'पोपटलाल की शादी हुई तो मेरी दुकान बंद':इंदौर में 'तारक मेहता' के अब्दुल बोले- उसकी टांग खिंचाई से ही चलता है धंधा
पोपटलाल की टांग खिंचाई से ही मेरी दुकान चलती है। उसकी शादी हो गई तो कॉमेडी का यह मजा खत्म हो जाएगा। टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अब्दुल का किरदार निभाने वाले अभिनेता शरद सांखला ने यह बात मजाकिया अंदाज में इंदौर में कही। उन्होंने कहा कि 18 साल बाद भी यह शो दर्शकों की पहली पसंद बना हुआ है। अब यह केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोगों के लिए टॉनिक बन गया है। रात 8:30 बजे शो देखना कई परिवारों की दिनचर्या का हिस्सा है। शरद सांखला ने शो के लंबे सफर, किरदारों की लोकप्रियता और दर्शकों के जुड़ाव पर बात की। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम की सफलता केवल टीआरपी से नहीं मापी जा सकती। असली कामयाबी यह है कि दर्शक उसके किरदारों को अपने परिवार का हिस्सा मानने लगें और हर दिन अगले एपिसोड का इंतजार करें। चंपक चाचा का किरदार सबसे पसंदीदा शरद सांखला ने बताया कि शो में उन्हें चंपक चाचा का किरदार सबसे ज्यादा पसंद है। इस भूमिका की खासियत यह है कि एक युवा कलाकार ने पर्दे पर करीब 75 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाया। शो की लोकप्रियता किसी एक कलाकार की वजह से नहीं, बल्कि पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है। छह माह त्योहार, बाकी समय नई कहानी की चुनौती शरद सांखला ने कहा कि त्योहारों के दौरान कहानी के लिए कई विषय मिल जाते हैं, लेकिन साल के बाकी समय दर्शकों को कुछ नया दिखाना लेखकों के लिए चुनौती बन जाता है। करीब छह महीने तक त्योहारों से जुड़े प्रसंगों पर कहानियां बनाई जा सकती हैं। इसके बाद नए विषय तलाशने पड़ते हैं। लेखकों की टीम लगातार नए विचारों पर काम करती है। कलाकार भी रीडिंग के दौरान अपने सुझाव देते हैं। हालांकि, 18 साल के सफर में कुछ कहानियां दोहराव वाली लग सकती हैं। ऐसे में दर्शकों की रुचि बनाए रखने के लिए नए विषयों और नए अंदाज में कहानी पेश करना जरूरी है। पुराने कलाकारों से भावनात्मक जुड़ाव शो में दया, रोशन और तारक मेहता जैसे किरदारों में बदलाव को लेकर उन्होंने कहा कि दर्शक किरदार के साथ उसे निभाने वाले कलाकार से भी जुड़ जाते हैं। लंबे समय तक किसी भूमिका में नजर आने वाला कलाकार दर्शकों के मन में अपनी अलग पहचान बना लेता है। ऐसे में कलाकार बदलने पर दर्शकों को पुराने चेहरे की याद आती है। पर्दे पर अब्दुल, घर में राजस्थानी मारवाड़ी शरद सांखला ने अपने असल जीवन और पर्दे के किरदार के बीच का अंतर बताते हुए कहा समाज के लिए मैं अब्दुल हूं, लेकिन घर में कदम रखते ही मैं राजस्थानी मारवाड़ी हूं। उन्होंने बताया कि वे राजस्थान से आते हैं और परिवार के साथ मारवाड़ी में बात करते हैं। शो में अब्दुल की पहचान उसकी सोडा शॉप और गोकुलधाम सोसायटी के लोगों से है। सोसायटी के बाहर रहने के कारण उसका किरदार अंदर और बाहर की दुनिया के बीच एक कड़ी का काम करता है। ईद और सोडा शॉप के प्रसंगों से जुड़ते हैं दर्शक सांखला के कहा कि अब्दुल का किरदार केवल सोडा बेचने तक सीमित नहीं है। गोकुलधाम सोसायटी के लोगों के साथ उसके रिश्ते भी उसकी पहचान हैं। ईद के प्रसंग हों या सोडा शॉप टूटने जैसी घटनाएं, इन कहानियों में उसका भावनात्मक पक्ष सामने आता है। यही वजह है कि दर्शक उसके किरदार से जुड़ाव महसूस करते हैं। पोपटलाल की शादी का इंतजार, लेकिन कुंवारेपन में ही कॉमेडी पोपटलाल की शादी शो की चर्चित कहानियों में से एक है। उसकी शादी की कोशिशों और बार-बार बनने-बिगड़ने वाले रिश्तों पर दूसरे किरदार उसकी खिंचाई करते हैं। इस सवाल पर सांखला ने चुटकी लेते हुए कहा कि पोपटलाल की शादी हो गई तो उसकी टांग खिंचाई का मौका कम हो जाएगा। उनकी सोडा शॉप की रौनक भी इसी मजाक से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि 18 साल बाद भी शो की लोकप्रियता का बड़ा कारण यही रोजमर्रा का हास्य, किरदारों के बीच की नोकझोंक और परिवार के साथ बैठकर देखने लायक मनोरंजन है।
