ओंकारेश्वर में नर्मदा संरक्षण की अनूठी पहल:आटे के दीपकों से हो रहा दीपदान, महिलाओं को भी मिल रहा रोजगार

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए ओंकारेश्वर में एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा अब नर्मदा महाआरती के दौरान दीपदान के लिए आटे से बने पर्यावरण अनुकूल दीपकों का उपयोग कराया जा रहा है। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आटे से तैयार दीपक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य नर्मदा में प्लास्टिक, थर्माकोल और अन्य हानिकारक सामग्री के प्रवाह को रोकना है, जो लंबे समय से नदी प्रदूषण का कारण बन रही थीं। हर दिन हो रही भव्य नर्मदा महाआरती ओंकारेश्वर में अब हर शाम मां नर्मदा के तट पर भव्य महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन हरिद्वार और ऋषिकेश की तर्ज पर शुरू किया गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होकर दीपदान करते हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होकर आस्था प्रकट कर रहे हैं। पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए सुरक्षित प्रशासन के अनुसार, आटे से बने दीपकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दीपक की बत्ती बुझने के बाद आटा पानी में घुल जाता है। इससे नदी को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि यह मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए भोजन का कार्य करता है। इस पहल से जल प्रदूषण पर नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। महिलाओं को मिल रहा रोजगार इस पहल का सामाजिक पक्ष भी मजबूत है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को आटे के दीपक बनाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। आस्था के साथ जागरूकता का संदेश प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के बीच स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रभावी माध्यम भी बन रही है। ओंकारेश्वर में शुरू हुआ यह प्रयास अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।

May 4, 2026 - 07:44
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ओंकारेश्वर में नर्मदा संरक्षण की अनूठी पहल:आटे के दीपकों से हो रहा दीपदान, महिलाओं को भी मिल रहा रोजगार
मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए ओंकारेश्वर में एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा अब नर्मदा महाआरती के दौरान दीपदान के लिए आटे से बने पर्यावरण अनुकूल दीपकों का उपयोग कराया जा रहा है। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आटे से तैयार दीपक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य नर्मदा में प्लास्टिक, थर्माकोल और अन्य हानिकारक सामग्री के प्रवाह को रोकना है, जो लंबे समय से नदी प्रदूषण का कारण बन रही थीं। हर दिन हो रही भव्य नर्मदा महाआरती ओंकारेश्वर में अब हर शाम मां नर्मदा के तट पर भव्य महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन हरिद्वार और ऋषिकेश की तर्ज पर शुरू किया गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होकर दीपदान करते हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होकर आस्था प्रकट कर रहे हैं। पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए सुरक्षित प्रशासन के अनुसार, आटे से बने दीपकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दीपक की बत्ती बुझने के बाद आटा पानी में घुल जाता है। इससे नदी को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि यह मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए भोजन का कार्य करता है। इस पहल से जल प्रदूषण पर नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। महिलाओं को मिल रहा रोजगार इस पहल का सामाजिक पक्ष भी मजबूत है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को आटे के दीपक बनाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। आस्था के साथ जागरूकता का संदेश प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के बीच स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रभावी माध्यम भी बन रही है। ओंकारेश्वर में शुरू हुआ यह प्रयास अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।