रीवा में संयुक्त किसान मोर्चा की ट्रैक्टर रैली:MSP पर कानूनी गारंटी के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे; बिजली बिल 2025 वापस लेने की मांग

रीवा में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने अपनी मांगों को लेकर ट्रैक्टर रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में किसान और मजदूर ट्रैक्टरों के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी और नए बिजली विधेयक का विरोध करना है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले निकाली गई इस रैली में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि वर्ष 2014 में किए गए वादे के बावजूद अब तक फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी लागू नहीं की गई है। उन्होंने मांग की है कि सभी फसलों की खरीद एमएसपी को सी2 लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे के साथ सुनिश्चित किया जाए। स्मार्ट मीटर और बिजली निजीकरण का विरोध ज्ञापन में किसानों ने नए बिजली विधेयक 2025 को वापस लेने और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद करने, सभी परिवारों को प्रतिमाह 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है। मांगें नहीं मानी तो तेज होगा आंदोलन किसान नेता शिव सिंह ने कहा, "एमएसपी की कानूनी गारंटी, बिजली विधेयक की वापसी और किसानों को मुफ्त बिजली हमारी प्रमुख मांगें हैं। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।" किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

रीवा में संयुक्त किसान मोर्चा की ट्रैक्टर रैली:MSP पर कानूनी गारंटी के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे; बिजली बिल 2025 वापस लेने की मांग
रीवा में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने अपनी मांगों को लेकर ट्रैक्टर रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में किसान और मजदूर ट्रैक्टरों के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी और नए बिजली विधेयक का विरोध करना है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले निकाली गई इस रैली में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि वर्ष 2014 में किए गए वादे के बावजूद अब तक फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी लागू नहीं की गई है। उन्होंने मांग की है कि सभी फसलों की खरीद एमएसपी को सी2 लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे के साथ सुनिश्चित किया जाए। स्मार्ट मीटर और बिजली निजीकरण का विरोध ज्ञापन में किसानों ने नए बिजली विधेयक 2025 को वापस लेने और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद करने, सभी परिवारों को प्रतिमाह 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है। मांगें नहीं मानी तो तेज होगा आंदोलन किसान नेता शिव सिंह ने कहा, "एमएसपी की कानूनी गारंटी, बिजली विधेयक की वापसी और किसानों को मुफ्त बिजली हमारी प्रमुख मांगें हैं। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।" किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।