छिंदवाड़ा का कन्हरगांव डैम सूखा, डेड स्टोरेज से निकलेगा पानी:निगम लगा रहा 40 HP के 3 मोटर पंप; जानिए किन इलाकों में सप्लाई रहेगी प्रभावित...
छिंदवाड़ा शहर की प्यास बुझाने वाला कन्हरगांव डैम अब लगभग सूख चुका है। जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि अब नगर निगम को डैम के 'डेड स्टोरेज' से पानी निकालकर शहर तक पहुंचाना पड़ रहा है। पानी को लिफ्ट कर भरतादेव फिल्टर प्लांट तक पहुंचाने के लिए 40 हॉर्स पावर के 3 फ्लोटिंग मोटर पंप इंस्टॉल किए जा रहे हैं। डेड स्टोरेज से पानी लिफ्ट करने की इस नई व्यवस्था के लिए शुक्रवार देर शाम तक डैम पर युद्धस्तर पर काम जारी रहा। इसी कारण शनिवार को भरतादेव फिल्टर प्लांट से सप्लाई होने वाले कई इलाकों में जल वितरण प्रभावित रहेगा। निगम अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद शहर में नियमित जलापूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। प्राकृतिक दबाव खत्म, बनाई गई अस्थायी नाली
डैम में पानी का स्तर इतना नीचे पहुंच गया है कि वह अपने प्राकृतिक दबाव से ग्रेविटी कैनाल तक नहीं जा पा रहा है। ऐसे में निगम ने डेड वॉटर वाले हिस्से से कैनाल तक एक अस्थायी नाली तैयार की है। इस काम को पूरा करने के लिए डैम में 200 केवी का एक नया ट्रांसफार्मर भी लगाया गया है। अब फ्लोटिंग मोटर पंपों की मदद से निचले हिस्से का पानी उठाकर इन्हीं नालियों के जरिए ग्रेविटी कैनाल में छोड़ा जाएगा, जहां से यह फिल्टर प्लांट तक पहुंचेगा। समय पर वैकल्पिक व्यवस्था न होने से गहराया संकट
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को लेकर पहले से ही हालात खराब हैं, वहीं अब शहरी क्षेत्र भी इस संकट की चपेट में आ गया है। नगर निगम समय रहते पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बना सका, जिसके चलते अब आपात स्थिति में डेड स्टोरेज का सहारा लेना पड़ रहा है। अगर मानसून में कुछ और देरी हुई, तो आने वाले दिनों में शहर का पेयजल संकट काफी गंभीर हो सकता है।
छिंदवाड़ा शहर की प्यास बुझाने वाला कन्हरगांव डैम अब लगभग सूख चुका है। जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि अब नगर निगम को डैम के 'डेड स्टोरेज' से पानी निकालकर शहर तक पहुंचाना पड़ रहा है। पानी को लिफ्ट कर भरतादेव फिल्टर प्लांट तक पहुंचाने के लिए 40 हॉर्स पावर के 3 फ्लोटिंग मोटर पंप इंस्टॉल किए जा रहे हैं। डेड स्टोरेज से पानी लिफ्ट करने की इस नई व्यवस्था के लिए शुक्रवार देर शाम तक डैम पर युद्धस्तर पर काम जारी रहा। इसी कारण शनिवार को भरतादेव फिल्टर प्लांट से सप्लाई होने वाले कई इलाकों में जल वितरण प्रभावित रहेगा। निगम अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद शहर में नियमित जलापूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। प्राकृतिक दबाव खत्म, बनाई गई अस्थायी नाली
डैम में पानी का स्तर इतना नीचे पहुंच गया है कि वह अपने प्राकृतिक दबाव से ग्रेविटी कैनाल तक नहीं जा पा रहा है। ऐसे में निगम ने डेड वॉटर वाले हिस्से से कैनाल तक एक अस्थायी नाली तैयार की है। इस काम को पूरा करने के लिए डैम में 200 केवी का एक नया ट्रांसफार्मर भी लगाया गया है। अब फ्लोटिंग मोटर पंपों की मदद से निचले हिस्से का पानी उठाकर इन्हीं नालियों के जरिए ग्रेविटी कैनाल में छोड़ा जाएगा, जहां से यह फिल्टर प्लांट तक पहुंचेगा। समय पर वैकल्पिक व्यवस्था न होने से गहराया संकट
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को लेकर पहले से ही हालात खराब हैं, वहीं अब शहरी क्षेत्र भी इस संकट की चपेट में आ गया है। नगर निगम समय रहते पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बना सका, जिसके चलते अब आपात स्थिति में डेड स्टोरेज का सहारा लेना पड़ रहा है। अगर मानसून में कुछ और देरी हुई, तो आने वाले दिनों में शहर का पेयजल संकट काफी गंभीर हो सकता है।