बाघ के हत्यारे जंगल में करते थे अफीम की खेती:जांच में खुलासा, बैल के शिकार का बदला लेने बाघ को जहर दिया

छिंदवाड़ा में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगलों से सामने आया बाघ की हत्या का मामला अब सिर्फ वन्यजीव अपराध नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे अवैध नशे के कारोबार का बड़ा कनेक्शन भी उजागर हुआ है। एक ओर जहां आरोपी ने बदले की भावना में बाघ को जहर देकर मार डाला, वहीं दूसरी ओर उसी जंगल में करोड़ों रुपए की अफीम की खेती का खुलासा होने से पूरा मामला बेहद गंभीर हो गया है। सांगाखेड़ा रेंज के छातीआम क्षेत्र में कॉलर लगे बाघ की लोकेशन अचानक बंद होने के बाद वन विभाग सतर्क हुआ। टीम ने जब लोकेशन ट्रेस कर सर्च ऑपरेशन चलाया तो सबसे पहले एक बैल का शव मिला। यहीं से शक गहराया कि बाघ किसी साजिश का शिकार हुआ है। डॉग स्क्वॉड की मदद से तलाशी आगे बढ़ी तो कुछ दूरी पर जमीन में दफनाया गया बाघ का शव मिला। इस तरह यह साफ हो गया कि बाघ की मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई है। बाघ ने बैल को शिकार बनाया था इसलिए उसे जहर दिया पूछताछ में मुख्य आरोपी उदेसिंग ने जो कबूल किया, उसने इस पूरी घटना की भयावहता सामने ला दी। उसने बताया कि कुछ दिन पहले बाघ ने उसके बैल का शिकार किया था। इस घटना से आक्रोशित होकर उसने बदला लेने का फैसला किया। आरोपी ने मृत बैल के शव में कीटनाशक मिलाकर उसे जंगल में ही छोड़ दिया, ताकि बाघ दोबारा लौटकर उसे खाए। जहरीला मांस खाने के बाद बाघ की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर शव को दफना दिया, ताकि किसी को भनक न लगे। लेकिन असली चौंकाने वाला खुलासा इसके बाद हुआ। जब पुलिस और वन विभाग की टीम आरोपी की निशानदेही पर उसके ठिकाने तक पहुंची, तो वहां जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती चलती मिली। टीम ने मौके से 6148 अफीम के पौधे बरामद किए, जिसका वजन 194.500 किलोग्राम जिसकी कीमत 20 लाख रुपए आकी गई है। यह खेती इतनी गुप्त और दुर्गम इलाके में की जा रही थी कि वहां तक पहुंचने के लिए पुलिस को करीब डेढ़ घंटे तक पैदल पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ा। नशे के करोबार को सुरक्षित रखने के लिए भी बाघ को मारा जांच एजेंसियों को अब संदेह है कि बाघ की हत्या और अफीम की खेती के बीच सीधा संबंध हो सकता है। जिस क्षेत्र में अवैध खेती हो रही थी, वहां बाघ की मौजूदगी इस नेटवर्क के लिए खतरा बन रही थी। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि आरोपी ने सिर्फ बदले की भावना में ही नहीं, बल्कि अपने अवैध कारोबार को सुरक्षित रखने के लिए भी बाघ को जहर देकर मार दिया। मुख्य आरोपी की निशानदेही पर तीन अन्य लोगों—बिसनलाल शीलू, मनोहर सिंह और कैलाल—को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस अवैध अफीम खेती के पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है और इसका नेटवर्क किन-किन इलाकों तक फैला हुआ है। इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जहां बाघ का शिकार, वहां एक एकड़ में अफीम लगी छिंदवाड़ा जिले के तामिया के पास स्थित छातीआम गांव में बाघ की हत्या के मामले में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जिस खेत में एसटीआर के बाघ को यूरिया देकर मारा गया था, वहीं पर चोरी-छिपे अफीम की खेती भी की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…

Mar 30, 2026 - 06:41
