बच्ची बोली- कार जल रही थी, सब चिल्ला रहे थे:बालाघाट में पूजा से लौटते वक्त लगी थी आग, 3 लोग जिंदा जल गए थे
धुआं हुआ तो सब खांसने लगे। सब लोग चिल्लाए तो फिर एक टैम्पों निकला। उसने रोकी, तो फिर कांच फोड़कर मुझे निकाला। इसके बाद और क्या कहें…आठ साल की पूर्वी राहंगडाले कुछ समझ नहीं पा रही हैं। चोट के सवाल पर कहती हैं- पैर में काला मार्क आ गया है। पूर्वी वही हैं, जिन्हें शनिवार रात (28 मार्च) को बालाघाट में जलती कार से बचाया गया था। बैहर-मलाजखंड रोड पर सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोग (ससुर-बहू और पोता) कार में जिंदा जल गए थे। आग में झुलसे सीतम और उनकी मां नानाबाई का इलाज गोंदिया में चल रहा है। कार चालक सीतम केलकर देर रात परिवार सहित पोंडी से पौनी जा रहे थे। केवलारी चौराहे के पास कार अनियंत्रित होकर गड्ढे में गिर गई। कुछ ही देर में गाड़ी आग के गोले में बदल गई। हादसे में मारे गए ससुर नगारची, बहू सविता और तीन साल के अभी केलकर का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। मंगलवार को दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड रिपोर्ट के लिए पहले बालाघाट से पौनी और फिर पौंडी पहुंची। पौनी में जलती कार से बचाई गई आठ साल की पूर्वी का घर है। खबर में आगे बढ़ने से पहले हादसे की 2 तस्वीरें देखिए… पूर्वी के घर के पास ही रहते थे सीतम केलकर कार चालक सीतम केलकर बालाघाट के पौंडी गांव के रहने वाले थे। 2019 में काम के सिलसिले में पौनी शिफ्ट हो गए थे। यहां वे परिवार सहित पूर्वी के घर के पास किराए के मकान में रहते थे। पूर्वी की मां की रिश्तेदारी सीतम के पैतृक गांव में थी। सीतम जब परिवार सहित पौनी से पौंडी आए तो पूर्वी को भी साथ लाए। घर के बरामदे में पूर्वी अपनी मां के साथ बैठी मिली। उम्र महज आठ साल है, लेकिन शनिवार रात का हर पल उन्हें याद है। टैम्पो चालक ने कांच फोड़कर बचाया हादसे वाली रात के बारे में पूछने पर पूर्वी कहती हैं- मैं कार की पिछली सीट पर दादा-दादी के साथ बैठी थी। सीतम अंकल गाड़ी चला रहे थे। सविता आंटी अभी को लेकर आगे बैठी थीं। थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई। सब लोग खांस रहे थे तो मेरी नींद खुल गई। सब लोग चिल्लाए तो एक टैम्पों रुका। उसने कांच फोड़कर मुझे निकाला। कार में उनकी फैमिली के पांच लोग थे और एक मैं थी। जिन्होंने मुझे निकाला, उन्हें मैं नहीं जानती। पैर दिखाते हुए कहती हैं- बस ये काला मार्क आ गया है। इसके बाद टीम मृतक के पैतृक गांव पौंडी पहुंची। एक साथ तीन अंतिम संस्कार किए गए घर के बाहर शामियाना लगा है। इसकी छांव में महिलाएं और बच्चे कुर्सियों पर बैठे हैं। कोई आपस में बात नहीं कर रहा। घर के सामने थोड़ी दूरी पर मृतक नगारची के छोटे बेटे प्रीतम लाल केलकर मिले। वे कहते हैं- कभी सोचा नहीं था कि एक साथ तीन लोगों का अंतिम संस्कार करना होगा। जब भतीजे को दफनाया तो मिट्टी हाथ से नहीं छूट रही थी। गांव वालों ने हाथ पकड़कर पिता और भाभी की चिता को अग्नि दिलवाई। मैंने अभी को आखिरी बार गोद में लिया प्रीतम कहते हैं, भैया, पिताजी और भाभी जब जा रहे थे, उस समय अभी मेरी गोद पर था। मैंने टाटा कहते हुए उसे भाभी की गोद में दिया था। दो घंटे बाद सब खत्म हो गया। लाशें पहचानी नहीं जा रही थीं। 