गौमाता को राष्ट्र माता दिलाने की देशव्यापी मांग:गौसेवकों ने राज्यपाल के नाम दिया ज्ञापन; गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की भी मांग
डिंडोरी में सोमवार को गौ सम्मान आव्हान अभियान के सदस्यों ने गौ वंश के संरक्षण और संवर्धन की मांग को लेकर रैली निकाली। कार्यकर्ताओं ने नर्मदा डैम घाट से कलेक्ट्रेट तक मार्च किया और डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन दिया। ज्ञापन में गौ वंश की रक्षा के लिए कठोर कानून बनाने की मांग की गई है। अभियान के सदस्यों ने बताया कि सड़क किनारे आवारा घूमते गौ वंश अक्सर सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं, जिससे वे घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। कभी-कभी इन दुर्घटनाओं से जनहानि भी होती है। गौसेवक बोले-गौ वंश के नाम पर केवल राजनीति करते हैं सदस्यों ने यह भी उल्लेख किया कि गौ वंश का बूचड़खानों में कत्ल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन गौ वंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। राजनीतिक दल भी गौ वंश के नाम पर केवल राजनीति करते रहे हैं। अभियान के सदस्य दीपेंद्र जोगी ने बताया कि वर्तमान में प्रति दस व्यक्तियों पर केवल एक गौ वंश बचा है, और यह प्रजाति अब लुप्त होने की कगार पर है। उनका कहना था कि इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बल्कि देश की मूल लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक जड़ें भी कमजोर हो रही हैं। गौमाता को राष्ट्र माता की मान्यता देने की मांग ज्ञापन में सरकार से गौमाता को राष्ट्र माता की मान्यता देने, पंचायत स्तर पर नंदी शालाओं का निर्माण करवाने, नेशनल और स्टेट हाईवे पर गो वाहिनी एंबुलेंस और ट्रॉमा सेंटर खोलने, स्कूली पाठ्यक्रमों में गो विज्ञान विषय को शामिल करने, तथा चारा सुरक्षा कानून और गो चर विकास बोर्ड का गठन करने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान अतुल जैन, जितेंद्र विश्वकर्मा, भवानी प्रसाद दुबे, आदित्य वैश्य, रोहित जोगी, करण सरैया, अमन परमार, शैलेन्द्र सौरभ सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
डिंडोरी में सोमवार को गौ सम्मान आव्हान अभियान के सदस्यों ने गौ वंश के संरक्षण और संवर्धन की मांग को लेकर रैली निकाली। कार्यकर्ताओं ने नर्मदा डैम घाट से कलेक्ट्रेट तक मार्च किया और डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन दिया। ज्ञापन में गौ वंश की रक्षा के लिए कठोर कानून बनाने की मांग की गई है। अभियान के सदस्यों ने बताया कि सड़क किनारे आवारा घूमते गौ वंश अक्सर सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं, जिससे वे घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। कभी-कभी इन दुर्घटनाओं से जनहानि भी होती है। गौसेवक बोले-गौ वंश के नाम पर केवल राजनीति करते हैं सदस्यों ने यह भी उल्लेख किया कि गौ वंश का बूचड़खानों में कत्ल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन गौ वंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। राजनीतिक दल भी गौ वंश के नाम पर केवल राजनीति करते रहे हैं। अभियान के सदस्य दीपेंद्र जोगी ने बताया कि वर्तमान में प्रति दस व्यक्तियों पर केवल एक गौ वंश बचा है, और यह प्रजाति अब लुप्त होने की कगार पर है। उनका कहना था कि इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बल्कि देश की मूल लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक जड़ें भी कमजोर हो रही हैं। गौमाता को राष्ट्र माता की मान्यता देने की मांग ज्ञापन में सरकार से गौमाता को राष्ट्र माता की मान्यता देने, पंचायत स्तर पर नंदी शालाओं का निर्माण करवाने, नेशनल और स्टेट हाईवे पर गो वाहिनी एंबुलेंस और ट्रॉमा सेंटर खोलने, स्कूली पाठ्यक्रमों में गो विज्ञान विषय को शामिल करने, तथा चारा सुरक्षा कानून और गो चर विकास बोर्ड का गठन करने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान अतुल जैन, जितेंद्र विश्वकर्मा, भवानी प्रसाद दुबे, आदित्य वैश्य, रोहित जोगी, करण सरैया, अमन परमार, शैलेन्द्र सौरभ सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।