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बाघ के हत्यारे जंगल में करते थे अफीम की खेती:जांच में खुलासा, बैल के शिकार का बदला लेने बाघ को जहर दिया
छिंदवाड़ा में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगलों से सामने आया बाघ की हत्या का मामला अब सिर्फ वन्यजीव अपराध नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे अवैध नशे के कारोबार का बड़ा कनेक्शन भी उजागर हुआ है। एक ओर जहां आरोपी ने बदले की भावना में बाघ को जहर देकर मार डाला, वहीं दूसरी ओर उसी जंगल में करोड़ों रुपए की अफीम की खेती का खुलासा होने से पूरा मामला बेहद गंभीर हो गया है। सांगाखेड़ा रेंज के छातीआम क्षेत्र में कॉलर लगे बाघ की लोकेशन अचानक बंद होने के बाद वन विभाग सतर्क हुआ। टीम ने जब लोकेशन ट्रेस कर सर्च ऑपरेशन चलाया तो सबसे पहले एक बैल का शव मिला। यहीं से शक गहराया कि बाघ किसी साजिश का शिकार हुआ है। डॉग स्क्वॉड की मदद से तलाशी आगे बढ़ी तो कुछ दूरी पर जमीन में दफनाया गया बाघ का शव मिला। इस तरह यह साफ हो गया कि बाघ की मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई है। बाघ ने बैल को शिकार बनाया था इसलिए उसे जहर दिया पूछताछ में मुख्य आरोपी उदेसिंग ने जो कबूल किया, उसने इस पूरी घटना की भयावहता सामने ला दी। उसने बताया कि कुछ दिन पहले बाघ ने उसके बैल का शिकार किया था। इस घटना से आक्रोशित होकर उसने बदला लेने का फैसला किया। आरोपी ने मृत बैल के शव में कीटनाशक मिलाकर उसे जंगल में ही छोड़ दिया, ताकि बाघ दोबारा लौटकर उसे खाए। जहरीला मांस खाने के बाद बाघ की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर शव को दफना दिया, ताकि किसी को भनक न लगे। लेकिन असली चौंकाने वाला खुलासा इसके बाद हुआ। जब पुलिस और वन विभाग की टीम आरोपी की निशानदेही पर उसके ठिकाने तक पहुंची, तो वहां जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती चलती मिली। टीम ने मौके से 6148 अफीम के पौधे बरामद किए, जिसका वजन 194.500 किलोग्राम जिसकी कीमत 20 लाख रुपए आकी गई है। यह खेती इतनी गुप्त और दुर्गम इलाके में की जा रही थी कि वहां तक पहुंचने के लिए पुलिस को करीब डेढ़ घंटे तक पैदल पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ा। नशे के करोबार को सुरक्षित रखने के लिए भी बाघ को मारा जांच एजेंसियों को अब संदेह है कि बाघ की हत्या और अफीम की खेती के बीच सीधा संबंध हो सकता है। जिस क्षेत्र में अवैध खेती हो रही थी, वहां बाघ की मौजूदगी इस नेटवर्क के लिए खतरा बन रही थी। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि आरोपी ने सिर्फ बदले की भावना में ही नहीं, बल्कि अपने अवैध कारोबार को सुरक्षित रखने के लिए भी बाघ को जहर देकर मार दिया। मुख्य आरोपी की निशानदेही पर तीन अन्य लोगों—बिसनलाल शीलू, मनोहर सिंह और कैलाल—को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस अवैध अफीम खेती के पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है और इसका नेटवर्क किन-किन इलाकों तक फैला हुआ है। इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जहां बाघ का शिकार, वहां एक एकड़ में अफीम लगी छिंदवाड़ा जिले के तामिया के पास स्थित छातीआम गांव में बाघ की हत्या के मामले में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जिस खेत में एसटीआर के बाघ को यूरिया देकर मारा गया था, वहीं पर चोरी-छिपे अफीम की खेती भी की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…