2017 में सीतम भैया की शादी हुई थी। दो साल बाद उन्होंने पौनी में काम शुरू किया और वहीं रहने लगे। चार-पांच साल तक बच्चे नहीं हुए तो घर की महिलाओं ने माता रानी से मन्नत मांगने को कहा। मन्नत के बाद तीन साल पहले अभी का जन्म हुआ। वह बहुत सुंदर था, रंग दूध जैसा था। आखिरी बार सबने साथ खाना खाया प्रीतम कहते हैं, अभी के जन्म के बाद से भइया-भाभी हर नवरात्र में अष्टमी पर पौनी से पौंडी पूजन के लिए आते थे। इस बार वे पूजन से एक दिन पहले शुक्रवार को आ गए थे। शनिवार रात अष्टमी की पूजा के बाद सबने साथ खाना खाया। करीब 10-10:30 बजे वे कार से पौनी के लिए निकल गए। कुछ देर बाद मैं भी सो गया। रात करीब 12 बजे पुलिस का फोन आया। पुलिसवाले ने कार एक्सीडेंट की जानकारी दी, लेकिन यह नहीं बताया कि कार में आग लगी थी। लपटों में घिरे पड़े थे पिता और भाभी प्रीतम कहते हैं, रिश्तेदारों और गांववालों के साथ जब हादसे की जगह पहुंचा तो होश उड़ गए। कुछ समझ नहीं आ रहा था। भइया सीतम केलकर बुरी तरह झुलसे थे। मां नानाबाई की हालत कुछ ठीक थी। पड़ोसी की बेटी पूर्वी भी वहीं थी। पिता और भाई कार में लपटों से घिरे थे। मुझे चक्कर आ गए। इतने में एंबुलेंस आ गई। मैं गांववालों के साथ उन्हें गोंदिया के जानकी अस्पताल ले गया। कुछ रिश्तेदारों को वहां छोड़कर वापस पौंडी आ गया। यहां पिता, भाभी और भतीजे अभी का अंतिम संस्कार किया। अस्पताल में भइया सीतम की हालत ठीक नहीं है। तीन दिन हो गए हैं, उन्हें होश नहीं आया है। ये खबर भी पढ़ें… गड्ढे में गिरी कार, ससुर-बहू और पोता जिंदा जले बालाघाट में एक चलती कार अनियंत्रित होकर गड्ढे में जा गिरी। इससे उसमें आग लग गई, जो इतनी तेजी से फैली कि अंदर बैठे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। हादसे में तीन लोग जिंदा जल गए। पढ़ें पूरी खबर…
धुआं हुआ तो सब खांसने लगे। सब लोग चिल्लाए तो फिर एक टैम्पों निकला। उसने रोकी, तो फिर कांच फोड़कर मुझे निकाला। इसके बाद और क्या कहें…आठ साल की पूर्वी राहंगडाले कुछ समझ नहीं पा रही हैं। चोट के सवाल पर कहती हैं- पैर में काला मार्क आ गया है। पूर्वी वही हैं, जिन्हें शनिवार रात (28 मार्च) को बालाघाट में जलती कार से बचाया गया था। बैहर-मलाजखंड रोड पर सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोग (ससुर-बहू और पोता) कार में जिंदा जल गए थे। आग में झुलसे सीतम और उनकी मां नानाबाई का इलाज गोंदिया में चल रहा है। कार चालक सीतम केलकर देर रात परिवार सहित पोंडी से पौनी जा रहे थे। केवलारी चौराहे के पास कार अनियंत्रित होकर गड्ढे में गिर गई। कुछ ही देर में गाड़ी आग के गोले में बदल गई। हादसे में मारे गए ससुर नगारची, बहू सविता और तीन साल के अभी केलकर का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। मंगलवार को दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड रिपोर्ट के लिए पहले बालाघाट से पौनी और फिर पौंडी पहुंची। पौनी में जलती कार से बचाई गई आठ साल की पूर्वी का घर है। खबर में आगे बढ़ने से पहले हादसे की 2 तस्वीरें देखिए… पूर्वी के घर के पास ही रहते थे सीतम केलकर कार चालक सीतम केलकर बालाघाट के पौंडी गांव के रहने वाले थे। 