पोपटलाल की टांग खिंचाई से ही मेरी दुकान चलती है। उसकी शादी हो गई तो कॉमेडी का यह मजा खत्म हो जाएगा। टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अब्दुल का किरदार निभाने वाले अभिनेता शरद सांखला ने यह बात मजाकिया अंदाज में इंदौर में कही। उन्होंने कहा कि 18 साल बाद भी यह शो दर्शकों की पहली पसंद बना हुआ है। अब यह केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोगों के लिए टॉनिक बन गया है। रात 8:30 बजे शो देखना कई परिवारों की दिनचर्या का हिस्सा है। शरद सांखला ने शो के लंबे सफर, किरदारों की लोकप्रियता और दर्शकों के जुड़ाव पर बात की। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम की सफलता केवल टीआरपी से नहीं मापी जा सकती। असली कामयाबी यह है कि दर्शक उसके किरदारों को अपने परिवार का हिस्सा मानने लगें और हर दिन अगले एपिसोड का इंतजार करें। चंपक चाचा का किरदार सबसे पसंदीदा शरद सांखला ने बताया कि शो में उन्हें चंपक चाचा का किरदार सबसे ज्यादा पसंद है। इस भूमिका की खासियत यह है कि एक युवा कलाकार ने पर्दे पर करीब 75 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाया। शो की लोकप्रियता किसी एक कलाकार की वजह से नहीं, बल्कि पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है। छह माह त्योहार, बाकी समय नई कहानी की चुनौती शरद सांखला ने कहा कि त्योहारों के दौरान कहानी के लिए कई विषय मिल जाते हैं, लेकिन साल के बाकी समय दर्शकों को कुछ नया दिखाना लेखकों के लिए चुनौती बन जाता है। करीब छह महीने तक त्योहारों से जुड़े प्रसंगों पर कहानियां बनाई जा सकती हैं। इसके बाद नए विषय तलाशने पड़ते हैं। लेखकों की टीम लगातार नए विचारों पर काम करती है। कलाकार भी रीडिंग के दौरान अपने सुझाव देते हैं। हालांकि, 18 साल के सफर में कुछ कहानियां दोहराव वाली लग सकती हैं। ऐसे में दर्शकों की रुचि बनाए रखने के लिए नए विषयों और नए अंदाज में कहानी पेश करना जरूरी है। पुराने कलाकारों से भावनात्मक जुड़ाव शो में दया, रोशन और तारक मेहता जैसे किरदारों में बदलाव को लेकर उन्होंने कहा कि दर्शक किरदार के साथ उसे निभाने वाले कलाकार से भी जुड़ जाते हैं। लंबे समय तक किसी भूमिका में नजर आने वाला कलाकार दर्शकों के मन में अपनी अलग पहचान बना लेता है। ऐसे में कलाकार बदलने पर दर्शकों को पुराने चेहरे की याद आती है। पर्दे पर अब्दुल, घर में राजस्थानी मारवाड़ी शरद सांखला ने अपने असल जीवन और पर्दे के किरदार के बीच का अंतर बताते हुए कहा समाज के लिए मैं अब्दुल हूं, लेकिन घर में कदम रखते ही मैं राजस्थानी मारवाड़ी हूं। उन्होंने बताया कि वे राजस्थान से आते हैं और परिवार के साथ मारवाड़ी में बात करते हैं। शो में अब्दुल की पहचान उसकी सोडा शॉप और गोकुलधाम सोसायटी के लोगों से है। सोसायटी के बाहर रहने के कारण उसका किरदार अंदर और बाहर की दुनिया के बीच एक कड़ी का काम करता है। ईद और सोडा शॉप के प्रसंगों से जुड़ते हैं दर्शक सांखला के कहा कि अब्दुल का किरदार केवल सोडा बेचने तक सीमित नहीं है। गोकुलधाम सोसायटी के लोगों के साथ उसके रिश्ते भी उसकी पहचान हैं। ईद के प्रसंग हों या सोडा शॉप टूटने जैसी घटनाएं, इन कहानियों में उसका भावनात्मक पक्ष सामने आता है। यही वजह है कि दर्शक उसके किरदार से जुड़ाव महसूस करते हैं। पोपटलाल की शादी का इंतजार, लेकिन कुंवारेपन में ही कॉमेडी पोपटलाल की शादी शो की चर्चित कहानियों में से एक है। उसकी शादी की कोशिशों और बार-बार बनने-बिगड़ने वाले रिश्तों पर दूसरे किरदार उसकी खिंचाई करते हैं। इस सवाल पर सांखला ने चुटकी लेते हुए कहा कि पोपटलाल की शादी हो गई तो उसकी टांग खिंचाई का मौका कम हो जाएगा। उनकी सोडा शॉप की रौनक भी इसी मजाक से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि 18 साल बाद भी शो की लोकप्रियता का बड़ा कारण यही रोजमर्रा का हास्य, किरदारों के बीच की नोकझोंक और परिवार के साथ बैठकर देखने लायक मनोरंजन है।