शिवालिक फार्म हाउस में प्रॉपर्टी विवाद के दौरान बुलाई गई शांति वार्ता खूनी संघर्ष में बदली। जमीन को लेकर चल रहे विवाद में अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिसमें 22 वर्षीय शिवम राणा की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, उस पर पिछले तीन वर्षों से न्यायालय का स्टे चल रहा है। इसके बावजूद समझौते के लिए पंचायत बुलाई गई थी। फार्म हाउस पर दोनों पक्षों के करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे। इसी दौरान रुपए के लेनदेन को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई और फिर फायरिंग में बदल गई। करीब 200 राउंड गोलियां चलीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। फायरिंग में थाना नागल क्षेत्र के साधारणपुर सिर गांव निवासी शिवम के सीने में गोली लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बागपत के बड़ौत निवासी मनीष और गाजियाबाद के योगेंद्र गोली लगने से घायल हुए थे। मामले में प्रॉपर्टी कारोबारी पंकज शर्मा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 2017-18 में बिहारीगढ़ में 87 लाख रुपए में जमीन खरीदी थी और बाद में महादेवपुरम कॉलोनी विकसित की। 2019 में देहरादून निवासी सुनील वर्मा, ट्रांसपोर्ट नगर निवासी शक्ति सिंह और सुंदरपुर निवासी अजय सिंह पार्टनर बने। पंकज का आरोप है कि जमीन में उन्होंने सबसे अधिक 38 लाख रुपये लगाए, लेकिन प्लॉट बिकने के बाद उन्हें मुनाफा नहीं मिला। इसी को लेकर विवाद चल रहा था। उनका कहना है कि बैठक के दौरान सुनील वर्मा, अजय सिंह और शक्ति सिंह ने पिस्टल से फायरिंग करने का आरोप है। इनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज है।
शिवालिक वन क्षेत्र की भाग रेंज में 4 फरवरी को जमीन के विवाद में फायरिंग हुई। जिसमें एक युवक की मौत हो गई। मामले में दूसरे पक्ष के चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। जिसमें उत्तराखंड में श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेशाध्यक्ष शक्ति सिंह भी है। आरोपी शक्ति सिंह ने फेसबुक पर लाइव आकर खुद को निर्दोष बताया है। वीडियो में बताया कि जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, उस पर पिछले करीब तीन वर्षों से न्यायालय का स्टे चल रहा है। इसी विवाद के समाधान के लिए पंचायत बुलाई गई थी। बताया जा रहा है कि पंचायत में दोनों पक्षों के अलावा बाहरी जिलों से भी लोग मौजूद थे। फेसबुक लाइव में ठाकुर शक्ति सिंह ने दावा किया कि उन्हें समाज के दो पक्षों के बीच समझौता कराने और विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए मध्यस्थ के तौर पर बुलाया गया था। कहा-वे घटना स्थल पर शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे और उनकी मौजूदगी में कोई फायरिंग नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत में शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और हरियाणा से कई लोग पहुंचे थे। साथ ही उन्होंने रविंदर राणा, योगेंद्र चौधरी और पंकज शर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने बाहरी और हिस्ट्रीशीटरों को बुलाया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोपी का कहना है कि वे जब वहां से निकले, उसके लगभग 100–150 मीटर की दूरी पर सैकड़ों राउंड फायरिंग हुई। इसी दौरान एक युवक को पीछे से गोली लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने मृतक को अपना 'छोटा भाई समान' बताते हुए गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि वे स्वयं इस घटना से आहत हैं। ठाकुर शक्ति सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि घटना से जुड़े सभी लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाली जाए और शिवालिक क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की गहन जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि वे 'एक प्रतिशत भी दोषी' पाए जाते हैं तो वे किसी भी तरह की जांच, यहां तक कि नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हैं। पढ़िए...पूरा मामला दरअसल, 4 फरवरी को गणेशपुर गांव के पास स्थित शिवालिक फार्म हाउस में प्रॉपर्टी विवाद के दौरान बुलाई गई शांति वार्ता खूनी संघर्ष में बदली। जमीन को लेकर चल रहे विवाद में अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिसमें 22 वर्षीय शिवम राणा की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, उस पर पिछले तीन वर्षों से न्यायालय का स्टे चल रहा है। इसके बावजूद समझौते के लिए पंचायत बुलाई गई थी। फार्म हाउस पर दोनों पक्षों के करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे। इसी दौरान रुपए के लेनदेन को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई और फिर फायरिंग में बदल गई। करीब 200 राउंड गोलियां चलीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। फायरिंग में थाना नागल क्षेत्र के साधारणपुर सिर गांव निवासी शिवम के सीने में गोली लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बागपत के बड़ौत निवासी मनीष और गाजियाबाद के योगेंद्र गोली लगने से घायल हुए थे। मामले में प्रॉपर्टी कारोबारी पंकज शर्मा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 2017-18 में बिहारीगढ़ में 87 लाख रुपए में जमीन खरीदी थी और बाद में महादेवपुरम कॉलोनी विकसित की। 2019 में देहरादून निवासी सुनील वर्मा, ट्रांसपोर्ट नगर निवासी शक्ति सिंह और सुंदरपुर निवासी अजय सिंह पार्टनर बने। पंकज का आरोप है कि जमीन में उन्होंने सबसे अधिक 38 लाख रुपये लगाए, लेकिन प्लॉट बिकने के बाद उन्हें मुनाफा नहीं मिला। इसी को लेकर विवाद चल रहा था। उनका कहना है कि बैठक के दौरान सुनील वर्मा, अजय सिंह और शक्ति सिंह ने पिस्टल से फायरिंग करने का आरोप है। इनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज है।