2019 में काम के सिलसिले में पौनी शिफ्ट हो गए थे। यहां वे परिवार सहित पूर्वी के घर के पास किराए के मकान में रहते थे। पूर्वी की मां की रिश्तेदारी सीतम के पैतृक गांव में थी। सीतम जब परिवार सहित पौनी से पौंडी आए तो पूर्वी को भी साथ लाए। घर के बरामदे में पूर्वी अपनी मां के साथ बैठी मिली। उम्र महज आठ साल है, लेकिन शनिवार रात का हर पल उन्हें याद है। टैम्पो चालक ने कांच फोड़कर बचाया हादसे वाली रात के बारे में पूछने पर पूर्वी कहती हैं- मैं कार की पिछली सीट पर दादा-दादी के साथ बैठी थी। सीतम अंकल गाड़ी चला रहे थे। सविता आंटी अभी को लेकर आगे बैठी थीं। थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई। सब लोग खांस रहे थे तो मेरी नींद खुल गई। सब लोग चिल्लाए तो एक टैम्पों रुका। उसने कांच फोड़कर मुझे निकाला। कार में उनकी फैमिली के पांच लोग थे और एक मैं थी। जिन्होंने मुझे निकाला, उन्हें मैं नहीं जानती। पैर दिखाते हुए कहती हैं- बस ये काला मार्क आ गया है। इसके बाद टीम मृतक के पैतृक गांव पौंडी पहुंची। एक साथ तीन अंतिम संस्कार किए गए घर के बाहर शामियाना लगा है। इसकी छांव में महिलाएं और बच्चे कुर्सियों पर बैठे हैं। कोई आपस में बात नहीं कर रहा। घर के सामने थोड़ी दूरी पर मृतक नगारची के छोटे बेटे प्रीतम लाल केलकर मिले। वे कहते हैं- कभी सोचा नहीं था कि एक साथ तीन लोगों का अंतिम संस्कार करना होगा। जब भतीजे को दफनाया तो मिट्टी हाथ से नहीं छूट रही थी। गांव वालों ने हाथ पकड़कर पिता और भाभी की चिता को अग्नि दिलवाई। मैंने अभी को आखिरी बार गोद में लिया प्रीतम कहते हैं, भैया, पिताजी और भाभी जब जा रहे थे, उस समय अभी मेरी गोद पर था। मैंने टाटा कहते हुए उसे भाभी की गोद में दिया था। दो घंटे बाद सब खत्म हो गया। लाशें पहचानी नहीं जा रही थीं। 2017 में सीतम भैया की शादी हुई थी। दो साल बाद उन्होंने पौनी में काम शुरू किया और वहीं रहने लगे। चार-पांच साल तक बच्चे नहीं हुए तो घर की महिलाओं ने माता रानी से मन्नत मांगने को कहा। मन्नत के बाद तीन साल पहले अभी का जन्म हुआ। वह बहुत सुंदर था, रंग दूध जैसा था। आखिरी बार सबने साथ खाना खाया प्रीतम कहते हैं, अभी के जन्म के बाद से भइया-भाभी हर नवरात्र में अष्टमी पर पौनी से पौंडी पूजन के लिए आते थे। इस बार वे पूजन से एक दिन पहले शुक्रवार को आ गए थे। शनिवार रात अष्टमी की पूजा के बाद सबने साथ खाना खाया। करीब 10-10:30 बजे वे कार से पौनी के लिए निकल गए। कुछ देर बाद मैं भी सो गया। रात करीब 12 बजे पुलिस का फोन आया। पुलिसवाले ने कार एक्सीडेंट की जानकारी दी, लेकिन यह नहीं बताया कि कार में आग लगी थी। लपटों में घिरे पड़े थे पिता और भाभी प्रीतम कहते हैं, रिश्तेदारों और गांववालों के साथ जब हादसे की जगह पहुंचा तो होश उड़ गए। कुछ समझ नहीं आ रहा था। भइया सीतम केलकर बुरी तरह झुलसे थे। मां नानाबाई की हालत कुछ ठीक थी। पड़ोसी की बेटी पूर्वी भी वहीं थी। पिता और भाई कार में लपटों से घिरे थे। मुझे चक्कर आ गए। इतने में एंबुलेंस आ गई। मैं गांववालों के साथ उन्हें गोंदिया के जानकी अस्पताल ले गया। कुछ रिश्तेदारों को वहां छोड़कर वापस पौंडी आ गया। यहां पिता, भाभी और भतीजे अभी का अंतिम संस्कार किया। अस्पताल में भइया सीतम की हालत ठीक नहीं है। तीन दिन हो गए हैं, उन्हें होश नहीं आया है। ये खबर भी पढ़ें… गड्ढे में गिरी कार, ससुर-बहू और पोता जिंदा जले बालाघाट में एक चलती कार अनियंत्रित होकर गड्ढे में जा गिरी। इससे उसमें आग लग गई, जो इतनी तेजी से फैली कि अंदर बैठे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। हादसे में तीन लोग जिंदा जल गए। पढ़ें पूरी खबर…