खुर्जा में राष्ट्रवादी प्रताप सेना जिलाध्यक्ष गौरव तोमर नजरबंद:UGC बिल का विरोध, भारत बंद को समर्थन देने का ऐलान
खुर्जा में राष्ट्रवादी प्रताप सेना जिलाध्यक्ष गौरव तोमर नजरबंद:UGC बिल का विरोध, भारत बंद को समर्थन देने का ऐलान
खुरजा में राष्ट्रवादी प्रताप सेना के जिलाध्यक्ष गौरव तोमर को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने यूजीसी बिल के विरोध में बुलाए गए 'भारत बंद' को समर्थन देने का ऐलान किया था। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुबह ही उनके घर की घेराबंदी कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। नजरबंदी के दौरान मीडिया से बात करते हुए गौरव तोमर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यूजीसी बिल को 'काला कानून' बताते हुए कहा कि जब तक सरकार इसे वापस नहीं लेती, वे शांत नहीं बैठेंगे। तोमर ने तर्क दिया कि स्कूल शिक्षा के मंदिर होते हैं, जहां सभी समाज के बच्चे एक साथ पढ़ते हैं, इसलिए वहां जातिवाद और भेदभाव को बढ़ावा देने वाले कानून की आवश्यकता नहीं है। गौरव तोमर ने आरक्षण व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी और माननीय न्यायालय के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गरीब की कोई जाति नहीं होती, वह सिर्फ गरीब होता है। इसलिए सरकार को आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाना चाहिए। उन्होंने 'एक देश, एक कानून' की मांग भी की। स्वर्ण समाज की अनदेखी पर तोमर ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि जो पार्टियां स्वर्ण समाज के हितों के खिलाफ गई हैं, उनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उन्होंने भाजपा सरकार को आगाह किया कि यदि स्वर्ण समाज के खिलाफ कानून बनाकर उन्हें नजरअंदाज किया गया, तो सरकार आगामी चुनावों में वोटों के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएगी। इस दौरान गौरव तोमर के साथ योगेश चौहान, ललित कुमार तोमर, विवेक राघव, पीयूष शर्मा, अजेश कुमार तोमर, गाजेयपाल सिंह तोमर और अनुज चौहान सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
खुरजा में राष्ट्रवादी प्रताप सेना के जिलाध्यक्ष गौरव तोमर को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने यूजीसी बिल के विरोध में बुलाए गए 'भारत बंद' को समर्थन देने का ऐलान किया था। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुबह ही उनके घर की घेराबंदी कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। नजरबंदी के दौरान मीडिया से बात करते हुए गौरव तोमर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यूजीसी बिल को 'काला कानून' बताते हुए कहा कि जब तक सरकार इसे वापस नहीं लेती, वे शांत नहीं बैठेंगे। तोमर ने तर्क दिया कि स्कूल शिक्षा के मंदिर होते हैं, जहां सभी समाज के बच्चे एक साथ पढ़ते हैं, इसलिए वहां जातिवाद और भेदभाव को बढ़ावा देने वाले कानून की आवश्यकता नहीं है। गौरव तोमर ने आरक्षण व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी और माननीय न्यायालय के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गरीब की कोई जाति नहीं होती, वह सिर्फ गरीब होता है। इसलिए सरकार को आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाना चाहिए। उन्होंने 'एक देश, एक कानून' की मांग भी की। स्वर्ण समाज की अनदेखी पर तोमर ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि जो पार्टियां स्वर्ण समाज के हितों के खिलाफ गई हैं, उनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उन्होंने भाजपा सरकार को आगाह किया कि यदि स्वर्ण समाज के खिलाफ कानून बनाकर उन्हें नजरअंदाज किया गया, तो सरकार आगामी चुनावों में वोटों के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएगी। इस दौरान गौरव तोमर के साथ योगेश चौहान, ललित कुमार तोमर, विवेक राघव, पीयूष शर्मा, अजेश कुमार तोमर, गाजेयपाल सिंह तोमर और अनुज चौहान सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।